एफ‑35 के हिस्से चीन तक पहुँचने पर कांग्रेसमैन ने किया जाँच का आह्वान
परिचय
अमेरिकी रक्षा विभाग (रक्षा विभाग) के खिलाफ़ भारतीय‑उत्पत्ति के कांग्रेसमैन राजा कृष्णामूर्ती ने एक तात्कालिक जाँच का आदेश दिया है, जब अमेरिकी उन्नत जासूस‑विमान एफ‑35 के कुछ घटक ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका भेजे जाने के दौरान हांगकांग पहुँच कर चीनी सरकार के हाथ में चले गए। इस घटना ने रक्षा उद्योग की आपूर्ति श्रृंखला और संवेदनशील हथियारों के ट्रैकिंग पर नए सवाल उठाए हैं।
मुख्य घटनाक्रम
– ऑस्ट्रेलिया से भेजे गए एफ‑35 के हिस्से, जिनमें हथियार‑बॉक्स का दरवाज़ा और जेट का कैनोपी शामिल थे, को दक्षिण कोरिया में रोक कर हांगकांग भेजा गया।
– हांगकांग से इन हिस्सों को चीन की सरकार ने कब्ज़े में कर लिया और उन्हें वापस नहीं किया गया।
– कृष्णामूर्ती ने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ से विस्तृत रिपोर्ट मांगी, जिसमें शिपमेंट की पूरी श्रृंखला—ऑस्ट्रेलिया से प्रस्थान, दक्षिण कोरिया में रोक, हांगकांग में विचलन—का विवरण शामिल हो।
महत्वपूर्ण जानकारी
1. सुरक्षा जोखिम – एफ‑35 के हिस्सों को चीन में पहुँचने से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) को अमेरिकी स्टेल्थ तकनीक का पुनर्निर्माण करने का अवसर मिल सकता है, जिससे अमेरिकी सैन्य कर्मियों और राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा उत्पन्न हो सकता है।
2. आपूर्ति श्रृंखला की कमियाँ – 2023 के सार्वजनिक जवाबदेही कार्यालय (GAO) के रिपोर्ट में बताया गया कि पाँच वर्षों में 10 लाख से अधिक एफ‑35 स्पेयर पार्ट्स, जिनका कुल मूल्य 85 मिलियन डॉलर था, गायब हो गए। रक्षा विभाग ने केवल 2 % के मामलों की जाँच की।
3. सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवाल – कृष्णामूर्ती ने पूछा कि संवेदनशील हिस्सों को क्यों वाणिज्यिक शिपिंग नेटवर्क के माध्यम से भेजा गया, न कि सैन्य परिवहन से।
संबंधित बयान
कृष्णामूर्ती ने रक्षा सचिव से पूछा:
– शिपमेंट का संपूर्ण कैस्टडी चेन क्या था?
– दक्षिण कोरिया में रोक क्यों हुआ और किसने अनुमति दी?
– क्या यह किसी जानबूझकर की गई कार्रवाई, लापरवाही, अपर्याप्त सुरक्षा या किसी प्रकार के धोखाधड़ी के कारण हुआ?
– क्या पेंटागन ने हिस्सों को पुनः प्राप्त करने के लिए कोई कदम उठाया है?
– क्या पेंटागन को अन्य समान घटनाओं के बारे में जानकारी है, जहाँ एफ‑35 या अन्य संवेदनशील घटक चीन, हांगकांग या अमेरिकी प्रतिद्वंद्वियों के नियंत्रित क्षेत्रों में पहुँच गए?
रक्षा सचिव से जवाब देने की समय सीमा 12 अक्टूबर तय की गई है।
प्रभाव और संदर्भ
– राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर – यदि चीनी पक्ष एफ‑35 की तकनीक का विश्लेषण कर सके तो अमेरिकी वायु सेना की स्टेल्थ क्षमताओं पर गंभीर असर पड़ सकता है।
– रक्षा उद्योग पर विश्वास – इस घटना ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता और नियंत्रण की कमी को उजागर किया है, जिससे अमेरिकी रक्षा उद्योग की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठे हैं।
– अंतरराष्ट्रीय नीतियाँ – पेंटागन को यह पुनर्विचार करना होगा कि कब और कैसे संवेदनशील घटकों को वाणिज्यिक शिपिंग के माध्यम से भेजा जाए।
अंतिम निष्कर्ष
राजा कृष्णामूर्ती का आह्वान रक्षा विभाग को अपनी आपूर्ति श्रृंखला पर कड़ी निगरानी और सुरक्षा मानकों को सुदृढ़ करने के लिए प्रेरित करता है। एफ‑35 के हिस्सों का चीन में पहुँच जाना एक गंभीर सुरक्षा उल्लंघन है, जो अमेरिकी सैन्य तकनीक के रहस्यों को खतरे में डालता है। पेंटागन को न केवल इस घटना की पूरी जाँच करनी है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नीतियों और प्रक्रियाओं में सुधार भी करना होगा। इस जाँच के परिणाम से यह स्पष्ट होगा कि अमेरिकी रक्षा उद्योग अपनी संवेदनशील तकनीकों की सुरक्षा कितनी प्रभावी ढंग से सुनिश्चित कर सकता है।
