राजीव चंद्रशेखर की चुनावी दलील पर सवाल, साबरिनंदन ने दायर की एफ़िडेविट में 91.64 करोड़ रुपये के अघोषित सम्पत्ति का दावा
परिचय
कर्नाटक के एक प्रमुख भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर के 2026 के चुनावी एफ़िडेविट में 91.64 करोड़ रुपये के अघोषित सम्पत्ति और 200 करोड़ रुपये से अधिक के छिपे हुए ऋण का आरोप लगाते हुए, कांग्रेस के पूर्व विधायक केएस साबरिनंदन ने कर्नाटक उच्च न्यायालय में चुनावी याचिका दायर की है। इस याचिका में चंद्रशेखर के चुनावी परिणाम को शून्य घोषित करने की माँग भी शामिल है।
मुख्य घटनाक्रम
साबरिनंदन, जो कि कर्नाटक प्रांतीय कांग्रेस समिति के महासचिव हैं, ने अप्रैल 2026 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में नेमोम निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के टिकट पर राजीव चंद्रशेखर के खिलाफ चुनाव लड़ा। चुनाव में चंद्रशेखर ने 4,978 वोटों के बहुमत से जीत हासिल की, जबकि साबरिनंदन तीसरे स्थान पर रहे।
31 जुलाई को दायर की गई याचिका में, साबरिनंदन ने कहा कि चंद्रशेखर ने अपने चुनावी एफ़िडेविट में 91.64 करोड़ रुपये के दो बंगालोर स्थित सम्पत्ति का खुलासा नहीं किया। इसके अलावा, उन्होंने यह भी दावा किया कि चंद्रशेखर ने अपनी कंपनी के शेयरों का वास्तविक मूल्य कम करके बताया और इन्डस्ट्रियल फाइनेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (IFCI) लिमिटेड के प्रति 200 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण को छिपा रखा।
महत्वपूर्ण जानकारी
– अघोषित सम्पत्ति
– संपत्ति आईडी 68‑2‑408: साइट क्षेत्र 38,206 वर्ग फुट, बिल्ड‑अप क्षेत्र 49,000 वर्ग फुट। भूमि का मूल्य 59.98 करोड़ रुपये और भवन का 17.15 करोड़ रुपये, कुल 77.13 करोड़ रुपये।
– संपत्ति आईडी 68‑2‑445: साइट क्षेत्र 9,240 वर्ग फुट, बिल्ड‑अप क्षेत्र 19,620 वर्ग फुट। भूमि का मूल्य 14.50 करोड़ रुपये।
– दोनों सम्पत्तियों का कुल मूल्य 91.64 करोड़ रुपये।
- छिपा हुआ ऋण
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इन्डस्ट्रियल फाइनेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के प्रति चंद्रशेखर का ऋण, ब्याज सहित, 200 करोड़ रुपये से अधिक।
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चंद्रशेखर का एफ़िडेविट
- घोषित अचल सम्पत्ति का मूल्य 15.07 करोड़ रुपये।
- कुल देनदारियाँ 107.39 करोड़ रुपये।
संबंधित बयान
साबरिनंदन ने याचिका में कहा कि नेमोम निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता मुख्यतः मध्यम वर्ग और कृषि परिवारों से बने हैं। वे यह तर्क देते हैं कि चुनावी खुलासे मतदाताओं को उम्मीदवारों की आर्थिक स्थिति और व्यापारिक हितों का आकलन करने में मदद करते हैं। चंद्रशेखर द्वारा अघोषित सम्पत्ति और छिपे हुए ऋण के कारण मतदाताओं को सूचित निर्णय लेने का अवसर नहीं मिला।
साबरिनंदन ने यह भी दावा किया कि चंद्रशेखर के एफ़िडेविट में यह छिपाव “अनुचित प्रभाव” और “भ्रष्ट प्रथाओं” के अंतर्गत आता है, जो प्रतिनिधित्व ऑफ पिपल एक्ट के धारा 123(2) के तहत दण्डनीय है। इसके अलावा, वे यह भी कहते हैं कि एफ़िडेविट के नियम 33A, नियम 4A और फॉर्म 26 का उल्लंघन हुआ है।
प्रभाव या संदर्भ
यदि उच्च न्यायालय चंद्रशेखर के चुनाव को शून्य घोषित करता है, तो कर्नाटक में भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका बनेगा। चंद्रशेखर कर्नाटक के भाजपा के राज्य अध्यक्ष हैं और उनकी जीत ने पार्टी को राज्य में मजबूत स्थिति दिलाई थी।
इसके अतिरिक्त, यह मामला चुनावी पारदर्शिता और उम्मीदवारों के वित्तीय खुलासे के महत्व को उजागर करता है। भारतीय संविधान के तहत मतदाता को उम्मीदवार के वित्तीय पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी मिलने का अधिकार है, जिससे वे सूचित चुनाव कर सकें।
निष्कर्ष
कर्नाटक उच्च न्यायालय में दायर की गई याचिका ने राजीव चंद्रशेखर के चुनावी एफ़िडेविट में 91.64 करोड़ रुपये के अघोषित सम्पत्ति और 200 करोड़ रुपये से अधिक के छिपे हुए ऋण के आरोप लगाए हैं। यदि न्यायालय इन दावों को मान्य करता है, तो चंद्रशेखर की जीत को शून्य घोषित किया जा सकता है, जिससे कर्नाटक की राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव संभव है। इस घटना से चुनावी खुलासे के महत्व और मतदाताओं के सूचित निर्णय लेने के अधिकार पर पुनः प्रकाश डाला गया है।
