कज़ान मंच पर भारत‑रूस व्यापार को मिला नया मुकाम: 2030 तक $100 बिलियन का लक्ष्य

भारत‑रूस व्यापार में नई उछाल: 2030 तक $100 बिलियन का लक्ष्य

परिचय
भारत और रूस ने इस वर्ष के पहले छः महीनों में द्विपक्षीय व्यापार में 38 बिलियन डॉलर का लेन‑देन किया है। भारतीय राजदूत विनय कुमार ने कज़ान में आयोजित भारत‑रूस व्यापार मंच के दौरान यह सूचना दी कि दोनों देशों का व्यापार 2030 तक 100 बिलियन डॉलर तक पहुँचने के मार्ग पर है। यह आंकड़ा दोनों राष्ट्रों के बीच बढ़ते आर्थिक सहयोग की गवाही देता है।

मुख्य घटनाक्रम
कज़ान में आयोजित द्वितीय भारत‑रूस व्यापार मंच के दौरान विनय कुमार ने बताया कि भारत रूस से ऊर्जा और उर्वरक जैसी आवश्यक कच्ची वस्तुओं का आयात कर रहा है, वहीं दवाइयों का निर्यात कर रहा है। इसके अलावा, भारतीय कुशल कर्मियों के लिए रूस में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं। कज़ान क्षेत्र की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ने विदेशी श्रमिकों की मांग बढ़ा दी है, और पिछले दो वर्षों में भारतीय कार्यबल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। औसतन, विदेशी श्रमिकों के कोटे में लगभग 25 प्रतिशत भारतीयों को स्थान दिया जा रहा है।

महत्वपूर्ण जानकारी
– व्यापार का मूल्य: 1 जनवरी से 30 जून तक 38 बिलियन डॉलर।
– लक्ष्य: 2030 तक 100 बिलियन डॉलर।
– उत्पाद: भारत से ऊर्जा, उर्वरक का आयात; भारत से दवाइयों का निर्यात।
– श्रम: कज़ान क्षेत्र में भारतीय कार्यबल का हिस्सा 25 प्रतिशत।
– सहयोग के क्षेत्र: ऊर्जा, रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि, दवाइयाँ, शिक्षा, विज्ञान व प्रौद्योगिकी।
– संबंध की उम्र: 78 वर्ष।

संबंधित बयान
विनय कुमार ने कहा, “हमारा लक्ष्य 2030 तक 100 बिलियन डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को हासिल करना है। इस वर्ष के पहले छः महीनों में हमने पहले ही 38 बिलियन डॉलर का व्यापार कर लिया है, इसलिए हमें लगता है कि हम सही दिशा में अग्रसर हैं।” उन्होंने कज़ान क्षेत्र की तेज़ी से बढ़ती आर्थिक स्थिति को भी रेखांकित किया, “इस क्षेत्र की तेज़ी से वृद्धि और श्रम की आवश्यकता के कारण भारतीय कार्यबल में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।”

प्रभाव या संदर्भ
भारत‑रूस व्यापार के इस बढ़ते रुख से दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नया आयाम मिला है। ऊर्जा और उर्वरक के आयात के साथ-साथ दवाइयों के निर्यात से भारतीय उद्योगों को नई संभावनाएँ मिल रही हैं। कज़ान क्षेत्र में भारतीय कार्यबल की बढ़ती उपस्थिति से दोनों देशों के बीच श्रम प्रवाह को सुदृढ़ किया गया है, जो आर्थिक सहयोग के एक नए आयाम को दर्शाता है।

इसके अलावा, तातारस्तान सरकार ने शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए हैं। 78 वर्षों से चली आ रही कूटनीतिक संबंधों के आधार पर, दोनों राष्ट्र अब व्यापार, निवेश और वैज्ञानिक सहयोग को और गहरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

निष्कर्ष
कज़ान में आयोजित भारत‑रूस व्यापार मंच ने दोनों देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग के नए पथ को उजागर किया है। 38 बिलियन डॉलर के प्रारम्भिक आंकड़े और 2030 तक 100 बिलियन डॉलर के लक्ष्य के साथ, भारत‑रूस संबंधों का भविष्य उज्ज्वल दिख रहा है। ऊर्जा, रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, कृषि और दवाइयों के क्षेत्र में सहयोग के साथ-साथ श्रम प्रवाह और शिक्षा‑विज्ञान के क्षेत्र में भी प्रगति की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं। यह स्पष्ट है कि दोनों राष्ट्र मिलकर अपने आर्थिक और वैज्ञानिक क्षितिज को विस्तृत कर रहे हैं, जिससे भारत‑रूस साझेदारी को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया जा सकेगा।

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