मिसौरी पर मुकदमा: लिंcoln विश्वविद्यालय को मिली फंडिंग में असमानता का खुलासा

मिसौरी राज्य पर लिंcoln विश्वविद्यालय के फंडिंग में कमी के आरोप में मुकदमा

परिचय
चिकागो की रिपोर्ट के अनुसार, लिंcoln विश्वविद्यालय के सात वर्तमान और पूर्व छात्रों ने मिसौरी राज्य पर मुकदमा दायर किया है। इस मुकदमे में दावा किया गया है कि राज्य ने दशकों से इस ऐतिहासिक काले विश्वविद्यालय को पर्याप्त वित्तीय सहायता नहीं दी, जिससे छात्रों को शैक्षणिक और आर्थिक क्षति हुई है। यह मामला अमेरिकी संविधान और संघीय नागरिक अधिकार कानून के उल्लंघन का आरोप लगाता है।

मुकदमे का विवरण
मुकदमा अमेरिकी वेस्टर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ मिसौरी के फेडरल कोर्ट में दायर किया गया। इसमें टाइटल VI के तहत मुआवजा और भविष्य में लिंcoln विश्वविद्यालय के संघीय भूमि-ग्रांट फंडिंग के पूर्ण मिलान के लिए एक आदेश की मांग की गई है। अनुरोध में परिसर की मरम्मत, फॅकल्टी भर्ती, छात्र सेवाएँ, आर्थिक सहायता और कृषि शोध कार्यक्रम शामिल हैं।

फंडिंग में अंतर
लिंcoln विश्वविद्यालय, जो जॉर्ज फिन्सन सिटी में स्थित है, मिसौरी का पहला ऐतिहासिक काला भूमि-ग्रांट संस्थान है। विश्वविद्यालय ऑफ मिसौरी, दूसरी ओर, मुख्यतः श्वेत छात्रों के लिए है। मुकदमे के अनुसार, 1987 से 2020 के बीच अधिकांश वित्तीय वर्षों में मिसौरी ने लिंcoln को विश्वविद्यालय ऑफ मिसौरी से कम प्रति छात्र राशि आवंटित की। सितंबर 2023 में यूएस कृषि और शिक्षा सचिवों द्वारा जारी एक पत्र में यह गणना की गई कि मिसौरी ने इस अवधि में लिंcoln को 361.6 मिलियन डॉलर की कमी की।

मुकदमे के अनुसार, 2000 से 2007 तक राज्य ने लिंcoln के संघीय भूमि-ग्रांट आवंटन के लिए कोई मिलान निधि नहीं दी, और बाद के वर्षों में केवल आवश्यक हिस्से का ही मिलान किया। लिंcoln ने 2000 से 2016 के बीच लगभग 43.5 मिलियन डॉलर अपने सामान्य परिचालन बजट से इस कमी को पूरा करने के लिए उपयोग किए, और 2016 से 2018 के बीच लगभग 8 मिलियन डॉलर संघीय फंड वापस कर दिए क्योंकि वह मिलान आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर पाया। उसी अवधि में विश्वविद्यालय ऑफ मिसौरी को पूर्ण मिलान मिला।

विश्वविद्यालय की स्थिति
विश्वविद्यालय ऑफ मिसौरी ने मुकदमे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि यह अभी भी चल रहे मुकदमे के कारण है। लिंcoln विश्वविद्यालय ने भी तत्काल टिप्पणी के अनुरोध पर प्रतिक्रिया नहीं दी। मुकदमे में राज्य के प्रमुख अधिकारियों, जैसे कि गवर्नर माइकल केहो, उच्च शिक्षा आयुक्त बेनेट बॉग्स और विश्वविद्यालय ऑफ मिसौरी सिस्टम के अध्यक्ष मुं चोई को भी प्रतिवादी के रूप में नामित किया गया है।

पक्षकारों के बयान
मुकदमे में शामिल छात्रों और पूर्व छात्रों ने लिंcoln की स्थिति पर गहरा आघात व्यक्त किया। एक छात्रा ने कहा कि भोजन सेवाओं के बंद होने के कारण वह वजन घटा रही है। दूसरी छात्रा ने बताया कि एक छात्रवृत्ति जो उसके शिक्षा खर्च को कवर करने वाली थी, वापस ले ली गई, जिसके कारण उसे ऋण लेना पड़ा और सप्ताह में 30 घंटे तक काम करना पड़ा। मुकदमे में यह भी उल्लेख है कि लिंcoln लगातार “बैंड-एड्स” लगाता है, जबकि वास्तविक क्षति को पूरी तरह से ठीक करने के लिए संसाधन नहीं हैं।

प्रभाव और संदर्भ
मिसौरी के पूर्व विभाजनकारी उच्च शिक्षा प्रणाली के तहत विश्वविद्यालय ऑफ मिसौरी श्वेत छात्रों की सेवा करता था, जबकि लिंcoln काले छात्रों के लिए स्थापित किया गया था। इस ऐतिहासिक असमानता को जारी रखने के लिए फंडिंग में अंतर को मुकदमे में एक प्रमुख कारण बताया गया है। यदि अदालत लिंcoln के पक्ष में निर्णय देती है, तो यह मिसौरी के शैक्षणिक वित्तीय नीतियों में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत हो सकता है और अन्य अल्पसंख्यक विश्वविद्यालयों के लिए भी एक मिसाल कायम कर सकता है।

निष्कर्ष
मिसौरी राज्य पर लिंcoln विश्वविद्यालय के फंडिंग में कमी के आरोप से यह स्पष्ट होता है कि शैक्षणिक संस्थानों में वित्तीय असमानता अभी भी एक गंभीर मुद्दा है। मुकदमे के परिणाम पर नज़र रखनी होगी, क्योंकि यह न केवल लिंcoln के छात्रों के लिए बल्कि पूरे अमेरिकी उच्च शिक्षा प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भेज सकता है।

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