भारत राष्ट्र समिटि ने केंद्रीय चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की, आलोचना बढ़ी

भारत राष्ट्र समिटि ने केंद्रीय चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की

परिचय
बिरादर के प्रमुख नेता ने केंद्रीय चुनाव आयुक्त ग्यानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए यह स्पष्ट किया कि उनके द्वारा लिए गए निर्णय विवादास्पद रहे हैं और बड़े पैमाने पर मतों के हटाने की घटनाएँ सामने आई हैं। पूर्व सांसद बी विनोद कुमार ने भी चुनाव आयोग के कार्यों पर कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह संस्था अब अपनी स्वतंत्रता और विश्वसनीयता से वंचित हो गई है।

मुख्य घटनाक्रम
हैदराबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बी विनोद कुमार ने यह दावा किया कि भारत के चुनाव आयोग ने बड़िया और पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए चुनावों में मतों को अनुचित रूप से हटाया है। उन्होंने कहा कि “चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है, जिसे यह तय नहीं करना चाहिए कि कौन जीतता है और कौन हारता है।”

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी पर भी उन्होंने आरोप लगाया कि वे संविधान के प्रति सम्मान नहीं रखते और अपने पिता राजीव गांधी द्वारा गढ़े गए ‘एंटी‑डिफेक्शन लॉ’ को लागू नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा, उन्होंने टेलेनाडु में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR)’ प्रक्रिया पर भी चिंता जताई, जहाँ बूथ‑लेवल अधिकारियों की कमी के कारण मतपत्रों में गड़बड़ी हो रही है।

महत्वपूर्ण जानकारी
1. चुनाव आयोग के नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव – विनोद कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव से चुनाव आयोग के प्रमुख की नियुक्ति के लिए मूल रूप से संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश के समावेश वाली समिति के स्थान पर एक कैबिनेट मंत्री को शामिल कर दिया गया है।

  1. मतों के हटाने के दावे – उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग द्वारा बड़िया और पश्चिम बंगाल में चुनावों के दौरान बड़े पैमाने पर मतों को हटाया गया, जिससे चुनाव के परिणाम प्रभावित हुए।

  2. सुप्रीम कोर्ट की भूमिका – यदि चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते हैं, तो विनोद कुमार का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले पर स्वयंस्फूर्त रूप से कार्यवाही करनी चाहिए और राष्ट्रपति के समक्ष एक रिपोर्ट पेश करनी चाहिए।

  3. राहुल गांधी पर आरोप – उन्होंने राहुल गांधी पर ‘डबल स्टैंडर्ड’ का आरोप लगाते हुए कहा कि वे एंटी‑डिफेक्शन लॉ को लागू नहीं कर रहे हैं और टेलेनाडु में कांग्रेस के उम्मीदवार दानम नागेन्द्र को लोका सभा के लिए नामांकित करना ‘अत्यंत विचित्र’ है।

संबंधित बयान
भारत राष्ट्र समिटि के सामान्य सचिव सोमा भारत कुमार और कानूनी सेल के प्रतिनिधि लालिता रेड्डी ने भी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लिया। उन्होंने विनोद कुमार के साथ मिलकर चुनाव आयोग के कार्यों पर सवाल उठाए और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए कड़ी मांग जताई।

प्रभाव या संदर्भ
इस मांग के बाद चुनाव आयोग के कार्यों पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। यदि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर संदेह कायम रहता है, तो यह लोकतंत्र के मूल स्तंभों पर प्रश्नचिन्ह लगाता है। विशेषकर बड़िया और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनावी परिणामों पर मतभेदों के कारण सामाजिक तनाव बढ़ने की संभावना है।

निष्कर्ष
भारत राष्ट्र समिटि की इस मांग से यह स्पष्ट होता है कि चुनाव आयोग के कार्यों पर सवाल उठाने के लिए राजनीतिक दलों को भी तैयार रहना चाहिए। यदि चुनाव आयोग के प्रमुख ग्यानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट को इस मुद्दे पर हस्तक्षेप करना अनिवार्य हो सकता है। चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और स्वतंत्रता को सुनिश्चित करना न केवल राजनीतिक दलों के लिए, बल्कि समस्त भारतीय लोकतंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है।

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