भारत ने अमेरिकी प्रतिबंध कानून पर चिंता जताई: जिशंकर ने 100% टैरिफ के खतरे पर चेतावनी दी

भारत ने अमेरिकी प्रतिबंध कानून पर चिंता जताई, राजनयिक संवाद में जिशंकर

परिचय
राष्ट्रपति वाणिज्य मंत्री राजनयिक जिशंकर ने हाल ही में अमेरिकी सीनेटर मार्को रूबियो के साथ हुए संवाद में भारत की गहरी चिंता व्यक्त की। यह चर्चा अमेरिकी ‘सैनक्शनिंग रूस एंड इरान एक्ट’ (Sanctioning Russia and Iran Act) पर केन्द्रित थी, जो रूस से आयातित तेल पर 100 % टैरिफ लगाने का प्रावधान रखता है। भारत, जो अगस्त में रूस से लगभग 45 % कच्चे तेल का आयात करता है, इस कदम को अपने ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा मानता है।

मुख्य घटनाक्रम
1. संकल्पना का परिचय – अमेरिकी कांग्रेस ने ‘सैनक्शनिंग रूस एंड इरान एक्ट’ पारित किया, जिसका उद्देश्य रूस और इरान पर आर्थिक प्रतिबंधों को बढ़ाना है।
2. टैरिफ प्रावधान – इस कानून के तहत रूस से आयातित तेल पर 100 % टैरिफ लगाया जा सकता है, जिससे भारत के तेल आयात पर सीधा असर पड़ेगा।
3. राजनयिक संवाद – जिशंकर ने अमेरिकी सीनेटर मार्को रूबियो के साथ एक बैठक में इस विषय पर चर्चा की और भारत की चिंताओं को स्पष्ट किया।
4. ऊर्जा आपूर्ति पर प्रभाव – रूस-यूक्रेन संघर्ष और मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पहले से ही अस्थिर है। इस संदर्भ में अतिरिक्त टैरिफ से ऊर्जा कीमतों में और वृद्धि की संभावना है।

महत्वपूर्ण तथ्य
रूसी तेल पर निर्भरता – अगस्त 2023 में भारत के कच्चे तेल आयात का लगभग 45 % हिस्सा रूस से था।
टैरिफ का प्रभाव – 100 % टैरिफ लगाने से भारत को आयातित तेल पर दोगुना लागत उठानी पड़ेगी, जिससे पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में तीव्र वृद्धि संभव है।
वैश्विक ऊर्जा संकट – रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में कमी आई है, जिससे पहले से ही कीमतें बढ़ रही हैं।
भारत की ऊर्जा नीति – भारत ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक स्रोतों और ऊर्जा दक्षता पर जोर दिया है, लेकिन तत्काल समाधान के लिए रूसी तेल पर निर्भरता कम करना कठिन है।

संबंधित बयान
जिशंकर ने कहा, “हम अमेरिकी सरकार से आग्रह करते हैं कि वे इस कानून के प्रभावों पर पुनर्विचार करें, खासकर उन देशों के लिए जो रूस से तेल पर निर्भर हैं।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत ने पहले से ही ऊर्जा आपूर्ति में विविधता लाने के कदम उठाए हैं, परंतु अचानक टैरिफ से आर्थिक नुकसान और ऊर्जा संकट बढ़ सकता है।

मार्को रूबियो ने जवाब में कहा, “हमारा उद्देश्य रूस और इरान पर दबाव डालना है, लेकिन हम यह भी समझते हैं कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसके क्या प्रभाव पड़ सकते हैं। हम भारत के साथ संवाद जारी रखेंगे।”

प्रभाव और संदर्भ
आर्थिक असर – तेल पर 100 % टैरिफ से आयात लागत में दोगुना बढ़ोतरी होगी, जिससे औद्योगिक उत्पादन और परिवहन लागत प्रभावित होगी।
मुद्रा पर दबाव – आयात लागत बढ़ने से विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ेगी, जिससे रुपये पर दबाव पड़ेगा।
ऊर्जा सुरक्षा – भारत को वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं से तेल आयात बढ़ाने की आवश्यकता होगी, जिससे नई आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थापना में समय लगेगा।
भू-राजनीतिक संतुलन – अमेरिका के प्रतिबंध नीति से भारत को रूस के साथ अपने संबंधों को संतुलित करना होगा, जो रणनीतिक रूप से जटिल है।

निष्कर्ष
भारत ने अमेरिकी ‘सैनक्शनिंग रूस एंड इरान एक्ट’ पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए यह स्पष्ट किया कि 100 % टैरिफ का प्रावधान उसके ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है। जिशंकर के संवाद से यह स्पष्ट होता है कि भारत वैश्विक ऊर्जा बाजार में संतुलन बनाए रखने के लिए सक्रिय रूप से कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। भविष्य में भारत को वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों और आपूर्ति विविधीकरण पर और अधिक जोर देना पड़ेगा, ताकि ऐसी अनिश्चितताओं के बावजूद उसकी ऊर्जा आवश्यकताएँ सुरक्षित रह सकें।

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