B’desh home to 41.6 million child brides; legal gaps continue to undermine protection: UN review

शीर्षक
बांग्लादेश में बाल विवाह की दहलीज़ पर: संयुक्त राष्ट्र की समीक्षा ने उजागर किया कानूनी खामियाँ

परिचय
दक्षिण एशिया के सबसे बड़े बाल विवाह प्रकरण के रूप में बांग्लादेश ने 41.6 लाख बाल दुल्हनों के आँकड़े के साथ वैश्विक स्तर पर सबसे ऊँची दर दर्ज की है। 22.3 लाख बच्चे 15 वर्ष से कम उम्र में ही विवाह बंधन में बंधे हैं। 2017 में लागू हुए बाल विवाह प्रतिबंध अधिनियम (CMRA) के बावजूद, संयुक्त राष्ट्र के संयुक्त जनसंख्या कोष (UNFPA) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) की समीक्षा ने कानूनी ढाँचे और उसके कार्यान्वयन में गम्भीर कमियों की ओर इशारा किया है।

मुख्य घटनाक्रम
अक्टूबर 2024 में दहाका के डिजिटल डेस्क से प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र की समीक्षा ने बांग्लादेश में बाल विवाह की व्यापकता और उसके सामाजिक-आर्थिक कारणों को रेखांकित किया। समीक्षा में पाया गया कि CMRA के बावजूद, कानून के भीतर कई अस्पष्ट प्रावधान और प्रवर्तन की कमी के कारण बाल विवाह अभी भी प्रचलित है।

कानूनी कमियाँ
1. विवाह को निरस्त न करने का प्रावधान – अधिनियम में बाल विवाह के मामलों में दण्डात्मक कार्रवाई की जाती है, परंतु विवाह को शून्य घोषित करने का प्रावधान नहीं है।
2. विशेष परिस्थितियों में नाबालिग विवाह – अधिनियम के सेक्शन 19 के तहत 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को न्यायालय की मंजूरी से विवाह करने की अनुमति है, परंतु “विशेष परिस्थितियों” की परिभाषा अस्पष्ट है, जिससे दुरुपयोग की संभावना बनी रहती है।
3. अन्य कानूनों के साथ असंगति – अधिनियम के कुछ प्रावधान अन्य व्यक्तिगत कानूनों और परंपरागत प्रथाओं के साथ टकराव करते हैं, जिससे कानूनी अस्पष्टता उत्पन्न होती है।
4. प्रवर्तन में कमी – बाल विवाह रोकथाम समितियाँ अक्सर अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाने में असफल रहती हैं, और अधिकारियों को पर्याप्त प्रशिक्षण व लॉजिस्टिक सहायता नहीं मिलती।

साक्षात्कार और बयानों
धाक़ा विश्वविद्यालय के विधि विभाग की सहयोगी प्रोफेसर तस्लीमा यास्मिन ने समीक्षा में उठाई गई कमियों को स्वीकार करते हुए कहा, “बाल विवाह एक सामाजिक परंपरा है, केवल दण्डात्मक कार्रवाई से इसे समाप्त नहीं किया जा सकता। हमें सामाजिक उपाय, नीति हस्तक्षेप और सामुदायिक स्तर पर पहल करनी होगी तथा अधिनियम में संशोधन करना होगा।”

समाज पर प्रभाव
समीक्षा ने यह भी बताया कि गरीबी, शिक्षा की कमी, स्कूलों तक असमान पहुँच, हानिकारक सामाजिक एवं लैंगिक मानदंड, तथा सुरक्षा संबंधी चिंताएँ बाल विवाह की उच्च दर के प्रमुख कारण हैं। विशेष रूप से जलवायु प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों तथा शहरी झुग्गियों में, आर्थिक असुरक्षा और परंपरागत दृष्टिकोण के कारण परिवारों को अपनी बेटियों के लिए जल्दी विवाह को एक समाधान के रूप में देखना पड़ता है।

सिफ़ारिशें
1. न्यूनतम आयु 18 वर्ष तय करना – दोनों लिंगों के लिए न्यूनतम विवाह आयु 18 वर्ष निर्धारित की जानी चाहिए।
2. सेक्शन 19 का समाप्ति – “विशेष परिस्थितियों” के प्रावधान को पूरी तरह हटाया जाना चाहिए।
3. अधिनियम को प्राथमिकता देना – मौजूदा अधिनियम को किसी भी विरोधाभासी व्यक्तिगत कानून या परंपरागत प्रथा से ऊपर रखा जाना चाहिए।
4. प्रवर्तन तंत्र को सुदृढ़ करना – बाल विवाह रोकथाम समितियों को प्रशिक्षित करना, संसाधन उपलब्ध कराना और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना आवश्यक है।

निष्कर्ष
बांग्लादेश में बाल विवाह की समस्या केवल कानूनी ढाँचे की कमी नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारकों का संगम है। संयुक्त राष्ट्र की समीक्षा ने कानूनी खामियों को उजागर किया है, परंतु वास्तविक परिवर्तन के लिए सरकार, समाज और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के बीच समन्वित प्रयास अनिवार्य हैं। यदि उपरोक्त सिफ़ारिशों को लागू किया जाए और समाज में जागरूकता बढ़ाई जाए, तो बाल विवाह की दर में उल्लेखनीय कमी संभव है, जिससे लाखों युवा लड़कियों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सकेगा।

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