तिरुप्पुर के वस्त्र निर्यात ने पार किया ₹46,000 करोड़ का आंकड़ा 2025‑26 में
परिचय
तिरुप्पुर, जो भारत के वस्त्र उद्योग का प्रमुख केंद्र है, ने पिछले वित्तीय वर्ष में वस्त्र निर्यात में ₹46,000 करोड़ की सीमा को पार कर लिया है। यह उपलब्धि तिरुप्पुर निर्यातक संघ (TEA) के वार्षिक बैठक में घोषित की गई और इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई।
मुख्य घटनाक्रम
वार्षिक बैठक तिरुप्पुर में आयोजित हुई, जहाँ संघ के अध्यक्ष के.एम. सुब्रमणियन ने बताया कि तिरुप्पुर निर्यात को और बढ़ाने के लिए “कृत्रिम रेशा के वस्त्र, तकनीकी वस्त्र और प्रदर्शन वियर” के उत्पादन और निर्यात पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों के तहत उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाना और तकनीकी नवाचार अपनाना आवश्यक है ताकि तिरुप्पुर वैश्विक बाज़ार में प्रतिस्पर्धी बना रहे।
संघ के उप सचिव कुमार दुरैस्वामी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय खरीदार 2030 तक भारत से अपनी आपूर्ति को दोगुना करने की योजना बना रहे हैं। इस दिशा में तिरुप्पुर निर्यातकों को अपनी उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता में सुधार करना होगा।
सचिव एन. थिरुक्कुमारन ने बताया कि इस वर्ष तिरुप्पुर के निटवियर निर्यात में 2.49 % की वृद्धि हुई, जबकि भारत के कुल निटवियर निर्यात में तिरुप्पुर का योगदान 54.74 % है। समर्थ योजना के तहत लगभग 19,050 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिससे स्थानीय कार्यबल की दक्षता बढ़ी है।
अध्यक्ष सुब्रमणियन ने संघ की नई वेबसाइट का शुभारंभ किया और 24 निर्यातकों को उत्कृष्टता के लिए पुरस्कार से नवाज़ा।
महत्वपूर्ण जानकारी
– निर्यात का कुल मूल्य: ₹46,000 करोड़ (2025‑26)
– निटवियर में वृद्धि: 2.49 %
– भारत के निटवियर निर्यात में तिरुप्पुर का हिस्सा: 54.74 %
– समर्थ योजना के तहत प्रशिक्षित: 19,050
– भविष्य की योजना: कृत्रिम रेशा, तकनीकी वस्त्र, प्रदर्शन वियर पर ध्यान
– अंतरराष्ट्रीय खरीदारों का लक्ष्य: 2030 तक आपूर्ति दोगुनी
संबंधित बयान
के.एम. सुब्रमणियन ने कहा, “तकनीकी उन्नति और मुक्त व्यापार समझौतों के लाभ से तिरुप्पुर को वैश्विक स्तर पर और भी प्रतिस्पर्धी बनना चाहिए।”
कुमार दुरैस्वामी ने जोड़ा, “अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में हमारी मांग को दोगुना करने के लिए निर्यातकों को उत्पादन क्षमता बढ़ानी होगी।”
एन. थिरुक्कुमारन ने बताया, “समर्थ योजना के तहत प्रशिक्षित कार्यबल से निटवियर निर्यात में स्थिर वृद्धि हो रही है।”
प्रभाव या संदर्भ
तिरुप्पुर के वस्त्र निर्यात में यह उछाल न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देता है, बल्कि भारत की वैश्विक वस्त्र निर्यात में स्थिति को भी सुदृढ़ करता है। 46,000 करोड़ का आंकड़ा दिखाता है कि तिरुप्पुर निर्यातक संघ की रणनीतियाँ सफल हो रही हैं।
कृत्रिम रेशा और तकनीकी वस्त्र पर ध्यान देने से तिरुप्पुर को नयी बाज़ारों में प्रवेश करने का अवसर मिलेगा। 2030 तक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों द्वारा आपूर्ति दोगुनी करने का लक्ष्य, यदि सही तरीके से लागू किया जाए, तो तिरुप्पुर को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित कर सकता है।
समर्थ योजना के तहत प्रशिक्षित 19,050 लोगों की उपलब्धि यह दर्शाती है कि कौशल विकास निर्यात वृद्धि का आधार है।
निष्कर्ष
तिरुप्पुर के वस्त्र निर्यात में ₹46,000 करोड़ की उपलब्धि, निटवियर में 2.49 % की वृद्धि और समर्थ योजना के तहत बड़े पैमाने पर प्रशिक्षण, यह स्पष्ट करते हैं कि तिरुप्पुर निर्यातक संघ ने सही दिशा में कदम बढ़ाए हैं। भविष्य में, यदि संघ तकनीकी नवाचार, मुक्त व्यापार समझौतों और कौशल विकास पर निरंतर जोर देता रहे, तो तिरुप्पुर भारतीय वस्त्र निर्यात में और भी ऊँचाइयाँ छू सकता है।
