काकतिया थर्मल पावर प्रोजेक्ट पर बीआरएस नेताओं का विरोध, किसानों की शिकायतें उभरीं
हैनुमाकोंडा – काकतिया थर्मल पावर प्रोजेक्ट (कटीपीपी) में गुरुवार को तनाव का माहौल बना हुआ था जब पुलिस ने जंगनवन के विधायक पल्ला राजेश्वर रेड्डी के नेतृत्व में बीआरएस के एक प्रतिनिधिमंडल को संयंत्र में प्रवेश से रोका। पूर्व मंत्री एररबेली दायक़र राव और सत्यवती राठोड सहित अन्य नेताओं को भी प्रवेश नहीं मिला। पुलिस और बीआरएस नेताओं के बीच झगड़ा और टकराव की घटनाएँ सामने आईं। बाद में, नेताओं ने संयंत्र के बाहर धरणा आयोजित की, जिसके बाद उन्हें अपनी जिम्मेदारी पर प्रवेश की अनुमति मिल गई।
मुख्य घटनाक्रम
- प्रवेश पर रोक: पुलिस ने बीआरएस के प्रतिनिधिमंडल को संयंत्र परिसर में प्रवेश से रोका, जिससे एक छोटी सी झड़प हुई।
- धरणा का आयोजन: संयंत्र के बाहर धरणा के दौरान, नेताओं ने किसानों की शिकायतों को उजागर किया और सरकार से तुरंत कदम उठाने की मांग की।
- प्रवेश की अनुमति: धरणा के बाद, नेताओं को अपनी जिम्मेदारी पर संयंत्र में प्रवेश की अनुमति दी गई, जहाँ उन्होंने निरीक्षण किया और फिर मीडिया से बात की।
किसानों की शिकायतें
बीआरएस के नेताओं ने बताया कि क्षेत्र के किसान बिजली और सिंचाई सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्यों सरकार पर्याप्त पानी के बावजूद किसानों को बिजली और पानी नहीं मुहैया करा रही है। पल्ला राजेश्वर रेड्डी ने बताया कि कटीपीपी को प्रतिदिन लगभग 5,000 टन कोयला चाहिए, परंतु उसे केवल 1,500 टन ही मिल रहा है। इस असंतुलन के कारण पावर जनरेशन पर असर पड़ रहा है।
विशिष्ट मांगें
- कोयले की आपूर्ति बढ़ाएँ: पल्ला राजेश्वर रेड्डी ने कटीपीपी के लिए कोयले की आपूर्ति बढ़ाने की मांग की, ताकि पावर जनरेशन सुचारु रूप से हो सके।
- सिंगरेनी उत्पादन पर स्पष्टता: एररबेली दायक़र राव ने सिंगरेनी उत्पादन में कमी के कारणों पर स्पष्टता माँगी।
- सिंचाई और मोटर मरम्मत: सत्यवती राठोड ने मोटर, नहर और सिंचाई प्रणालियों की तुरंत मरम्मत की मांग की।
- किसानों के लिए व्यापक सहायता: सभी नेताओं ने सरकार से बिजली, सिंचाई, उर्वरक और कल्याण योजनाओं पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
सरकारी प्रतिक्रिया
हालांकि मूल लेख में सरकार की प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है, परंतु यह स्पष्ट है कि बीआरएस के नेताओं ने सरकार से तत्काल कदम उठाने की माँग की है। वे चाहते हैं कि सरकार कोयले की आपूर्ति, सिंचाई सुविधाएँ और बिजली की व्यवस्था में सुधार करे।
प्रभाव और संदर्भ
काकतिया थर्मल पावर प्रोजेक्ट, आंध्र प्रदेश के प्रमुख पावर प्लांट्स में से एक है, जो क्षेत्रीय बिजली आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कोयले की कमी और सिंचाई सुविधाओं की अनुपलब्धता से न केवल पावर जनरेशन पर असर पड़ रहा है, बल्कि किसानों की आजीविका पर भी गहरा असर हो रहा है। बीआरएस के नेताओं की यह मांगें इस बात को रेखांकित करती हैं कि बिजली और पानी की उपलब्धता के बिना कृषि उत्पादन और ग्रामीण विकास संभव नहीं है।
निष्कर्ष
काकतिया थर्मल पावर प्रोजेक्ट पर बीआरएस नेताओं द्वारा आयोजित धरणा और उसके बाद का निरीक्षण यह स्पष्ट करता है कि किसानों की समस्याएँ अभी भी अनसुलझी हैं। कोयले की आपूर्ति, सिंचाई सुविधाएँ और बिजली की व्यवस्था में सुधार की तात्कालिक आवश्यकता है। सरकार को इन मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और किसानों के हित में ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि क्षेत्रीय विकास और ग्रामीण कल्याण सुनिश्चित हो सके।
