भारत‑स्विट्ज़रलैंड ने नया आर्थिक गठबंधन किया, 10 लाख नौकरियाँ और 100 अरब डॉलर निवेश का वादा

भारत‑स्विट्ज़रलैंड ने किया नया आर्थिक व्‍यापार पथ, 10 लाख नौकरियों और 100 अरब डॉलर के निवेश का वादा

परिचय
नई दिल्ली – भारत और स्विट्ज़रलैंड ने सोमवार को एक व्यापक प्रवासन‑और‑गतिशीलता साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे भारतीय निर्यात के लिए स्विस बाज़ार का पहुँच बढ़ेगा और दोनों देशों के बीच नाभिकीय ऊर्जा व रक्षा क्षेत्र में सहयोग को गहरा किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस नए गठबंधन को 15 वर्षों में भारत में दस लाख सीधे नौकरियाँ पैदा करने और 100 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश को आकर्षित करने का लक्ष्य बताया।

मुख्य घटनाक्रम
गुय पर्मेलिन, स्विस संघीय गणराज्य के राष्ट्रपति, ने अपनी तीन‑दिन की भारत यात्रा के आरम्भ में इस ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह उनकी पहली राज्य यात्रा थी और इस वर्ष की दूसरी। पर्मेलिन ने फरवरी में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में भाग लेने के बाद भारत का दौरा किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस समझौते से स्विट्ज़रलैंड में भारतीय उत्पादों के लिए बाज़ार की पहुँच बढ़ेगी और दोनों देशों के बीच निवेश को और अधिक सुगम बनाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि यह समझौता नाभिकीय ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में सहयोग को और भी गहरा करेगा।

महत्वपूर्ण जानकारी
1. 10 लाख नौकरियाँ – प्रधानमंत्री ने बताया कि इस साझेदारी के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में दस लाख सीधे नौकरियाँ सृजित होंगी।
2. 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश – यह निवेश लक्ष्य ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) के तहत निर्धारित किया गया है, जिसे अक्टूबर में लागू किया गया।
3. बाज़ार पहुँच का विस्तार – स्विट्ज़रलैंड में भारतीय कृषि, दवा, वस्त्र और इंजीनियरिंग उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा।
4. नवीन निवेश क्षेत्र – बायोटेक, लाइफ साइंसेज, बैंकिंग, बीमा, खाद्य प्रसंस्करण और सतत विकास जैसे क्षेत्रों में स्विस निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
5. इन्फ्रास्ट्रक्चर सहयोग – वाराणसी के रोपवे, नोएडा के ज्वार हवाई अड्डे, और पहाड़ी क्षेत्रों में रेलवे व टनल प्रोजेक्ट्स को उदाहरण के तौर पर उद्धृत किया गया।
6. परिवहन व इन्फ्रास्ट्रक्चर समझौता – स्विस इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को भारत में बड़े पैमाने पर निवेश के लिए आमंत्रित किया गया है।

संबंधित बयान / जानकारी
प्रधानमंत्री ने विज्ञान व प्रौद्योगिकी सहयोग को दोनों देशों के बीच एक मजबूत स्तम्भ बताया। स्वास्थ्य, स्वच्छ ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में संयुक्त शोध परियोजनाएँ जल्द ही शुरू की जाएँगी।

उन्होंने प्रवासन व गतिशीलता साझेदारी समझौते तथा युवा पेशेवर समझौते के माध्यम से स्विट्ज़रलैंड में भारतीय छात्रों, शोधकर्ताओं और युवाओं के लिए नई संभावनाएँ खोलने का भी उल्लेख किया।

सुरक्षा व रक्षा क्षेत्र में, दोनों पक्षों ने सैन्य आदान‑प्रदान व रक्षा उत्पादन में नई संभावनाओं की पहचान की। नाभिकीय ऊर्जा में भी सहयोग को गहरा करने पर सहमति बनी।

प्रभाव या संदर्भ
स्विट्ज़रलैंड यूरोप में भारत का प्रमुख आर्थिक साझेदार है, जहाँ 330 से अधिक स्विस कंपनियाँ भारतीय इंजीनियरिंग, सेवाएँ, प्रिसीजन उपकरण, रसायन और दवा उद्योगों में सक्रिय हैं। इसके विपरीत, भारतीय कंपनियाँ स्विट्ज़रलैंड में सूचना प्रौद्योगिकी, दवा और मशीनरी के क्षेत्र में उपस्थित हैं।

TEPA के लागू होने से भारत और स्विट्ज़रलैंड के बीच व्यापार व निवेश संबंधों को और सुदृढ़ किया गया है। यह समझौता दोनों देशों के लिए नयी आर्थिक संभावनाएँ खोलता है, विशेषकर उभरते हुए टेक्नोलॉजी व हरित ऊर्जा क्षेत्रों में।

निष्कर्ष
भारत‑स्विट्ज़रलैंड के इस ऐतिहासिक समझौते से न केवल दस लाख नौकरियों का सृजन और 100 अरब डॉलर के निवेश की दिशा स्पष्ट हुई है, बल्कि दोनों राष्ट्रों के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी, रक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों में सहयोग के नए आयाम भी खुल गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस गठबंधन को “नवाचार, बुनियादी ढाँचे और उन्नत प्रौद्योगिकी” के आधार पर एक मजबूत साझेदारी के रूप में वर्णित किया।

इस साझेदारी के तहत, भारत और स्विट्ज़रलैंड दोनों लोकतंत्र, कानून का शासन और संवाद के मूल्यों को साझा करते हुए वैश्विक शांति व स्थिरता के लिए मिलकर कार्य करेंगे। आगामी भारत‑इईएफटीए समृद्धि शिखर सम्मेलन और अगले वर्ष के जेनिवा एआई समिट में इस साझेदारी को और भी सुदृढ़ करने के अवसर मिलेंगे।

इस प्रकार, भारत‑स्विट्ज़रलैंड की नई आर्थिक व्‍यापार पथ से दोनों देशों के लिए उज्ज्वल भविष्य की शुरुआत हुई है, जो रोजगार, निवेश और नवाचार के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ छूने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

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