ग्रीन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर नया सहयोग: एनएलसीआईएल और सी‑डैक ने ममू पर हस्ताक्षर
परिचय
नई दिल्ली में आयोजित सेमीकॉन इंडिया 2026 के दौरान एनएलसी इंडिया लिमिटेड (एनएलसीआईएल) ने अपने हरित ऊर्जा सहायक, एनएलसी इंडिया रिन्यूएबल्स लिमिटेड (एनआईआरएल) के माध्यम से सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी‑डैक) के साथ एक रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य हरित डिजिटल अवसंरचना और उन्नत कंप्यूटिंग तकनीकों के क्षेत्र में नई संभावनाओं की खोज करना है।
मुख्य घटनाक्रम
समझौते पर हस्ताक्षर एनआईआरएल के निदेशक रामचंद्र पाराशर और सी‑डैक के कार्यकारी निदेशक स.द. सुदर्शन ने सेमीकॉन इंडिया के दौरान किए। यह बैठक नई दिल्ली के एक प्रतिष्ठित सम्मेलन केंद्र में आयोजित हुई, जहाँ दोनों पक्षों ने भविष्य के सहयोग के लिए अपनी दृष्टि साझा की।
महत्वपूर्ण जानकारी
– एनआईआरएल की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमताएँ, विशेष रूप से सौर, पवन और ऊर्जा भंडारण परियोजनाएँ, इस सहयोग का आधार बनेंगी।
– सी‑डैक की उन्नत कंप्यूटिंग और डिजिटल तकनीक में विशेषज्ञता, उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्रों में, इस समझौते के प्रमुख घटक हैं।
– दोनों संस्थाएँ ऊर्जा‑संचालित डेटा सेंटरों के लिए तकनीकी समर्थन और परामर्श सेवाएँ विकसित करने पर सहमत हुई हैं, जिससे डिजिटल अवसंरचना अधिक ऊर्जा‑कुशल और सतत हो सके।
– यह समझौता भविष्य में उभरती और रणनीतिक तकनीकी डोमेनों में संयुक्त पहलों के लिए मार्ग प्रशस्त करेगा।
संबंधित बयान
एनएलसीआईएल के प्रवक्ता ने कहा, “इस सहयोग से हम नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत कंप्यूटिंग के संगम पर नवीन समाधान विकसित कर सकते हैं। यह भारत के डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों के अनुरूप है।”
सी‑डैक के स.द. सुदर्शन ने जोड़ते हुए कहा, “एनआईआरएल के साथ यह साझेदारी हमें हरित ऊर्जा से संचालित डेटा सेंटरों के लिए नई तकनीकी संभावनाएँ खोजने में सक्षम बनाएगी। हम ऊर्जा दक्षता और डिजिटल नवाचार के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
प्रभाव या संदर्भ
इस सहयोग के माध्यम से भारत में ऊर्जा‑संचालित डेटा सेंटरों की संख्या में वृद्धि की उम्मीद है, जो न केवल ऊर्जा लागत को घटाएगा बल्कि कार्बन फुटप्रिंट को भी कम करेगा।
उच्च‑प्रदर्शन कंप्यूटिंग और एआई के क्षेत्र में यह संयुक्त प्रयास भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगा, विशेषकर क्वांटम कंप्यूटिंग जैसे उभरते क्षेत्रों में।
साथ ही, यह साझेदारी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए तकनीकी परामर्श और समर्थन के नए मॉडल को भी पेश करेगी, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल अवसंरचना का विकास संभव होगा।
निष्कर्ष
एनएलसीआईएल और सी‑डैक के बीच यह समझौता हरित ऊर्जा और उन्नत कंप्यूटिंग के संगम पर नई संभावनाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। दोनों संस्थाएँ मिलकर ऊर्जा‑कुशल, सतत और तकनीक‑प्रेरित डिजिटल इकोसिस्टम के निर्माण में योगदान देंगी, जिससे भारत के डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को साकार करने में एक नया आयाम जुड़ जाएगा।
