रमली के मैदानों का आवंटन कौन करेगा? दिल्ली उच्च न्यायालय ने डी.डी.ए. की “पहले आओ, पहले पाओ” नीति पर सवाल उठाया
परिचय
दिसंबर 2024 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डी.डी.ए.) की सार्वजनिक मैदानों के आवंटन के लिए अपनाई गई “पहले आओ, पहले पाओ” नीति को असंवैधानिक और अनैतिक बताया। यह निर्णय “रमली” और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मैदानों के आवंटन पर आधारित था, जहाँ रेम्स ऑफ़ न्यू बिगिनिंग फाउंडेशन ने अपनी शिकायत दर्ज की थी।
मुख्य घटनाक्रम
रायज़ ऑफ़ न्यू बिगिनिंग फाउंडेशन ने 2023 और 2024 में शिवाजी प्लेस, राजा गार्डन में स्थित चंक‑सी ग्राउंड पर रमली दहशा महोत्सव का आयोजन किया था। 2026 के लिए आवेदन करते समय फाउंडेशन ने दावा किया कि डी.डी.ए. के मानक संचालन प्रक्रिया (एस.ओ.पी.) के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में दो बार उसी मैदान पर कार्यक्रम आयोजित करने वाले समाजों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
लेकिन डी.डी.ए. ने फाउंडेशन के आवेदन को अस्वीकार कर दिया, यह कहते हुए कि 10 अप्रैल को किसी अन्य संस्था ने पहले आवेदन किया था, जबकि फाउंडेशन का आवेदन 27 मई को प्राप्त हुआ। यह निर्णय हाई लेवल कोऑर्डिनेशन कमेटी (एच.एल.सी.सी.) के दिशानिर्देशों पर आधारित था, जिसमें “पहले आओ, पहले पाओ” सिद्धांत को लागू किया गया था।
न्यायिक समीक्षा
न्यायाधीश अमित महाजन ने यह स्पष्ट किया कि किसी नीति का यांत्रिक रूप से निर्धारण होना, उसे संवैधानिक रूप से उचित या सार्वजनिक नीति के अनुरूप नहीं बनाता। उन्होंने कहा कि ऐसी नीति आवेदकों के लिए असमान अवसर पैदा कर सकती है, खासकर जब बुकिंग प्रक्रिया और मानदंड सार्वजनिक रूप से पहले से घोषित न हों।
न्यायालय ने पाया कि डी.डी.ए. ने आवेदन अवधि या “पहले आओ, पहले पाओ” आधार पर आवंटन के बारे में कोई सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की थी। इससे यह संभावना बनी कि प्रशासनिक जानकारी तक पहुँच रखने वाले लोग पहले मैदानों की उपलब्धता जानकर लाभ उठा सकते हैं, जिससे अन्य आवेदकों को नुकसान होता है।
निर्णय और निर्देश
उच्च न्यायालय ने फाउंडेशन को तात्कालिक राहत नहीं दी, क्योंकि कार्यक्रम जल्द ही शुरू होने वाला था और मौजूदा आवंटन को रद्द करना व्यावहारिक नहीं था। इसके बजाय, न्यायालय ने दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डी.यू.एस.आई.बी.) को निम्नलिखित निर्देश दिए:
- वर्षिक सूचना – हर वर्ष कम से कम 90 दिन पहले एक सार्वजनिक सूचना जारी करनी होगी, जिसमें उपलब्ध मैदान, बुकिंग तिथियाँ, पात्रता शर्तें, शुल्क और मूल्यांकन मानदंड बताए जाएँ।
- आवेदन विंडो – एक ही पूर्वनिर्धारित आवेदन अवधि के भीतर सभी आवेदनों को स्वीकार करना अनिवार्य है।
- अतिरिक्त विंडो – यदि किसी मैदान का आवंटन प्रारंभिक प्रक्रिया के बाद भी नहीं होता, तो उसे फिर से एक अतिरिक्त आवेदन विंडो के माध्यम से सभी योग्य आवेदकों के लिए खुला रखा जाए।
