बेंगलुरु विश्वविद्यालय में 1.4 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी: अध्यक्ष का रूप धारण कर अकाउंटेंट को फँसाया

बेंगलुरु में साइबर धोखाधड़ी: विश्वविद्यालय के अध्यक्ष का रूप धारण कर 1.4 करोड़ रुपये का जाल बिछाया

परिचय
बेंगलुरु के एक प्रमुख विश्वविद्यालय के अकाउंटेंट को 1.4 करोड़ रुपये की बड़ी धनराशि के धोखाधड़ी का शिकार बनाकर गिरफ्तार कर लिया गया है। अपराधियों ने विश्वविद्यालय के अध्यक्ष के नाम से संपर्क करके अकाउंटेंट को पैसे ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित किया। इस जाल में चार संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है और साइबर कमांड ने इस मामले की जांच के दौरान विदेशी आईपी पते के उपयोग का खुलासा किया है।

घटनाक्रम
अकाउंटेंट, जिनका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है, को विश्वविद्यालय के अध्यक्ष के रूप में प्रस्तुत एक फ़ोन कॉल आया। कॉल के दौरान, अपराधियों ने दावा किया कि विश्वविद्यालय को एक विदेशी शोध परियोजना के लिए तात्कालिक धनराशि की आवश्यकता है। उन्होंने अकाउंटेंट से 1.4 करोड़ रुपये के ट्रांसफर का अनुरोध किया। अकाउंटेंट ने, विश्वास के साथ, राशि को विश्वविद्यालय के खातों में स्थानांतरित कर दिया।

ट्रांसफर के बाद, साइबर कमांड ने यह पाया कि लेनदेन विदेशी आईपी पते से शुरू हुआ था, जो कि बेंगलुरु के अंदर से नहीं था। इसके अलावा, ट्रांसफर के लिए उपयोग किए गए खातों पर संदिग्ध गतिविधि पाई गई।

प्रमुख तथ्य
– राशि: 1.4 करोड़ रुपये
– स्थान: बेंगलुरु, कर्नाटक
– संदिग्ध: चार व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है
– उपयोग की गई तकनीक: विदेशी आईपी पते से ट्रांसफर, नकली विश्वविद्यालय अध्यक्ष का रूप
– जांचकर्ता: साइबर कमांड, कर्नाटक पुलिस

संबंधित बयान
साइबर कमांड के प्रमुख, डॉ. राकेश शर्मा ने कहा, “हमने इस मामले में विदेशी आईपी पते के माध्यम से ट्रांसफर की पुष्टि की है। यह स्पष्ट है कि अपराधियों ने विश्वविद्यालय के अध्यक्ष के रूप में धोखा देकर अकाउंटेंट को फँसाया। चारों संदिग्धों को तुरंत हिरासत में ले लिया गया है और आगे की जांच चल रही है।”

विश्वविद्यालय के अध्यक्ष, डॉ. सुनील कुमार, ने भी इस घटना पर अपनी आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा, “हमारे विश्वविद्यालय के नाम का इस तरह दुरुपयोग करना अत्यंत अस्वीकार्य है। हम इस मामले की पूरी तरह से जांच कर रहे हैं और संबंधित अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहे हैं।”

प्रभाव और संदर्भ
इस प्रकार की साइबर धोखाधड़ी से न केवल विश्वविद्यालय के वित्तीय संसाधन प्रभावित होते हैं, बल्कि अकादमिक प्रतिष्ठा पर भी असर पड़ता है। बेंगलुरु की कई शैक्षणिक संस्थाएँ इसी तरह के साइबर हमलों का सामना कर रही हैं, जिससे शिक्षा क्षेत्र में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।

अकाउंटेंट की नौकरी पर भी इस घटना का असर पड़ा है। उन्होंने बताया कि उन्हें इस धोखाधड़ी के बाद मानसिक तनाव और आर्थिक कठिनाइयाँ झेलनी पड़ीं। विश्वविद्यालय ने उन्हें अस्थायी रूप से अवकाश पर रखने का निर्णय लिया है और उन्हें मनोवैज्ञानिक सहायता भी प्रदान की जा रही है।

निष्कर्ष
बेंगलुरु के विश्वविद्यालय में हुई इस 1.4 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी ने शिक्षा क्षेत्र में साइबर सुरक्षा के महत्व को फिर से उजागर किया है। विदेशी आईपी पते के उपयोग से स्पष्ट होता है कि अपराधी वैश्विक स्तर पर कार्य कर रहे हैं। चारों संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया गया है और साइबर कमांड आगे की जांच जारी रखे हुए है। इस घटना से यह सीख मिलती है कि किसी भी वित्तीय लेनदेन से पहले पहचान की पुष्टि करना अत्यंत आवश्यक है, विशेषकर जब यह किसी प्रतिष्ठित संस्था से जुड़ी हो।

टिप्पणी छोड़ें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Scroll to Top