मंत्रियों ने मांगी बदनामी मुकदमे का खारिज, उच्च न्यायालय में दायर प्रतिवाद

राज्यपाल के समक्ष: डेमोक्रेटिक मोबिलाइजेशन पार्टी का मुकदमा खारिज कराने के लिए मंत्रियों की अपील

परिचय
मद्रास उच्च न्यायालय में डेमोक्रेटिक मोबिलाइजेशन पार्टी (डेमोक्रेटिक मोबिलाइजेशन पार्टी) द्वारा दायर ₹1 करोड़ के बदनामी मुकदमे को खारिज कराने हेतु सार्वजनिक कार्य एवं खेल विकास मंत्री अदा अव अर्जुन और ऊर्जा संसाधन एवं कानून मंत्री सी.टी.आर. नर्मल कुमार ने अदालत से आग्रह किया है। यह मुकदमा र. वीरामणि, गेम ग्रेनाइट्स के खिलाफ चल रहे बाल यौन शोषण मामले से संबंधित है। दोनों मंत्रियों ने अपने वरिष्ठ वकीलों के माध्यम से प्रतिवाद दाखिल किया है, जिसमें उन्होंने मुकदमे की वैधता पर सवाल उठाया है।

मुख्य घटनाक्रम
1. मुकदमे की पृष्ठभूमि – डेमोक्रेटिक मोबिलाइजेशन पार्टी ने अदा अव अर्जुन और सी.टी.आर. नर्मल कुमार पर बाल यौन शोषण मामले से जुड़ी झूठी और बदनामीपूर्ण टिप्पणियाँ करने का आरोप लगाया है।
2. मंत्रियों की प्रतिवाद – दोनों ने वरिष्ठ वकील विजय नारायण और सतीश परसारन के सहारे प्रतिवाद दाखिल किया। प्रतिवाद में उन्होंने दावा किया कि उनके द्वारा की गई टिप्पणियाँ आधिकारिक कर्तव्यों के तहत थीं और बदनामी का कोई आधार नहीं है।
3. सिविल प्रक्रिया संहिता का उल्लेख – प्रतिवाद में यह तर्क दिया गया कि सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 80 के तहत पहले नोटिस देने या उच्च न्यायालय से अनुमोदन लेने की अनिवार्य शर्तें पूरी नहीं हुई हैं, अतः मुकदमा अवैध है।
4. अदालत की सुनवाई – यह मामला बुधवार, 30 सितंबर 2026 को न्यायाधीश के. गोविंदराजन थिलकवाड़ी के समक्ष सुना जाने वाला है।

प्रमुख बिंदु
– अधिकारिता और आधिकारिक भूमिका – दोनों मंत्रियों ने यह स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियाँ सार्वजनिक पद पर रहते हुए की गई थीं, अतः उन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं बल्कि आधिकारिक रूप से माना जाना चाहिए।
– नोटिस और अनुमोदन की कमी – डेमोक्रेटिक मोबिलाइजेशन पार्टी ने न तो नोटिस दिया, न ही सीपीसी की धारा 80(2) के तहत उच्च न्यायालय से अनुमोदन प्राप्त किया।
– मुकदमे की वैधता पर सवाल – प्रतिवाद में यह तर्क दिया गया कि यदि नोटिस या अनुमोदन नहीं मिला, तो मुकदमा स्वयं ही अमान्य है।
– उदाहरणात्मक लागत – दोनों मंत्रियों ने अदालत से अनुरोध किया है कि यदि मुकदमा खारिज किया जाता है तो डेमोक्रेटिक मोबिलाइजेशन पार्टी को उदाहरणात्मक लागत वसूली जाए।

मंत्रियों के बयान
– सी.टी.आर. नर्मल कुमार ने कहा, “मेरी टिप्पणियाँ सार्वजनिक हित के विषय पर थीं, और यदि डेमोक्रेटिक मोबिलाइजेशन पार्टी ने नोटिस दिया होता, तो मैं अपनी स्थिति स्पष्ट कर पाता। अब वे मुकदमे के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से मेरा सामना कर रहे हैं, जो अनुचित है।”
– अदा अव अर्जुन ने भी इसी तरह का तर्क प्रस्तुत किया, “मेरे द्वारा की गई कोई भी टिप्पणी आधिकारिक कर्तव्यों के अंतर्गत थी। यदि डेमोक्रेटिक मोबिलाइजेशन पार्टी ने पहले नोटिस दिया होता, तो मैं अपने दावों को स्पष्ट कर पाता। अब वे मुकदमे के जरिए मेरे व्यक्तिगत जीवन पर हमला कर रहे हैं।”

न्यायालय की स्थिति
मद्रास उच्च न्यायालय ने अभी तक कोई निर्णय नहीं दिया है। प्रतिवाद के आधार पर, न्यायालय को यह तय करना है कि क्या सिविल प्रक्रिया संहिता के नियमों का पालन न करने के कारण मुकदमा अवैध है। यदि अदालत पाती है कि नोटिस या अनुमोदन की शर्तें पूरी नहीं हुई हैं, तो मुकदमा खारिज किया जा सकता है।

प्रभाव और संदर्भ
यह मामला न केवल व्यक्तिगत बदनामी के दावों से जुड़ा है, बल्कि यह सार्वजनिक पद पर बैठे अधिकारियों द्वारा की गई टिप्पणियों की वैधता पर भी प्रकाश डालता है। यदि अदालत डेमोक्रेटिक मोबिलाइजेशन पार्टी के पक्ष में निर्णय देती है, तो यह सार्वजनिक अधिकारियों के लिए एक मिसाल बन सकती है कि वे अपनी आधिकारिक टिप्पणियों के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराए जा सकते। दूसरी ओर, यदि अदालत मुकदमे को स्वीकार करती है, तो यह सार्वजनिक अधिकारियों के लिए एक चेतावनी हो सकती है कि वे अपनी टिप्पणियों के लिए सख्त कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करें।

निष्कर्ष
अदा अव अर्जुन और सी.टी.आर. नर्मल कुमार द्वारा दायर प्रतिवाद सिविल प्रक्रिया संहिता के नियमों पर आधारित है और यह दिखाता है कि सार्वजनिक अधिकारियों को अपनी आधिकारिक टिप्पणियों के लिए व्यक्तिगत रूप से मुकदमे का सामना नहीं करना पड़ेगा, यदि वे उचित कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हैं। 30 सितंबर 2026 को होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि क्या डेमोक्रेटिक मोबिलाइजेशन पार्टी का मुकदमा वैध है या नहीं, और क्या सार्वजनिक अधिकारियों को अपनी आधिकारिक भूमिका में की गई टिप्पणियों के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

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