मुख्य शीर्षक
उत्तर प्रदेश में होटल‑रेस्टोरेंट को अब खाना पकाने में प्रयुक्त तेल और अन्य सामग्रियों का खुलासा अनिवार्य
परिचय
उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा और दवा प्रशासन (FSDA) ने आज नए नियम जारी किए हैं, जिनके तहत राज्य के सभी होटल, रेस्तरां, ढाबे और अन्य खाद्य प्रतिष्ठान को ग्राहकों को खाना पकाने में प्रयुक्त तेल के प्रकार के बारे में सूचित करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही, मेनू में प्रयुक्त तेल, रंग, मिठास और एलर्जेनिक सामग्री की जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी।
मुख्य घटनाक्रम
नए निर्देशों के अंतर्गत, सभी खाद्य प्रतिष्ठानों को निम्नलिखित कार्यवाही करनी होगी:
- तेल का खुलासा – ग्राहक को यह बताना कि किस प्रकार का खाना पकाने का तेल इस्तेमाल किया गया है।
- मेनू कार्ड – केंद्रीय खाद्य लाइसेंस धारक या 10 से अधिक होटलों के संचालन वाले प्रतिष्ठानों को विस्तृत मेनू कार्ड रखना अनिवार्य है, जिसमें शाकाहारी व मांसाहारी व्यंजन, रंग, मिठास और एलर्जेनिक घटकों की जानकारी हो।
- क्यूआर कोड – खाद्य सुरक्षा कनेक्ट (Food Safety Connect) का क्यूआर कोड प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना, ताकि ग्राहक शिकायतें दर्ज कर सकें। शिकायतों के रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखे जाने हैं।
- रंग व रासायनिक निषेध – खाद्य को आकर्षक बनाने के लिए प्रतिबंधित रंगों का प्रयोग व रासायनिक तथा तरल नाइट्रोजन का उपयोग निषिद्ध है।
महत्वपूर्ण जानकारी
– फ्रिज एवं फ्रीज़र का तापमान – ठंडा भोजन 5 °C से कम, जमे हुए भोजन -18 °C पर रखा जाना अनिवार्य है। पका हुआ भोजन 74 °C पर कम से कम चार मिनट तक पुनः गरम करके परोसना होगा।
– किचन के लिये मानक – पर्याप्त स्थान, वेंटिलेशन, रोशनी और जालीदार दरवाज़े व खिड़कियाँ, ताकि कीटों का प्रवेश रोका जा सके।
– कर्मचारी स्वास्थ्य – रसोइयों को बालों के जाल, दस्ताने व एप्रन पहनना अनिवार्य है। संक्रामक या त्वचा संबंधी रोग वाले कर्मचारियों को खाद्य तैयारी व परोसने के कार्य से दूर रखा जाना चाहिए।
संबंधित बयान
FSDA के प्रवक्ता ने कहा, “ये नियम खाद्य सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। ग्राहकों को पारदर्शिता के साथ सही जानकारी देने से उनके स्वास्थ्य की रक्षा होगी।”
रसोई प्रबंधक, एक प्रमुख होटल श्रृंखला, ने बताया, “क्यूआर कोड के माध्यम से शिकायत प्रणाली से हमें ग्राहकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने में मदद मिलेगी।”
प्रभाव या संदर्भ
इन नियमों के लागू होने से ग्राहकों को भोजन की गुणवत्ता व सुरक्षा के प्रति अधिक विश्वास मिलेगा। साथ ही, प्रतिष्ठानों को अपनी प्रक्रियाओं में सुधार करना होगा, जिससे समग्र खाद्य सुरक्षा मानक बढ़ेंगे। छोटे-छोटे ढाबों पर भी इन नियमों का पालन अनिवार्य होने से वे अपनी सेवाओं में सुधार कर सकेंगे।
निष्कर्ष
उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा और दवा प्रशासन द्वारा जारी किए गए नए नियमों का उद्देश्य है ग्राहकों को खाद्य सामग्री के बारे में स्पष्ट जानकारी देना और खाद्य प्रतिष्ठानों की स्वच्छता व स्वास्थ्य मानकों को ऊँचा उठाना। इन निर्देशों के पालन से न केवल ग्राहकों का स्वास्थ्य सुरक्षित रहेगा, बल्कि पूरे राज्य में खाद्य उद्योग की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
