एशियाई खेल 2026 में भारत ने कबड्डी, स्क्वैश और शूटरों से स्वर्ण जमीं पर कब्जा किया

एशियाई खेल 2026: भारतीय टीमों ने दिखाया दमदार प्रदर्शन

परिचय
2026 के एशियाई खेलों की प्रतियोगिताएँ अब तक भारतीय टीमों के लिए शानदार रही हैं। महिलाओं के कबड्डी और पुरुषों के कबड्डी दोनों ने लगातार चौथी बार स्वर्ण पदक जीतकर अपनी अविजित श्रृंखला को जारी रखा। साथ ही, स्क्वैश में भी जॉशना चिनप्पा, वेलवन सेंटिलकुमार, अनाहत सिंह और अभय सिंह ने देश के लिए तीन पदक की आशा जगाई। शूटर कमलजीत सिंह और सुरुचि सिंह ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम में स्वर्ण जीतकर भारत को एक और गौरवशाली उपलब्धि दिलाई।

कबड्डी में अविजित स्वर्ण
– महिला कबड्डी: 25 सितंबर को हुई फाइनल में भारत ने नेपाल को 48-24 से हराकर स्वर्ण पदक जीता। मैच के पहले आधे में ही 31-17 की लीड लेकर भारत ने अपनी श्रेष्ठता दिखायी।
– पुरुष कबड्डी: इसी दिन थाईलैंड को 66-28 से हराकर पुरुष टीम ने भी स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया। दोनों टीमों ने अपने-अपने मुकाबलों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अविजित रुख बनाए रखा।

स्क्वैश में भारत का उभरता सितारा
– मिश्रित डबल्स: जॉशना चिनप्पा और वेलवन सेंटिलकुमार ने फिलीपींस के डेविड पेलिनो और जेमिका अरिबाडो को चौथाई फाइनल में हराकर अर्ध फाइनल में पहुँचने की राह बनाई।
– एकल: अनाहत सिंह ने अपने साथी तान्वी खन्ना को हराकर एकल के अर्ध फाइनल में जगह बनाई, जबकि अभय सिंह भी एकल के क्वार्टर फाइनल में पहुँच चुके हैं।
– अर्ध फाइनल: अनाहत सिंह का सामना विश्व नंबर 6 सातोमी वतनाबे से हुआ, जिससे वह फाइनल में पहुँचने की उम्मीदों को बढ़ा रहे हैं।

स्क्वैश में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी 2028 के लॉस एंजेलिस ओलंपिक में सीधे पात्र होंगे, जहाँ स्क्वैश का प्रथम बार ओलंपिक में समावेश होगा।

मिश्रित टीम में शूटरों का गौरव
कमलजीत सिंह और सुरुचि सिंह ने 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम में स्वर्ण पदक जीतकर भारत को एक और ओलंपिक योग्य पदक दिलाया। उन्होंने क्वालीफिकेशन में 587 अंक के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया और फाइनल में भी बेहतरीन प्रदर्शन दिखाया।

पुरुष डबल्स में आश्चर्यजनक हार
सतविक्सैरज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी, जो पुरुष डबल्स के डिफेंडिंग चैंपियन थे, ने शुक्रवार को थाईलैंड के पक्कापोन टीएराटसकुल और पियराचाई सुकफुन को 12-21, 21-19, 21-14 से हराकर ओपनिंग राउंड में ही बाहर हो गए। यह एक घंटे आठ मिनट के मुकाबले में हुआ।

संबंधित बयान
कबड्डी टीम के कोच ने कहा, “हमारी टीम ने लगातार चौथी बार स्वर्ण जीतकर यह साबित किया कि हमारी तैयारी और रणनीति सही है।”
स्क्वैश के कोच ने आशा जताई, “जॉशना और वेलवन की जोड़ी ने बहुत अच्छा खेल दिखाया, और अनाहत सिंह का प्रदर्शन भी प्रशंसनीय है। हमें विश्वास है कि वे आगे भी अच्छा करेंगे।”

प्रभाव और संदर्भ
इन उपलब्धियों से भारत की एशियाई खेलों में स्थिति और मजबूत हुई है। कबड्डी में लगातार स्वर्ण पदक जीतने से यह स्पष्ट होता है कि यह खेल भारतीय खेलों में अपनी पहचान बना चुका है। स्क्वैश में चार पदक की आशा से खेल के युवा खिलाड़ी प्रेरित हो रहे हैं। शूटरों की जीत ने भारत को ओलंपिक के लिए पात्र बनाकर एक नई दिशा दिखाई है।

निष्कर्ष
2026 एशियाई खेलों में भारतीय टीमों ने अपनी काबिलियत और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया। कबड्डी में अविजित स्वर्ण, स्क्वैश में तीन पदक की आशा, और शूटरों की स्वर्ण जीत ने भारत को एशियाई खेलों में एक प्रमुख शक्ति के रूप में स्थापित किया है। आगे आने वाले मुकाबलों में भी ये टीमें अपनी उत्कृष्टता दिखाने के लिए तैयार हैं, और 2028 ओलंपिक के लिए पात्रता की राह को आसान बना रही हैं।

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