शिवमोग्गा में वकीलों का दूसरा चरण विरोध: सर्किट बेंच की मांग पर फिर से जुटे

शिवमोग्गा में सर्किट बेंच के लिए फिर से जुटे वकील

परिचय
शिवमोग्गा के जिला वकीलों ने 12 अक्टूबर से शुरू होने वाले दूसरे चरण के विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। यह आंदोलन केंद्रीय कर्नाटक में न्यायिक पहुँच को बेहतर बनाने के उद्देश्य से उच्च न्यायालय की सर्किट बेंच की मांग पर आधारित है। जिला वकील संघ के अध्यक्ष रघुवेन्द्र ने इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए 49 संगठनों के समर्थन का आश्वासन दिया है।

मुख्य घटनाक्रम
शिवमोग्गा प्रेस ट्रस्ट के परिसर में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में रघुवेन्द्र ने बताया कि पहले के विरोध के बाद एक तीन‑जज समिति गठित की गई थी, जो मंगलूर में सर्किट बेंच की स्थापना की संभावना पर विचार कर रही है। उन्होंने इस समिति को अस्थायी समाधान के रूप में खारिज करते हुए कहा कि यह केंद्रीय कर्नाटक की मांगों को पूरा नहीं करती। रघुवेन्द्र का कहना है कि शिवमोग्गा को मंगलूर के साथ मिलाकर बेंच स्थापित करने का प्रस्ताव अनुचित है और इससे स्थानीय लोगों को न्याय तक पहुँच में असुविधा होगी।

महत्वपूर्ण जानकारी
– दूसरा चरण: 12 अक्टूबर से शुरू होने वाला यह चरण वकील संघों द्वारा तालुका वकील भवनों के सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और सत्याग्रह के रूप में आयोजित किया जाएगा।
– समर्थन: 49 संगठनों, जिनमें राजनीतिक दल और अन्य संघ शामिल हैं, ने इस आंदोलन का समर्थन किया है।
– तीन‑जज समिति: समिति किसी भी समय शिवमोग्गा का दौरा कर सकती है। रघुवेन्द्र ने जनता से आग्रह किया कि जब समिति आए तो वे अपनी मांग स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करें।
– ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1950 में जिला स्तर पर आयोजित वकील सम्मेलन में पहली बार शिवमोग्गा में सर्किट बेंच की मांग उठाई गई थी।

संबंधित बयान
– रघुवेन्द्र: “शिवमोग्गा में मामलों की संख्या पर्याप्त है, इसलिए यहाँ सर्किट बेंच स्थापित करना आवश्यक है। इससे केंद्रीय कर्नाटक के लोगों को न्याय तक पहुँचने में सुविधा होगी।”
– बजप जिला अध्यक्ष एन. जगदीश: “हम इस मांग का समर्थन करते हैं और न्यायिक सुधार के लिए वकीलों के साथ खड़े हैं।”
– कांग्रेस जिला अध्यक्ष एच.सी. योगीश: “न्याय के लिए यह कदम आवश्यक है और हम इस आंदोलन का समर्थन करते हैं।”
– जेड(एस) जिला अध्यक्ष रामकृष्ण: “सभी वकीलों के साथ मिलकर हम न्यायिक सुधार के लिए प्रयासरत रहेंगे।”

प्रभाव और संदर्भ
शिवमोग्गा के वकील इस आंदोलन को तब तक जारी रखने का इरादा रखते हैं जब तक कि सर्किट बेंच की मांग पूरी नहीं होती। यदि सर्किट बेंच स्थापित नहीं हुई, तो केंद्रीय कर्नाटक के लोगों को उच्च न्यायालय के मामलों के लिए दूरस्थ शहरों की यात्रा करनी पड़ेगी, जिससे समय और आर्थिक बोझ बढ़ेगा। इसके अलावा, सर्किट बेंच से न्यायिक प्रक्रियाएँ तेज होंगी और न्यायिक प्रणाली में विश्वास बढ़ेगा।

अंतिम निष्कर्ष
शिवमोग्गा के वकीलों का यह दूसरा चरण का विरोध प्रदर्शन न्यायिक पहुँच को बेहतर बनाने के प्रति उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है। रघुवेन्द्र और उनके साथी वकील स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि सर्किट बेंच केवल मंगलूर में नहीं, बल्कि शिवमोग्गा में भी स्थापित होनी चाहिए। यदि सरकार और उच्च न्यायालय इस मांग को स्वीकार करते हैं, तो यह केंद्रीय कर्नाटक के लोगों के लिए न्यायिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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