मुख्य शीर्षक
गुड़-सेवा कर अपील ट्रिब्यूनल ने ई‑वाय बिल उल्लंघन पर ₹4.40 लाख का जुर्माना बरकरार रखा
परिचय
रायपुर के गूड्स एंड सर्विसेज टैक्स अपील ट्रिब्यूनल (GSTAT) के एक निर्णय में यह स्पष्ट किया गया कि परिवहन के दौरान की गई बिक्री, चाहे वह वैध हो, फिर भी ई‑वाय बिल के नियमों के अधीन है। इस निर्णय के तहत, 34.770 टन आयरन स्क्रैप पर लागू ₹4.40 लाख का जुर्माना बरकरार रखा गया।
मुख्य घटनाक्रम
– खरीद और प्रेषण: आकाश सेल्स कॉर्पोरेशन ने अनन्या ट्रेडिंग कंपनी से 34.770 टन एमएस स्क्रैप खरीदा।
– ई‑वाय बिल: स्क्रैप को विशाखापट्टनम से भिलाई तक भेजने के लिए एक ई‑वाय बिल जारी किया गया, जिसकी वैधता 8 मई 2024 तक थी।
– मध्यवर्ती बिक्री: स्क्रैप भिलाई पहुँचने से पहले, आकाश सेल्स ने उसी माल को श्री बजरंग पावर & इस्पात लिमिटेड (रायपुर) को बेच दिया।
महत्वपूर्ण जानकारी
1. कानूनी आधार
– IGST अधिनियम की धारा 10(1)(b) के अनुसार, परिवहन के दौरान की गई बिक्री वैध हो सकती है।
– परंतु, GST अधिनियम की धारा 68 और नियम 138 तथा 138A के तहत, किसी भी माल के आंदोलन के लिए ई‑वाय बिल अनिवार्य है, चाहे वह बिक्री के समय हो या बाद में।
- निर्णय का सार
- रायपुर बेंच ने कहा कि “परिवहन के दौरान की गई बिक्री से ई‑वाय बिल की आवश्यकता समाप्त नहीं होती।”
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आकाश सेल्स द्वारा जारी ई‑वाय बिल में वास्तविक आंदोलन, मूल और गंतव्य सही ढंग से परिलक्षित नहीं थे।
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जुर्माने का आधार
- ई‑वाय बिल के नियमों का उल्लंघन करने के कारण ₹4.40 लाख का जुर्माना लगाया गया।
- यह जुर्माना 2023 – 24 के वित्तीय वर्ष के लिए लागू है।
संबंधित बयान
– आकाश सेल्स कॉर्पोरेशन के प्रतिनिधि: “हमने नियमों का पालन करने का प्रयास किया, परंतु प्रक्रिया में कुछ त्रुटियाँ हुईं।”
– श्री बजरंग पावर & इस्पात लिमिटेड के अधिकारी: “हमने माल के आगमन के बाद ही खरीदारी पूरी की, इसलिए हमें लगा कि ई‑वाय बिल की आवश्यकता नहीं है।”
– GSTAT के न्यायाधीश: “ई‑वाय बिल का उद्देश्य कर चोरी को रोकना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। किसी भी प्रकार की बिक्री, चाहे वह परिवहन के दौरान हो, इस नियम से मुक्त नहीं है।”
प्रभाव और संदर्भ
– उद्योग पर असर: यह निर्णय उन सभी कंपनियों के लिए चेतावनी है जो परिवहन के दौरान बिक्री करती हैं।
– कानूनी स्पष्टता: अब यह स्पष्ट है कि ई‑वाय बिल का पालन अनिवार्य है, चाहे माल अभी भी यात्रा पर हो या नहीं।
– कर प्रशासन: GST प्राधिकरणों को यह सुनिश्चित करने के लिए सख्त निगरानी करनी पड़ेगी कि सभी परिवहन में ई‑वाय बिल सही ढंग से जारी और उपयोग हो।
निष्कर्ष
रायपुर बेंच के इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि परिवहन के दौरान की गई बिक्री को भी ई‑वाय बिल के नियमों के अंतर्गत लाया जाता है। आकाश सेल्स कॉर्पोरेशन द्वारा 34.770 टन स्क्रैप की मध्यवर्ती बिक्री के बावजूद, ई‑वाय बिल की अनियमितता के कारण ₹4.40 लाख का जुर्माना बरकरार रखा गया। यह निर्णय भारतीय कर प्रणाली में पारदर्शिता और नियमों के पालन को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
