मध्य‑पूर्व संघर्ष के कारण भारत का रूसी कच्चे तेल आय 13 % घटा, कीमतें बढ़तीं‑बढ़तीं

शीर्षक
भारत का रूसी कच्चे तेल का आय 13 % घटा, कीमतें बढ़तीं‑बढ़तीं, मध्य‑पूर्व संघर्ष के कारण

परिचय
नई दिल्ली – 2026 साल के सितंबर माह में भारत द्वारा रूसी कच्चे तेल का आय 13 % घटकर 4.1 अरब यूरो पर आ गया, जो अप्रैल 2026 के बाद से सबसे कम स्तर है। यह लगातार दूसरा मासिक गिरावट है और इसका मुख्य कारण मध्य‑पूर्व में बढ़ते संघर्ष से उत्पन्न कीमतों में तेज़ी तथा लाल सागर के व्यापार मार्ग पर असर है।

मुख्य घटनाक्रम
केंद्र फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) के अनुसार, भारत के प्रमुख रिफ़ाइनरियों में आय में भारी गिरावट देखी गई। जमनगर रिफ़ाइनरी में 27 % की कमी, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के परादीप पोर्ट में 21 % और नायरा एनर्जी के वदिनर में 8 % की कमी दर्ज की गई।

रूस के लिए भारत सितंबर 2026 में दूसरा सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन खरीदार बना रहा, जिसमें 88 % कच्चा तेल था। केवल चीन ने इससे अधिक आयात किया। दिसंबर 2022 से अब तक भारत ने रूस के कच्चे तेल का 37 % हिस्सा लिया, जबकि चीन का हिस्सा 50 % रहा।

इस बीच, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश जारी किया, जिसमें रूसी तेल निर्यात से जुड़ी कई प्रतिबंधों और शुल्कों को माफ़ किया गया। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रीय हित में माना गया और इससे भारत व चीन को वर्तमान स्तर पर रूसी तेल आयात जारी रखने में मदद मिलेगी।

सितंबर 2026 में उरल्स ग्रेड कच्चे तेल की औसत कीमत 32 % बढ़कर 90.7 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो अप्रैल 2026 के बाद से सबसे ऊँची मासिक औसत है। यह यूरोपीय संघ और ब्रिटेन द्वारा 1 फरवरी 2026 से लागू की गई 44.1 डॉलर प्रति बैरल की मूल्य सीमा से दोगुनी है।

महत्वपूर्ण जानकारी
– मध्य‑पूर्व संघर्ष के कारण लाल सागर के व्यापार मार्ग पर असर, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं।
– हर्मुस जलडमरूमध्य से तेल परिवहन की मात्रा में 60 % से अधिक वृद्धि के बावजूद, कुल वैश्विक तेल कीमतें ऊँची बनी रही।
– अमेरिका‑इज़राइल के इराक पर हमलों के बाद से छह महीनों में रूस के समुद्री निर्यात आय में लगभग 35.9 अरब डॉलर की वृद्धि हुई।
– रूस के जीवाश्म ईंधन निर्यात का अधिकांश हिस्सा चीन (कोयला और कच्चा तेल), तुर्की (तेल उत्पाद) और यूरोपीय संघ (एलएनजी और पाइपलाइन गैस) पर निर्भर है।

संबंधित बयान
CREA के विश्लेषण में यह भी बताया गया है कि हर्मुस ऊर्जा संकट ने रूस की निर्यात आय में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी की है। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद भारत व चीन को रूसी तेल आयात में निरंतरता बनी रहेगी, जिससे दोनों देशों के ऊर्जा सुरक्षा में सुधार होगा।

प्रभाव या संदर्भ
रूसी कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ी से भारत की ऊर्जा लागत पर दबाव बढ़ रहा है, जिससे घरेलू ऊर्जा मूल्य पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर, अमेरिकी कार्यकारी आदेश से भारत व चीन को रूसी तेल आयात में स्थिरता मिलेगी, जो दोनों देशों के ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करेगा।

निष्कर्ष
सितंबर 2026 में भारत का रूसी कच्चे तेल आय में 13 % गिरावट और कीमतों में तेज़ी, मध्य‑पूर्व संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार पर पड़े प्रभाव को दर्शाती है। अमेरिकी कार्यकारी आदेश से भारत व चीन को रूसी तेल आयात में निरंतरता मिलती है, परंतु ऊँची कीमतें दोनों देशों की ऊर्जा लागत पर दबाव डालती रहेंगी। रूस के निर्यात आय में वृद्धि और उसके ग्राहकों के संकेंद्रण से यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में कुछ प्रमुख खिलाड़ियों का प्रभाव अभी भी मजबूत है।

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