अनियमित मासिक धर्म और घटती यौन इच्छा: तनाव व हार्मोन असंतुलन का असर

शीर्षक
अनियमित मासिक धर्म और घटती यौन इच्छा: क्या तनाव या हार्मोन असंतुलन का कारण हो सकता है?

परिचय
कई महिलाओं को अनियमित मासिक धर्म और यौन इच्छा में कमी अलग‑अलग समस्याएँ लगती हैं, परंतु अक्सर इन दोनों के पीछे एक ही कारण छिपा होता है। हार्मोनल बदलाव, लगातार तनाव, नींद की कमी, कुछ रोग और दवाएँ दोनों ही लक्षणों को प्रभावित कर सकती हैं। क्लाउडनाइन ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स, लुधियाना की वरिष्ठ सलाहकार डॉ सूनिता गयाल ने इस विषय पर प्रकाश डाला है।

मुख्य घटनाक्रम
डॉ गयाल के अनुसार, “कभी‑कभी अनियमित चक्र या अस्थायी यौन इच्छा में बदलाव स्वास्थ्य समस्या का संकेत नहीं होते, परंतु जब दोनों लक्षण एक साथ या महीनों तक बने रहते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।”
जर्नल ऑफ सेक्स रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन ने बताया कि ओवेरियन हार्मोन ओएस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन, टेस्टोस्टेरोन, थाइरॉइड हार्मोन और प्रोलैक्टिन सभी मासिक धर्म और यौन स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं। ओएस्ट्रोजन के स्तर में उतार‑चढ़ाव मासिक धर्म के साथ-साथ यौन इच्छा, योनि की नमी और समग्र सुख को भी प्रभावित करता है।

महत्वपूर्ण जानकारी
1. हार्मोनल असंतुलन
– पीएमओएस (पहले PCOS के नाम से जाना जाता था) में अनियमित या अनुपस्थित चक्र सामान्य है, और कई महिलाओं में यौन इच्छा में भी बदलाव देखा जाता है।
– थाइरॉइड विकार, चाहे वह हाइपोथायरॉइड हो या हाइपरथायरॉइड, मासिक धर्म को प्रभावित करते हैं और ऊर्जा, मूड और यौन रुचि में कमी ला सकते हैं।
– प्रोलैक्टिन का उच्च स्तर प्रजनन हार्मोन को बाधित करता है, जिससे चक्र अनियमित हो जाता है और यौन इच्छा घट सकती है।
– पेरिमेनोपॉज़ के दौरान हार्मोन स्तर में बड़े बदलाव से मासिक धर्म अनियमित हो सकता है और ओएस्ट्रोजन की कमी से योनि शुष्कता व यौन इच्छा में कमी आ सकती है।
– कम ऊर्जा उपलब्धता (गंभीर वजन घटाव, अत्यधिक व्यायाम, प्रतिबंधित आहार) भी हार्मोनल सिग्नलिंग को बाधित कर सकती है।

  1. तनाव का प्रभाव
  2. न्यूरोसाइंस एवं बायोबिहेवियरल रिव्यूज़ में प्रकाशित समीक्षा बताती है कि लगातार तनाव मस्तिष्क और प्रजनन तंत्र के बीच संचार को बदल देता है, जिससे ओव्यूलेशन में देरी या रुकावट आती है।
  3. तनाव यौन इच्छा को भी कम कर सकता है, क्योंकि लगातार चिंता, मानसिक थकान और नींद की कमी से शारीरिक और भावनात्मक ऊर्जा घटती है।

  4. दवाओं का योगदान

  5. कुछ एंटीडिप्रेसेंट, हार्मोनल गर्भनिरोधक और अन्य दवाएँ मासिक धर्म चक्र और यौन कार्य दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। यदि किसी नई दवा के शुरू होने के बाद लक्षण प्रकट हों, तो डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है।

संबंधित बयान
डॉ गयाल ने कहा, “यदि अनियमित चक्र या यौन इच्छा में कमी लगातार बनी रहे, तो यह किसी अंतर्निहित रोग का संकेत हो सकता है। इसलिए, डॉक्टर से मिलकर उचित परीक्षण कराना चाहिए।”

प्रभाव
अनियमित मासिक धर्म और यौन इच्छा में कमी केवल शारीरिक समस्या नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, रिश्तों और समग्र जीवन गुणवत्ता पर भी असर डालती है। लगातार तनाव, नींद की कमी और हार्मोनल असंतुलन से न केवल प्रजनन क्षमता प्रभावित होती है, बल्कि मूड, ऊर्जा स्तर और आत्म‑सम्मान पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।

निष्कर्ष
अनियमित मासिक धर्म और घटती यौन इच्छा कभी-कभी एक ही कारण—तनाव या हार्मोन असंतुलन—से जुड़ी हो सकती हैं, परंतु पीएमओएस, थाइरॉइड विकार, प्रोलैक्टिन स्तर में वृद्धि और पेरिमेनोपॉज़ जैसी स्थितियाँ भी इन दोनों लक्षणों को प्रभावित कर सकती हैं। यदि दोनों लक्षण लगातार बने रहें या अन्य स्वास्थ्य परिवर्तनों के साथ हों, तो डॉक्टर से जाँच कराना आवश्यक है।

क्या करें?
1. रोज़ाना रिकॉर्ड रखें – चक्र, नींद, तनाव, वजन, व्यायाम और दवाओं का नोट रखें।
2. नियमित नींद, संतुलित आहार और मध्यम व्यायाम – हार्मोनल संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
3. तनाव प्रबंधन – योग, ध्यान या मनोवैज्ञानिक सहायता से तनाव कम करें।
4. दवा के प्रभाव पर चर्चा – नई दवा शुरू करने के बाद लक्षण बदलने पर डॉक्टर से बात करें।
5. डॉक्टर से मिलें – यदि चक्र अनियमित, लंबा या छोटा हो, या यौन इच्छा में लगातार कमी हो, तो विशेषज्ञ से जाँच कराएँ।

इस प्रकार, अनियमित मासिक धर्म और यौन इच्छा के बीच संबंध को समझना और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना महिलाओं के स्वास्थ्य और जीवन‑संतुलन के लिए अनिवार्य है।

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