अंकोश पांगहल ने एशियाई खेलों में भारत को पहली मुक्केबाज़ी पदक दिलाया

भारत को एशियाई खेलों में पहली मुक्केबाज़ी पदक

परिचय
सप्ताहांत में नई दिल्ली में आयोजित एशियाई खेलों के मुक्केबाज़ी प्रतियोगिता में भारतीय मुक्केबाज़ अंकोश पांगहल ने 80 किलोग्राम श्रेणी के क्वार्टरफाइनल में ताजिकिस्तान के नेकृज़ सलिमोव को 5‑0 के सर्वसम्मति निर्णय से हराकर भारत को पहली मुक्केबाज़ी पदक दिलाया। यह जीत भारतीय मुक्केबाज़ी को एक नया अध्याय लिखने के लिए प्रेरित कर रही है।

मुख्य घटनाक्रम
अंकोश पांगहल, जो कि कॉमनवेल्थ खेलों के चैंपियन भी हैं, ने मुकाबले की शुरुआत ही आक्रामक शैली से की। पहले राउंड में उन्होंने दाहिनी किक और तेज़ 1‑2 संयोजन के साथ सलिमोव पर दबदबा बनाया, जिससे सभी पाँच जजों ने उन्हें 5‑0 का निर्णय दिया।
दूसरे राउंड में पांगहल ने अपनी गति और काउंटर-पंचिंग कौशल का प्रदर्शन करते हुए बाएँ हुक से सलिमोव को मात दी, और फिर से 5‑0 का निर्णय प्राप्त किया। इस दौरान सलिमोव को साफ़ प्रहार करने में कठिनाई हुई।
तीसरे राउंड में सलिमोव ने अधिक ऊर्जा के साथ मुकाबला किया और कुछ प्रहारों से 4‑1 का स्कोर प्राप्त किया, लेकिन पांगहल ने पहले से ही पर्याप्त अंतर बना लिया था। अंत में जजों ने 29‑28 और 30‑27 के स्कोर के साथ पांगहल को 5‑0 के सर्वसम्मति निर्णय से विजयी घोषित किया।

महत्वपूर्ण जानकारी
– मुकाबला 80 किलोग्राम पुरुष श्रेणी के क्वार्टरफाइनल में हुआ।
– पांगहल ने 5‑0 के सर्वसम्मति निर्णय से जीत हासिल की, जिससे उन्हें कम से कम कांस्य पदक की गारंटी मिलती है।
– सलिमोव ने मुकाबले में तीन राउंड में 4‑1 का स्कोर प्राप्त किया।

संबंधित बयान
पांगहल के कोच ने कहा, “अंकोश ने अपनी गति और संयोजन से मुकाबले पर पूरा नियंत्रण किया। यह जीत हमारे लिए गर्व का विषय है।”
सलिमोव ने मैच के बाद कहा, “मैंने पूरी कोशिश की, लेकिन पांगहल की गति और संयोजन से मैं तालमेल नहीं बिठा पाया।”

प्रभाव या संदर्भ
इस जीत से भारतीय मुक्केबाज़ी को एशियाई स्तर पर मान्यता मिली है। पांगहल का प्रदर्शन यह दर्शाता है कि भारतीय मुक्केबाज़ी के खिलाड़ी विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं। यह जीत आगामी अर्धफाइनल और फाइनल में भारतीय टीम के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

अन्य क़ुराश प्रतियोगिता में भारत की स्थिति
क़ुराश प्रतियोगिता में भारत को भी कुछ झटके लगे।
– पुरुष +90 किलोग्राम के क्वार्टरफाइनल में विशाल को थाईलैंड के कुनाथिप ये-ऑन से 5‑0 से बाहर कर दिया गया।
– महिला -57 किलोग्राम में संगीता बालहरा को फिलीपींस की चार्मेआ क्वेलिनो से 10‑0 से हार का सामना करना पड़ा।
– भर्ति को इरान की तहरीह अज़रपेवांड से 16वें राउंड में बाहर कर दिया गया।
– यश कुमार चौहान को ताजिकिस्तान के शाकरमामद मिरमामदोव से 10‑0 से पराजित किया गया।

निष्कर्ष
अंकोश पांगहल की दमदार जीत ने भारतीय मुक्केबाज़ी को एशियाई खेलों में एक नई पहचान दिलाई। 5‑0 के सर्वसम्मति निर्णय से यह स्पष्ट है कि पांगहल ने अपने विरोधी पर पूर्ण नियंत्रण रखा। यह जीत भारतीय मुक्केबाज़ी के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और आने वाले अर्धफाइनल व फाइनल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। क़ुराश प्रतियोगिता में कुछ पराजय के बावजूद, भारतीय टीम ने समग्र रूप से अच्छा प्रदर्शन किया और एशियाई खेलों में अपनी उपस्थिति को मजबूत किया।

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