असाइची‑नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारतीय स्क्वैश ने चांदी के पदक से गौरव बढ़ाया

असाइची‑नागोया एशियन गेम्स 2026: भारतीय स्क्वैश ने चांदी के साथ गौरव बढ़ाया

परिचय
आइची‑नागोया एशियन गेम्स 2026 के स्क्वैश टुर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ी अन्हत सिंह और अभय सिंह ने पुरुष व महिला सिंगल्स के फाइनल में भाग लेकर देश के लिए चांदी के पदक जीतने का गौरव हासिल किया। दोनों ही खिलाड़ियों ने अपने-अपने फाइनल में मलेशियाई प्रतिद्वंद्वियों के सामने हार का सामना किया, परंतु उनकी उपलब्धियाँ भारतीय स्क्वैश के इतिहास में एक नया पन्ना खोलती हैं।

मुख्य घटनाक्रम – महिला सिंगल्स
अन्हत सिंह, 18 वर्ष की आयु में विश्व रैंकिंग 17, ने फाइनल में मलेशियाई खिलाड़ी सिवासंगारी सब्रामणियम के सामने 0‑3 से हार का सामना किया। मैच के स्कोर 4‑11, 4‑11, 7‑11 रहे। सिवासंगारी, विश्व रैंकिंग 5 और 2022 एशियन गेम्स की चैंपियन, ने पहले दो गेम 11‑4 से जीत कर मैच पर नियंत्रण कर लिया। तीसरे गेम में अन्हत ने बेहतर प्रदर्शन किया परंतु 11‑7 से हार गई।

महिला सिंगल्स – महत्वपूर्ण आँकड़े
अन्हत सिंह ने एशियन गेम्स में पहले भारतीय महिला के रूप में सिंगल्स फाइनल तक पहुँच कर चांदी का पदक जीता। इससे पहले डिपिका पालीकल और जोशना चिनप्पा ने केवल कांस्य पदक ही जीते थे। अन्हत ने विश्व नंबर 6 सतोमी वतनाबे को हराकर फाइनल तक पहुँचने की राह बनाई।

पुरुष सिंगल्स – अभय सिंह का संघर्ष
28 वर्षीय अभय सिंह, विश्व रैंकिंग 26, ने भी मलेशियाई खिलाड़ी एन जी एइन याओ के सामने 0‑3 से हार का सामना किया। स्कोर 9‑11, 5‑11, 5‑11 रहे। अभय ने सेमी‑फाइनल में पाकिस्तान के मुहम्मद इरफान को 11‑3, 12‑10, 11‑6 से हराकर फाइनल में पहुँचने का गौरव प्राप्त किया। यह पहली बार है जब भारत ने पुरुष और महिला दोनों सिंगल्स फाइनल में भाग लिया।

पुरुष सिंगल्स – महत्वपूर्ण आँकड़े
अभय सिंह ने 2024 में अर्जुन पुरस्कार प्राप्त किया और अप्रैल 2026 में PSA रैंकिंग में करियर‑हाई 22 पर पहुँच चुके थे। अब वह विश्व रैंकिंग 26 पर हैं। उनके फाइनल में हार के कारण उन्हें 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक के लिए पुरुष सिंगल्स की क्वालिफिकेशन स्लॉट से वंचित रहना पड़ा।

संबंधित बयान
भारतीय स्क्वैश फ़ेडरेशन के प्रवक्ता ने कहा, “अन्हत और अभय दोनों ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से भारतीय स्क्वैश को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। उनके प्रदर्शन से आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा मिलेगी।”

प्रभाव और संदर्भ
अन्हत और अभय की चांदी की जीत भारतीय स्क्वैश के लिए एक मील का पत्थर है। पहले किसी भारतीय खिलाड़ी ने एशियन गेम्स में सिंगल्स फाइनल में पहुँच कर पदक नहीं जीता था। अब भारत ने पुरुष व महिला दोनों फाइनल में हिस्सा लेकर स्क्वैश को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मान्यता दिलाई है।

अंतिम निष्कर्ष
असाइची‑नागोया एशियन गेम्स 2026 में अन्हत सिंह और अभय सिंह की चांदी की जीत भारतीय स्क्वैश के लिए गर्व का कारण है। यद्यपि दोनों ही खिलाड़ियों ने फाइनल में हार का सामना किया, परंतु उनकी उपलब्धियाँ भविष्य के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी। ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन स्लॉट से वंचित रहने के बावजूद, भारतीय स्क्वैश ने अपनी पहचान बना ली है और आने वाले वर्षों में और भी ऊँचाइयाँ छूने की उम्मीद है।

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