मुख्य शीर्षक
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के “चलो यमुना” अभियान पर दिल्ली कांग्रेस की आलोचना: जल प्रदूषण से निपटने में असफलता
परिचय
शुक्रवार को दिल्ली प्रांतीय कांग्रेस समिति अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के “चलो यमुना” सफाई अभियान को मात्र प्रचार-प्रसार के रूप में खारिज कर दिया। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी सरकार ने पिछले डेढ़ वर्ष में यमुना नदी की पुनःजीवन के लिये ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
1. यमुना पर मृत मछलियों की समस्या
14 अक्टूबर से बुरारी, उत्तरी दिल्ली के किनारे हजारों मृत मछलियाँ पाई जा रही हैं। यादव ने इसे यमुना के जल प्रदूषण और घुलनशील ऑक्सीजन के गंभीर कमी का प्रमाण बताया।
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वित्तीय वचनबद्धताएँ बनाम वास्तविकता
दिल्ली सरकार ने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के प्रोजेक्ट की घोषणा की, जिसमें नजाफ़ग़ह क्षेत्र में 12 विकेंद्रीकृत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (DSTP), केशोपुर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उन्नयन और ट्रंक सीवर की पुनर्वास शामिल थे। परंतु यादव ने कहा कि इन परियोजनाओं की प्रगति जमीन पर न्यूनतम है। -
सफाई अभियान का सीमित दायरा
14 जून को 28 घाटों पर आयोजित नदीकाठ सफाई अभियान के दौरान प्लास्टिक, टूटे हुए मूर्तियों व धार्मिक दान को हटाया गया। यादव ने तर्क दिया कि यदि सीवेज को पहले उपचारित नहीं किया गया तो यह प्रयास केवल प्रतीकात्मक रहेगा। -
अनुपचारित सीवेज का निरंतर प्रवाह
उन्होंने बताया कि 22 प्रमुख ड्रेन यमुना में बिना उपचारित सीवेज छोड़ रहे हैं और सरकार ने इस प्रदूषण को रोकने के लिये प्रभावी कदम नहीं उठाए। -
हरित बजट और जल बोर्ड का निवेश
2026‑27 हरित बजट के तहत दिल्ली जल बोर्ड को 6,485 करोड़ रुपये सौंपे गये हैं, जो सीवेज उपचार, ड्रेन इंटरसेप्शन और नदीकाठ सुधार के लिये हैं। परंतु यादव का कहना है कि इन योजनाओं का ठोस परिणाम अभी तक नहीं मिला है।
महत्वपूर्ण जानकारी
– यमुना की स्थिति: 14 अक्टूबर से बुरारी के किनारे मृत मछलियाँ, ऑक्सीजन स्तर में गिरावट।
– प्रोजेक्ट्स: 12 DSTP, केशोपुर STP उन्नयन, ट्रंक सीवर पुनर्वास।
– फंडिंग: 1,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएँ, 6,485 करोड़ रुपये का जल बोर्ड बजट।
– ड्रेन: 22 प्रमुख ड्रेन बिना उपचार के यमुना में सीवेज छोड़ रहे हैं।
संबंधित बयान
देवेंद्र यादव ने कहा:
“सफाई अभियान तभी प्रभावी होगा जब सीवेज का उपचार सुनिश्चित हो। अन्यथा यह केवल एक प्रतीकात्मक कार्य है।”
वे आगे जोड़ते हैं:
“बीजेपी सरकार ने यमुना के पुनःजीवन के लिये कई योजनाएँ घोषित की हैं, परंतु जमीन पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। हमें सरकार से वास्तविक कार्यवाही की अपेक्षा है।”
प्रभाव या संदर्भ
– पर्यावरणीय प्रभाव: यमुना की जल गुणवत्ता में गिरावट से स्थानीय जनजीवन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
– सार्वजनिक धारणा: “चलो यमुना” अभियान के प्रति जनता में संदेह बढ़ रहा है, क्योंकि यह केवल साफ-सफाई दिखाने के लिये आयोजित प्रतीत होता है।
– राजनीतिक परिदृश्य: कांग्रेस की यह आलोचना सरकार पर दबाव डाल सकती है, खासकर आगामी चुनावों के संदर्भ में।
निष्कर्ष
देवेंद्र यादव का तर्क है कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का “चलो यमुना” अभियान केवल प्रचार-प्रसार है। यमुना के प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिये सीवेज उपचार, ड्रेन इंटरसेप्शन और नदीकाठ सुधार पर ठोस कार्यवाही आवश्यक है। यदि सरकार इन योजनाओं को वास्तविकता में बदलती नहीं है, तो यह अभियान केवल प्रतीकात्मक रहेगा और यमुना के जल गुणवत्ता में सुधार नहीं होगा।