- समान पात्रता मूल्यांकन – सभी आवेदनों का एक समान पात्रता मूल्यांकन किया जाए, जिसमें संगठन की वैधता, पंजीकरण और दस्तावेज़ीकरण की जाँच शामिल हो।
- साइट‑विशिष्ट योजनाएँ – आवेदकों को भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, आपातकालीन प्रतिक्रिया, अग्नि एवं विद्युत सुरक्षा, स्वच्छता, यातायात व पार्किंग, पहुँच, कचरा निस्तारण और मैदान की पुनर्स्थापना के लिए विस्तृत योजनाएँ प्रस्तुत करनी होंगी।
- तुलनात्मक मूल्यांकन – यदि एक ही साइट पर कई योग्य आवेदक हों, तो पूर्वनिर्धारित और प्रकाशित स्कोरिंग मैट्रिक्स या अन्य प्रकाशित मानदंडों के आधार पर तुलनात्मक मूल्यांकन किया जाए।
- पूर्व आयोजकों को प्राथमिकता – संतोषजनक अनुपालन रिकॉर्ड वाले पूर्व आयोजकों को सीमित प्राथमिकता दी जा सकती है, परंतु उन्हें स्वतः आवंटन का अधिकार नहीं होना चाहिए। ऐसी प्राथमिकता दो लगातार वर्षों से अधिक नहीं हो सकती और प्रतिस्पर्धी दावों का मूल्यांकन योग्यता के आधार पर होना चाहिए।
- शिकायत निवारण – नीति में शिकायत निवारण का पर्याप्त तंत्र होना चाहिए, ताकि आवंटन और सामान्य शिकायत प्रक्रिया कार्यक्रम शुरू होने से पर्याप्त पहले पूरी हो जाए।
महत्वपूर्ण जानकारी
– यह निर्णय “पहले आओ, पहले पाओ” नीति को असंवैधानिक बताने वाला पहला महत्वपूर्ण न्यायिक कदम है।
– डी.डी.ए. की नीति में पारदर्शिता और समान अवसर की कमी को उजागर करते हुए, न्यायालय ने सार्वजनिक सूचना और स्पष्ट मानदंडों के महत्व पर बल दिया।
– फाउंडेशन के 2026 के कार्यक्रम पर तत्काल प्रभाव नहीं पड़ा, परंतु आने वाले वर्षों में इसी तरह के आवंटन विवादों में यह निर्णय मार्गदर्शक सिद्ध होगा।
संबंधित बयान
रायज़ ऑफ़ न्यू बिगिनिंग फाउंडेशन के प्रवक्ता ने कहा, “हमारा उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि सभी समुदायों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना है।”
डी.डी.ए. के प्रतिनिधि ने स्वीकार किया, “हम इस निर्णय को स्वीकार करते हुए आने वाले वर्षों में नीति में सुधार करेंगे।”
प्रभाव और संदर्भ
यह फैसला दिल्ली के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए मैदान आवंटन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत बनाने का संकेत देता है। इससे न केवल सांस्कृतिक संगठनों को लाभ मिलेगा, बल्कि आम जनता को भी सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग में समान अवसर मिलेगा।
निष्कर्ष
दिल्ली उच्च न्यायालय का यह निर्णय “पहले आओ, पहले पाओ” नीति के प्रति एक स्पष्ट संकेत है कि सार्वजनिक संसाधनों के आवंटन में पारदर्शिता, समानता और संविधान के सिद्धांतों का पालन अनिवार्य है। आने वाले वर्षों में डी.डी.ए. और अन्य सार्वजनिक निकायों को इन निर्देशों के आधार पर अपनी नीतियों का पुनर्मूल्यांकन करना पड़ेगा, ताकि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन न्यायसंगत और समावेशी ढंग से हो सके।
