भारत डाइनेमिक्स को 811 करोड़ का सौदा: भारतीय वायुसेना के लिए एंटी‑एयरफ़ील्ड ग्लाइड बम
परिचय
रक्षा मंत्रालय ने बुधवार को भारत डाइनेमिक्स लिमिटेड के साथ 160 सैट‑स्मार्ट एंटी‑एयरफ़ील्ड वेपन (सैट‑एसएएडब्ल्यू) और संबद्ध उपकरणों की खरीद के लिए ₹810.79 करोड़ का अनुबंध हस्ताक्षरित किया। यह सौदा “खरीदो भारत – स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकास एवं निर्माण” के तहत आता है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में यह समझौता हुआ।
मुख्य घटनाक्रम
– अनुबंध की राशि: ₹810.79 करोड़
– हथियार: 160 सैट‑एसएएडब्ल्यू
– डिलीवरी तिथियाँ: 2027‑2028 और 2028‑2029
– खरीद का उद्देश्य: भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमताओं को बढ़ाना
– स्वदेशीकरण: 60 % सामग्री एवं उप‑सिस्टम का स्वदेशीकरण
सैट‑एसएएडब्ल्यू एक एयर‑टू‑ग्राउंड प्रिसीजन‑गाइडेड ग्लाइड बम है जिसे जगर, हॉव और एसयू‑30 एमकेआई जैसे विमानों से लॉन्च किया जा सकता है। यह बम लंबी दूरी से शत्रु के एयरफ़ील्ड को निशाना बना सकता है, जिससे पायलट को सतह‑से‑हवा मिसाइल (SAM) के खतरे से बचाया जाता है।
महत्वपूर्ण जानकारी
– डिज़ाइन एवं विकास: यह सिस्टम भारतीय डिफ़ेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइज़ेशन (ड्रदो) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है।
– स्वदेशी सामग्री: 60 % सामग्री भारतीय है, जबकि प्रारंभिक मापन इकाई, लंबा इम्पैक्ट डिले फ्यूज़ और ट्विन स्टोर कैरियर जैसे उप‑सिस्टम भी स्वदेशी हैं।
– गाइडेंस: उपग्रह नेविगेशन के साथ सटीक लक्ष्यीकरण संभव है।
– वॉरहेड: उच्च विस्फोटक, पूर्व‑विभाजित गहरी प्रवेश वॉरहेड से रनवे, टैक्सी ट्रैक, बंकर, हेंगर, रडार, ईंधन भंडार और संचार सुविधाओं को नष्ट किया जा सकता है।
– लागत एवं लाभ: ग्लाइड बम का उपयोग टैक्टिकल मिसाइलों की तुलना में सस्ता है क्योंकि यह एयरोडायनामिक ग्लाइड पर निर्भर करता है और लॉन्च विमान की गतिज ऊर्जा का उपयोग करता है।
संबंधित बयान
रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा, “यह सौदा भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमताओं को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा और देश की रक्षा तत्परता को मजबूत करेगा।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि स्वदेशीकरण से भारत को अपनी रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भरता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
प्रभाव या संदर्भ
सैट‑एसएएडब्ल्यू के परिचय से भारतीय वायुसेना को शत्रु के एयरफ़ील्ड पर बिना जोखिम के गहरे हमले करने का मौका मिलेगा। यह विशेष रूप से उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण है जहाँ सतह‑से‑हवा मिसाइलों की कवरेज व्यापक है। इसके अलावा, यह हथियार टैक्टिकल मिसाइलों की तुलना में कम लागत और कम रखरखाव की आवश्यकता के कारण वायुसेना के लिए आर्थिक रूप से भी लाभकारी है।
स्वदेशीकरण के इस स्तर से भारत की रक्षा उद्योग को और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी, जिससे भविष्य में अन्य उन्नत हथियार प्रणालियों के विकास में भी गति बढ़ेगी।
निष्कर्ष
भारत डाइनेमिक्स लिमिटेड के साथ 811 करोड़ का यह अनुबंध भारतीय वायुसेना की रणनीतिक क्षमताओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ देश की रक्षा उद्योग में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण कदम है। सैट‑एसएएडब्ल्यू के माध्यम से वायुसेना को शत्रु के एयरफ़ील्ड पर लंबी दूरी से सटीक हमले करने की क्षमता मिलेगी, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती मिलेगी।
