अंटिम पांगहल ने कांस्य से चाँदी तक: एशियन गेम्स 2026 में 53 किलोवजन वर्ग में भारत को गौरव
परिचय
आइची‑नागोया एशियन गेम्स के 53 किलोवजन वर्ग की अंतिम प्रतियोगिता में भारतीय कुश्तीपटु अंटिम पांगहल ने जापान की मोए कियोउका से 1‑9 के अंतर से हार के बावजूद चाँदी का पदक जीतकर देश के लिए गौरव की लहर दौड़ा दी। यह जीत पांगहल के एशियाई मंच पर दूसरी पदक है, पहली बार 2022 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में कांस्य जीतने के बाद।
मुख्य घटनाक्रम
नागोया सिटी इने स्पोर्ट्स सेंटर में भरे हुए दर्शकों के सामने पांगहल ने शुरुआत में सतर्क रणनीति अपनाई। जापानी कुश्तीपटु मोए कियोउका ने प्रारम्भिक राउंड में ही 0‑2 का बढ़त बना लिया। पांगहल ने एक पावरफुल टैकडाउन के साथ 1‑0 का अंक प्राप्त किया, परंतु कियोउका ने तुरंत ही पांगहल को मैट से बाहर निकालते हुए 2‑0 का अंतर बना लिया।
समय कम होते हुए पांगहल ने आक्रामक खेल अपनाया, परंतु कियोउका ने पांगहल के पैरों पर हमला करते हुए 9‑1 का निर्णायक स्कोर बना लिया। पांगहल ने निर्णय पर अपील की, परंतु समीक्षा में असफल रही। इस प्रकार कियोउका ने स्वर्ण पदक सुरक्षित किया, जबकि पांगहल को चाँदी मिली।
महत्वपूर्ण जानकारी
– पांगहल का आयु 21 वर्ष है।
– 2022 के हांगझोऊ एशियन गेम्स में 53 किलोवजन वर्ग में कांस्य पदक।
– 2026 में 53 किलोवजन वर्ग की फाइनल में चाँदी पदक।
– पांगहल ने फाइनल तक पहुँचने के लिए:
– कज़ाखस्तान के शुग्यला ओमिर्बेक से 9‑0 जीत।
– उज्बेकिस्तान के सकिबजामाल एसबोसोविना से 8‑0 जीत।
– चीन के जिन झांग से 6‑1 जीत।
– पांगहल एशियन गेम्स के इतिहास में तीसरी भारतीय महिला कुश्तीपटु हैं जो फाइनल में पहुँची हैं, पहली दो जीनितका जाखर और विनेश फोगाट हैं।
– पांगहल पहली भारतीय महिला कुश्तीपटु हैं जिन्होंने वर्तमान आइची‑नागोया एशियन गेम्स में पदक जीतने का गौरव प्राप्त किया।
– भारत ने इस एशियन गेम्स में कुल 6 कुश्ती पदक (चाँदी, स्वर्ण, कांस्य) अर्जित किये हैं:
– अमन शेरावत ने पुरुषों के फ्रीस्टाइल 57 किलोवजन वर्ग में स्वर्ण।
– दीपक पनिया ने पुरुषों के 97 किलोवजन वर्ग में कांस्य।
संबंधित बयान
पांगहल ने मैच के बाद कहा, “मुझे यह मानना है कि यह जीत मेरे और मेरे कोच के अथक परिश्रम का परिणाम है। मैं अपने देश के लिए गर्व महसूस कर रही हूँ।”
कियोउका ने भी कहा, “मैंने पांगहल को चुनौती दी और यह जीत मेरे लिए खुशी का कारण है।”
प्रभाव और संदर्भ
पांगहल की चाँदी की जीत ने भारतीय कुश्ती को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। यह भारत के लिए एशियन गेम्स में कुश्ती के क्षेत्र में लगातार सफलता की परंपरा को आगे बढ़ाता है। पांगहल की उपलब्धि युवा महिलाओं को प्रेरित करती है कि वे भी इस खेल में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकती हैं।
निष्कर्ष
अंटिम पांगहल की चाँदी पदक जीत भारतीय कुश्ती के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है। उन्होंने न केवल अपनी व्यक्तिगत क्षमता का प्रदर्शन किया, बल्कि एशियन गेम्स में भारत के लिए गर्व का कारण बना। पांगहल की इस सफलता से यह स्पष्ट होता है कि भारत की कुश्ती टीम विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार है और आने वाले वर्षों में और भी बड़ी उपलब्धियाँ संभव हैं।
