Bigger role for Rahul Gandhi, united front on ‘vote chori’ issue: How INDIA bloc’s September 30 meet differed from June 8

शीर्षक
राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन ने 30 सितंबर को एकजुट होकर ‘वोट चोरी’ पर कड़ा रुख अपनाया, और 2–8 अक्टूबर को ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्चों की घोषणा की

परिचय
30 सितंबर को आयोजित INDIA गठबंधन की बैठक में विपक्ष ने ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाई। इस बैठक में मुख्य मांगें थीं – चुनाव आयुक्त गीअनेश कुमार का इस्तीफा, भविष्य के चुनावों में मतपत्र का प्रयोग और चुनावी दुराचार के मामलों को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष शीघ्रता से लाया जाए। इसके साथ ही, 2–8 अक्टूबर तक सभी जिलों में ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्चों का आयोजन करने का निर्णय लिया गया।

मुख्य घटनाक्रम
– एकजुट रुख: इस बार सभी प्रमुख विपक्षी दलों ने ‘वोट चोरी’ पर एकसमान बयान दिया और चुनावी प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताओं को उजागर किया।
– चुनाव आयुक्त पर मांग: गीअनेश कुमार को इस्तीफा देने के लिए कहा गया और चुनाव आयोग के कार्यों पर सवाल उठाए गए।
– भविष्य के चुनावों के लिए मांग: चुनावों में मतपत्र के प्रयोग की वकालत की गई और चुनावी दुराचार के मामलों को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष शीघ्रता से लाने की अपील की गई।
– ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च: 2–8 अक्टूबर तक सभी जिलों में मार्चों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें युवाओं और गैर‑सरकारी संगठनों को भी शामिल किया जाएगा।

महत्वपूर्ण जानकारी
– बैठक का अंतर: 8 जून की बैठक में कांग्रेस पर आलोचना, गठबंधन के कार्यकलाप पर आत्म‑विश्लेषण और समन्वय समिति की स्थापना पर चर्चा हुई। वहीं 30 सितंबर की बैठक में मुख्य मांग गीअनेश कुमार का इस्तीफा थी।
– उपस्थिति: 23 दलों ने 8 जून की बैठक में हिस्सा लिया, जबकि द्रविड़ मुन्नेत्रा काज़गम (DMK) ने कांग्रेस के तमिलनाडु से बाहर होने के बाद बैठक को बायकोट किया। 30 सितंबर को DMK और AAP ने बैठक से अनुपस्थित रहे, और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव के नामांकन के कारण अनुपस्थित रहे।
– कांग्रेस का कदम: कांग्रेस के प्रमुख मल्लिकार्जुन खार्ज़ ने घोषणा की कि ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्च सभी जिलों में 2–8 अक्टूबर तक आयोजित किए जाएंगे और जिला राजपत्र कार्यालय के सामने प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।

संबंधित बयान
– ममता बनर्जी का समर्थन: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राहुल गांधी को विपक्षी गठबंधन का प्रमुख चेहरे के रूप में समर्थन दिया और कहा कि यदि पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष प्रधानमंत्री बनें तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
– BJP की आलोचना: BJP ने कहा कि INDIA गठबंधन टूट रहा है और इसके नेताओं ने राहुल गांधी के नेतृत्व को अस्वीकार कर दिया है, खासकर जब अखिलेश यादव और अन्य नेता बैठक से अनुपस्थित रहे।

प्रभाव या संदर्भ
– लोकतंत्र पर सवाल: ‘वोट चोरी’ पर एकजुट रुख ने चुनावी प्रक्रियाओं पर जनता का विश्वास कम करने की संभावना बढ़ा दी है।
– सुप्रीम कोर्ट का दबाव: चुनावी दुराचार के मामलों को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लाने की मांग से न्यायालय पर दबाव बढ़ सकता है।
– भविष्य के चुनाव: मतपत्र के प्रयोग की मांग से भविष्य के चुनावों में पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर चर्चा फिर से शुरू हो सकती है।
– राजनीतिक गतिशीलता: राहुल गांधी के नेतृत्व को मान्यता मिलने से विपक्षी गठबंधन की आंतरिक गतिशीलता में बदलाव आ सकता है, जबकि BJP का कथन गठबंधन के भीतर असहमति को उजागर करता है।

निष्कर्ष
30 सितंबर को आयोजित INDIA गठबंधन की बैठक ने विपक्षी दलों के बीच एकजुट रुख को दर्शाया, जिसमें चुनावी प्रक्रियाओं में अनियमितताओं पर कड़ा रुख और चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग प्रमुख थी। ‘लोकतंत्र बचाओ’ मार्चों की घोषणा ने आगामी चुनावी वर्ष में राजनीतिक परिदृश्य को और भी जटिल बना दिया है। ममता बनर्जी का राहुल गांधी के प्रति समर्थन और BJP का गठबंधन पर सवाल उठाना इस राजनीतिक बहस को और भी तीव्र बना रहा है। आगामी दिनों में इन मांगों पर सरकार और न्यायालय की प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलेंगी, और यह स्पष्ट होगा कि भारत का लोकतांत्रिक तंत्र इस चुनौतियों का सामना कैसे करेगा।

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