जम्मू‑कश्मीर में बिजली बिल व संग्रह में ४१७ करोड़ का बड़ा अंतर: कश्मीर पावर निगम की ऑडिट रिपोर्ट

जम्मू‑कश्मीर में बिजली बिल व संग्रह में ४१७ करोड़ का अंतर

परिचय
कश्मीर पावर वितरण निगम लिमिटेड (KPDCL) के वार्षिक ऊर्जा ऑडिट से पता चला है कि २०२५‑२०२६ के वित्तीय वर्ष में राज्य के बिजली बिल व संग्रह के बीच ४१७.१० करोड़ रुपये का बड़ा अंतर रहा। इस आंकड़े ने राज्य सरकार व उपभोक्ताओं के बीच चर्चा को फिर से तेज़ कर दिया है।

मुख्य घटनाक्रम
ऑडिट के अनुसार जम्मू‑कश्मीर में कुल १२,९४,७३३ बिजली जुड़ाव थे, जिनमें से ७,०२४.५८ मिलियन यूनिट (MU) की ऊर्जा उपभोग हुई। इन जुड़ावों में से ८२.३९ % (१०,६६,७१७) आवासीय वर्ग के थे, जिन्होंने ५,०२५.९१ MU, अर्थात् कुल उपभोग का ७१.५ % खपत किया। आवासीय उपभोक्ताओं का कुल जुड़ाव भार २,२९७.६७ मेगावाट (MW) था, जो ३,५३८.३१ MW के कुल भार का ६४.९ % था।

दूसरी ओर, कम वोल्टेज (LT) के वाणिज्यिक‑औद्योगिक वर्ग में २,११,८८२ जुड़ाव थे, जो कुल का १६.३६ % थे। उनका उपभोग ७५९.४० MU, अर्थात् १०.८ % था, जबकि जुड़ाव भार ६५०.७८ MW था। उच्च वोल्टेज (HT) के वाणिज्यिक‑औद्योगिक उपभोक्ताओं के पास ५५० जुड़ाव थे, जिनका उपभोग ४६०.१९ MU और जुड़ाव भार २१५.४७ MW था।

कृषि क्षेत्र में ४,३३८ जुड़ाव थे, जिनका उपभोग १०८.७५ MU (१.५ %) और जुड़ाव भार ७०.०७ MW था। “अन्य” वर्ग में ११,२४६ जुड़ाव थे, जिनका उपभोग ६७०.३४ MU (९.५ %) और जुड़ाव भार ३०४.३२ MW था।

महत्वपूर्ण जानकारी
वित्तीय वर्ष २०२५‑२०२६ के दौरान कुल बिजली बिल २,९८३.०३ करोड़ रुपये था, जबकि वास्तविक संग्रह २,५६५.९३ करोड़ रुपये रहा। इस प्रकार कुल अंतर ४१७.१० करोड़ रुपये रहा।
– आवासीय: बिल १,६६३.५३ करोड़, संग्रह १,४५५.९० करोड़।
– वाणिज्यिक‑औद्योगिक (LT): बिल ४५०.४९ करोड़, संग्रह ३७४.०२ करोड़।
– वाणिज्यिक‑औद्योगिक (HT): बिल २४६.९५ करोड़, संग्रह २३९.९७ करोड़।
– कृषि: बिल ६७.७१ करोड़, संग्रह १९.७६ करोड़।
– अन्य: बिल ५५४.३५ करोड़, संग्रह ४७६.२९ करोड़।

आवासीय उपभोक्ताओं का बिल व संग्रह के बीच अंतर २०.६४ करोड़ रुपये था, जबकि कृषि वर्ग में यह अंतर ४८.०५ करोड़ रुपये रहा, जो सबसे बड़ा था। वाणिज्यिक‑औद्योगिक वर्गों में अंतर अपेक्षाकृत कम रहा।

संबंधित बयान / जानकारी
कश्मीर पावर वितरण निगम के प्रवक्ता ने कहा, “यह अंतर मुख्यतः बिलिंग त्रुटियों, समय पर भुगतान न करने और कुछ उपभोक्ताओं द्वारा अवैध उपभोग के कारण हुआ है। हम इन मुद्दों को सुलझाने के लिए कड़ी निगरानी और सुधारात्मक कदम उठा रहे हैं।”
राज्य सरकार के ऊर्जा विभाग के अधिकारी ने बताया, “उपभोक्ताओं को बिल समय पर भुगतान करने के लिए जागरूक करना और बिलिंग प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाना हमारी प्राथमिकता है।”

प्रभाव या संदर्भ
४१७ करोड़ रुपये का अंतर राज्य की ऊर्जा व्यवस्था पर वित्तीय दबाव डालता है। यह अंतर बिजली निगम की आय में कमी का कारण बन सकता है, जिससे रख‑रखाव और नई परियोजनाओं के लिए उपलब्ध धन सीमित हो सकता है। साथ ही, उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है यदि निगम को लागत वसूलने के लिए दरों में वृद्धि करनी पड़े।
उपभोक्ता संरक्षण के दृष्टिकोण से, अवैध उपभोग व बिलिंग त्रुटियों को रोकने के लिए डिजिटल बिलिंग और स्मार्ट मीटरिंग का विस्तार अनिवार्य हो गया है। इसके अलावा, समय पर भुगतान के लिए प्रोत्साहन योजनाएँ और विलंब शुल्क में सुधार की आवश्यकता है।

निष्कर्ष
कश्मीर पावर वितरण निगम के ऑडिट से स्पष्ट हुआ कि २०२५‑२०२६ के वित्तीय वर्ष में बिजली बिल व संग्रह के बीच ४१७.१० करोड़ रुपये का बड़ा अंतर रहा। आवासीय व कृषि वर्गों में यह अंतर विशेष रूप से उल्लेखनीय था। इस स्थिति को सुधारने के लिए बिलिंग प्रक्रियाओं में सुधार, अवैध उपभोग पर सख्त कार्रवाई और उपभोक्ताओं को समय पर भुगतान के लिए जागरूक करना आवश्यक है। यदि इन कदमों को शीघ्रता से लागू किया जाए तो बिजली व्यवस्था की वित्तीय स्थिरता और उपभोक्ता संतुष्टि दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है।

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