सुखानी बस्ती में हाथी का शॉक से निधन, वनमंत्री ने फिर से चेतावनी जारी की

सुखानी बस्ती में फिर से हाथी का निधन, वनमंत्री ने चेतावनी दी

परिचय
बंगाल के उत्तर भाग में हाथियों के साथ बार-बार हो रहे संघर्षों के बीच, सुलकापारा के सुखानी बस्ती में आज सुबह एक हाथी का शव मिला। यह घटना, वनमंत्री मनोज कुमार ओरान द्वारा बार-बार की गई चेतावनियों के बावजूद हुई। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि हाथी को बिजली के तार से शॉक लगा हो सकता है। शव के कारण का पता पोस्ट‑मोर्टेम के बाद ही चल सकेगा।

मुख्य घटनाक्रम
सुबह के समय, नागरकाता ब्लॉक के सुलकापारा में स्थित एक पपीता के खेत में एक हाथी का शव पाया गया। फील्ड में मौजूद एक पपीता के पौधे के साथ हाथी के सूंड के चारों ओर एक बिजली का तार लिपटा हुआ मिला। गांववासियों ने यह दृश्य देखकर तुरंत वन विभाग को सूचित किया। इसके बाद बीट अधिकारी इमरान असलाम और डाइना रेंज अधिकारी सैमा रॉय ने स्थल का निरीक्षण किया।

अधिकारियों ने यह अनुमान लगाया कि हाथी ने पपीता के खेत में प्रवेश करते समय तार के संपर्क में आकर विद्युत् शॉक के कारण मृत्यु हो गई। हालांकि, शव का पोस्ट‑मोर्टेम रिपोर्ट आने तक मृत्यु का सटीक कारण निश्चित नहीं किया जा सकता।

महत्वपूर्ण जानकारी
– यह घटना, हाल ही में जलपाईगुड़ी जिले के राजगंज ब्लॉक में पपीता के खेत में हाथी के विद्युत् शॉक से मारे जाने की घटना के कुछ ही दिनों बाद हुई।
– उत्तर बंगाल में हाथियों के कारण किसानों को पपीता के खेतों में भारी नुकसान होता है। कुछ किसान इस नुकसान से बचने के लिए खतरनाक विद्युत् तार लगाते हैं, जिससे हाथियों की मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।
– वन विभाग द्वारा पपीता के खेतों में हाथियों के लिए विद्युत् तार लगाने के खिलाफ चेतावनी जारी की गई है और ऐसे कार्यों के लिए कड़ी सजा का आह्वान किया गया है।

संबंधित बयान
वनमंत्री मनोज कुमार ओरान ने बार-बार चेतावनी दी है कि हाथियों को मारने या भगाने के लिए विद्युत् तार का उपयोग न किया जाए। उन्होंने ऐसे कार्यों के लिए जिम्मेदार लोगों पर कठोर सजा का आदेश दिया है। वन विभाग हाथियों के कारण हुए पपीता के नुकसान के लिए किसानों को मुआवजा देता है, परंतु बार‑बार होने वाली घटनाएँ यह दर्शाती हैं कि मौजूदा उपाय पर्याप्त नहीं हैं।

प्रभाव या संदर्भ
हाथियों के बड़े झुंड दार्जिलिंग तेराई, डूआर्स और नेपाल के पड़ोसी हिस्सों से होकर गुजरते हैं। इस क्षेत्र में कई पारंपरिक हाथी मार्ग हैं जो वन्य जीवन और कृषि भूमि तथा मानव आवासों को जोड़ते हैं। पपीता के फसल के कटाई के मौसम (सितंबर से दिसंबर) के दौरान हाथियों और लोगों के बीच टकराव की संभावना बढ़ जाती है।

नक्सालबारी–बागडोगरा क्षेत्र में 150 से अधिक हाथियों का झुंड टुकुरियाजहर, पनिगट्टा और बागडोगरा के जंगलों से होकर गुजरता है। टुकुरियाजहर–दल्का मार्ग विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां हाथी नदियों, रेलवे ट्रैक और राष्ट्रीय राजमार्ग 327 को पार करते हुए कृषि भूमि की ओर बढ़ते हैं। 2021 से 2026 के बीच मानव‑हाथी टकराव में 55 लोगों की मौत हुई और हाथियों के हमलों से लगभग 219.8 हेक्टेयर कृषि भूमि को क्षति पहुंची।

वन विभाग रात भर हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रहा है ताकि उन्हें संवेदनशील क्षेत्रों से दूर रखा जा सके। परंतु अधिकारियों का कहना है कि युवा लोग दिन में हाथियों को देखते ही उनका पीछा करते हैं, जिससे हाथी भ्रमित होकर फसलों, सड़कों और आवासीय क्षेत्रों की ओर बढ़ते हैं।

तीन दिन पहले, टुकुरियाजहर जंगल से 100 से अधिक हाथियों का झुंड बागडोगरा जंगल की ओर बढ़ा। वन कर्मी ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रैफिक रोक दिया और एक रेलवे क्रॉसिंग पर वन रक्षक अक्षर केरकेटा ने लाल झंडे से ट्रेन को रोकने में मदद की।

निष्कर्ष
सुखानी बस्ती में हाथी के शिकार की यह घटना, उत्तर बंगाल में हाथियों और किसानों के बीच चल रहे संघर्ष की गंभीरता को फिर से उजागर करती है। पारंपरिक हाथी मार्गों की रक्षा, वैज्ञानिक प्रबंधन, अवैध विद्युत् बाड़ों का उन्मूलन और प्रभावित किसानों को समय पर सहायता प्रदान करना अनिवार्य है। बार‑बार हाथियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर धकेलने से स्थायी समाधान नहीं मिलेगा। हाथियों के साथ सह-अस्तित्व तभी संभव है जब उन्हें परेशान न किया जाए और उनके प्राकृतिक मार्गों को संरक्षित रखा जाए।

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