श्री ओंकारेश्वर साई मंदिर: मुंबई के दिल में 32 वर्ष पुरानी हिन्दू‑मुस्लिम एकता की मिसाल
परिचय
मुंबई, जो अपनी विविधता के संग एकता के लिए प्रसिद्ध है, के दहिसर (पूर्व) में स्थित श्री ओंकारेश्वर साई मंदिर ने 32 वर्षों से हिन्दू‑मुस्लिम भाईचारे का उज्ज्वल उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह मंदिर, शिवाजी नगर, छत्रपति शिवाजी रोड पर स्थित, अपनी स्थापना से लेकर अब तक बिना किसी दान के चल रहा है और दोनों धर्मों के लोग इसे एक साथ मनाते हैं।
मुख्य घटनाक्रम
मंदिर की पायाभूत कड़ी 1998 में फ़िल्म कार्यकर्ता और समाजसेवी श्री अश्फ़ाक क़होकर द्वारा अपनी जमीन पर रखी गई। यह कार्य उनके दिवंगत मित्र श्री मनोहर स्वामी के अनुरोध पर किया गया। स्वामी ने मंदिर के प्रारम्भिक वर्षों में इसका प्रबंधन किया। उनके अचानक निधन के बाद, क़होकर ने पूरी जिम्मेदारी संभाली और मंदिर के रख-रखाव, देखभाल तथा नवीनीकरण का कार्य स्वयं किया। उल्लेखनीय है कि 32 वर्षों से मंदिर को किसी भी प्रकार का दान नहीं मिला है; क़होकर ने स्वयं सभी खर्चे उठाए हैं।
मंदिर में एक पवित्र शिवलिंग के साथ साई बाबा, हनुमान (संकटमोचन), दुर्गा देवी, शीतला माता और गणेश जी के पूजनीय मूर्तियाँ स्थित हैं। हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में दो‑दिन का शिव‑साई महाभंडारा, सत्यनारायण महापूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। इस दौरान हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही समुदाय उत्साहपूर्वक भाग लेते हैं, जिससे यह परंपरा 32 वर्षों से बिना किसी रुकावट के चलती आ रही है।
महत्वपूर्ण जानकारी
मंदिर का संपूर्ण प्रबंधन क़होकर शिक्षा एवं कल्याण ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। ट्रस्ट का मुख्यालय दहिसर में है और यह ट्रस्ट “मद्रसा जामियातुल अज़हर” भी चलाता है, जो बोरीवाली, दहिसर के पास स्थित है। इस मद्रसा में लगभग पचास अनाथ व वंचित बच्चों को शिक्षा, भोजन और आश्रय उपलब्ध कराया जाता है, जो ट्रस्ट के धर्मनिरपेक्ष दृष्टिकोण का साक्ष्य है।
श्री अश्फ़ाक क़होकर भारतीय सिनेमा उद्योग में एक प्रमुख नाम हैं। वे दादासाहेब फालके फिल्म फाउंडेशन अवार्ड्स के अध्यक्ष और स्क्रीन राइटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष भी हैं। 2024 में उन्हें तब के महाराष्ट्र के माननीय गवर्नर तथा अब के भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन द्वारा “बॉलीवुड सर्वश्रेष्ठ कार्यकर्ता” पुरस्कार से नवाजा गया।
संबंधित बयान / जानकारी
मंदिर के कार्यक्रमों में सिनेमा जगत के प्रसिद्ध कलाकार जैसे सुदेह बेरी, चार्ली, ज़ाकिर खान और राजनैतिक क्षेत्र के प्रमुख जैसे श्री विनोद घोषकर, दिवंगत श्री अभिषेक घोषकर, मिसेज़ तेजस्वी घोषकर, सुश्री मनीषा ताई चौधरी, श्री पियूष गोयल आदि ने भी उपस्थिति दर्ज कराई है। इन सभी की उपस्थिति से यह स्पष्ट होता है कि हिन्दू‑मुस्लिम एकता का संदेश केवल मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सभी वर्गों तक पहुँच रहा है।
मंदिर को भारत और विदेश के महान संतों की भी आशीर्वाद प्राप्त है, जिनमें पायलट बाबा, के. के. ऐकावा माता (जापान), महामंडलेश्वर संजय गिरी, स्वर्गानंद महाराज, रमेशानंद गिरी और अन्य प्रतिष्ठित संत शामिल हैं। इन संतों की उपस्थिति से मंदिर की आध्यात्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है।
प्रभाव या संदर्भ
श्री ओंकारेश्वर साई मंदिर की यह अनूठी परंपरा मुंबई की सामाजिक ताने‑बाने में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में उभरती है। यहाँ के लोग, चाहे वे हिन्दू हों या मुस्लिम, एक साथ मिलकर धार्मिक कार्यक्रमों का आनंद लेते हैं, जिससे धार्मिक सहिष्णुता और सांस्कृतिक एकता को बल मिलता है। ट्रस्ट द्वारा चलाए जाने वाले शैक्षिक एवं कल्याण कार्यों से यह स्पष्ट होता है कि यह संस्था केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक एवं मानवीय स्तर पर भी योगदान दे रही है।
इसके अलावा, क़होकर द्वारा मंदिर के रख-रखाव के लिए स्वयं को समर्पित करना, बिना किसी दान के चलाना, यह दर्शाता है कि सच्ची भक्ति और सेवा का स्तर क्या हो सकता है। यह पहल युवा पीढ़ी के लिए एक प्रेरणास्रोत बनती है, जो दिखाती है कि धर्म के प्रति समर्पण और समाज के प्रति जिम्मेदारी एक साथ चल सकती है।
निष्कर्ष
श्री ओंकारेश्वर साई मंदिर, दहिसर के दिल में स्थित, 32 वर्षों से हिन्दू‑मुस्लिम भाईचारे की मिसाल बनकर खड़ा है। क़होकर शिक्षा एवं कल्याण ट्रस्ट के नेतृत्व में, यह मंदिर न केवल धार्मिक कार्यक्रमों का केंद्र है, बल्कि समाज के सभी वर्गों के लिए एक समावेशी मंच भी है। इसकी अनूठी परंपरा और समर्पित कार्य से यह स्पष्ट होता है कि जब धर्म और समाज एकसाथ मिलकर कार्य करें, तो वे समाज में शांति, सहिष्णुता और एकता की नई मिसालें स्थापित कर सकते हैं।
