Airlines seek ATF, airport charge relief as West Asia conflict hits costs

विमानन संघ ने सरकार से एटीएफ एवं हवाई अड्डा शुल्क में राहत की माँग की

परिचय
भारत के प्रमुख एयरलाइन संघ, फेडरेशन ऑफ़ इंडियन एयरलाइंस (FIA), ने हाल ही में नागरिक उड्डयन मंत्रालय को लिखा, जिसमें पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण बढ़े हुए ईंधन और परिचालन लागत पर त्वरित राहत की माँग की गई। यह पत्र आगामी त्योहारों के यात्रा मौसम से पहले आया है, जब एयरलाइनें अपनी सेवाएँ बढ़ाने की योजना बना रही थीं।

मुख्य घटनाक्रम
FIA ने बताया कि अवियेशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) अब एयरलाइन के परिचालन खर्च का 55‑60 % हिस्सा बन चुका है, जबकि पहले यह 30‑40 % के आसपास था। यह वृद्धि मुख्यतः ब्रेंट क्रूड के $72 से $118 प्रति बैरल बढ़ने और एटीएफ की कीमत में $87.24 से $260.24 के बीच उछाल के कारण हुई। इसके अलावा, एटीएफ की कीमत लगभग $175.33 प्रति बैरल पर है।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते हवाई मार्गों पर प्रतिबंध लगने से विमान लंबी दूरी तय करने के लिए मजबूर हुए, जिससे ईंधन खपत और क्रू लागत दोनों बढ़े। साथ ही, भारतीय रुपये की कमजोरी ने डॉलर‑संबंधित खर्चों, जैसे कि विमान पट्टा, रख‑रखाव और बीमा, पर भी दबाव डाला।

महत्वपूर्ण जानकारी
1. एटीएफ मूल्य निर्धारण
– FIA ने सरकार से आग्रह किया कि अंतरराष्ट्रीय मानक पर आधारित एटीएफ मूल्य निर्धारण को लागत‑जोड़ (cost‑plus) मॉडल में बदला जाए।
– ब्रेंट क्रूड और MOPAG के बीच का क्रैक डिफरेंशियल, जो पहले $11‑$18 प्रति बैरल था, अब $100 से अधिक हो गया है और वर्तमान में $60‑$61 प्रति बैरल के आसपास है।

  1. एक्साइस ड्यूटी और वैट
  2. एटीएफ पर 11 % की एड वैलेरम (मूल्य आधारित) एक्साइस ड्यूटी लगती है, जिससे ईंधन लागत बढ़ने पर कर का बोझ भी बढ़ता है।
  3. FIA ने प्रस्तावित किया कि इस ड्यूटी को प्रतिशत‑आधारित से स्थिर‑दर (fixed‑rate) में बदला जाए।
  4. दिल्ली और महाराष्ट्र में एटीएफ पर 7 % वैट दर को मध्य‑नवंबर तक जारी रखने की माँग की गई है।
  5. तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक और तेलंगाना में वैट दर को कम करने का भी अनुरोध किया गया है।

  6. हवाई अड्डा शुल्क

  7. घरेलू उड़ानों के लिए लैंडिंग और पार्किंग शुल्क में 25 % की छूट, जो अप्रैल में शुरू हुई थी, जुलाई में समाप्त हो गई।
  8. FIA ने यह छूट पश्चिम एशिया संकट के दौरान जारी रखने की माँग की है, जब तक कि एयरलाइन संचालन सामान्य स्तर पर नहीं लौटते।

संबंधित बयान
– 5 अक्टूबर को इंडीगो ने घोषणा की कि वह अगले दिन से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ईंधन शुल्क बढ़ाएगा।
– FIA के प्रमुख ने चेतावनी दी कि यदि सरकार त्वरित राहत नहीं देती, तो एयरलाइनें अपनी सेवाएँ घटा सकती हैं, जिससे यात्रियों को असुविधा होगी।

प्रभाव या संदर्भ
ईंधन लागत में इस तीव्र वृद्धि के कारण एयरलाइनें अपने परिचालन बजट पर भारी दबाव महसूस कर रही हैं। टिकट की कीमतें अक्सर अग्रिम में तय हो जाती हैं, जिससे लागत बढ़ने पर एयरलाइनें तुरंत किराया बढ़ा नहीं सकतीं। इससे लाभ मार्जिन, नकदी प्रवाह और नेटवर्क योजना पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

इसके अलावा, लंबी उड़ान मार्गों के कारण विमान का उपयोग कम हो रहा है, जिससे एयरलाइन के पूंजीगत खर्च पर भी असर पड़ रहा है। यदि सरकार आवश्यक राहत नहीं देती, तो एयरलाइनें अपनी उड़ान संख्या घटा सकती हैं, जिससे यात्रियों के लिए विकल्प कम हो जाएंगे।

निष्कर्ष
फेडरेशन ऑफ़ इंडियन एयरलाइंस ने सरकार से एटीएफ मूल्य निर्धारण, एक्साइस ड्यूटी, वैट और हवाई अड्डा शुल्क में त्वरित राहत की माँग की है। पश्चिम एशिया के संघर्ष से उत्पन्न बढ़ती ईंधन लागत और अन्य परिचालन चुनौतियों के बीच, यह कदम एयरलाइन उद्योग को स्थिर रखने और यात्रियों को बिना अनावश्यक किराया बढ़ोतरी के सेवा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक माना गया है। सरकार की प्रतिक्रिया पर उद्योग और यात्रियों दोनों का ध्यान रहेगा।

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