पी. चिदंबरम ने कैरैकुड़ी में एसआईआर पर रोक की मांग, 13.3 करोड़ मतदाता वंचित

मुख्य शीर्षक
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने चुनाव आयोग के विशेष तीव्र संशोधन (एसआईआर) पर रोक लगाने की मांग की

परिचय
कैरैकुड़ी, सिवगंगई – 28 सितंबर, 2024 – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने चुनाव आयोग के विशेष तीव्र संशोधन (एसआईआर) के विरुद्ध एक बड़े प्रदर्शन का नेतृत्व किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में लाखों योग्य मतदाताओं को पंजीकरण तालिकाओं से हटा दिया गया है, जिससे उन्हें मतदान का अधिकार वंचित हो रहा है। चिदंबरम ने तत्काल एसआईआर को निलंबित करने और हटाए गए मतदाताओं के नाम पुनः पंजीकरण कराने की मांग की।

मुख्य घटनाक्रम
कैरैकुड़ी में आयोजित कांग्रेस के प्रदर्शन में पार्टी के कार्यकर्ता “वोट चोरी” के नाम से विरोध कर रहे थे। उन्होंने मुख्य आयुक्त ग्यानेश कुमार पर चुनाव आयोग के निर्णयों की आलोचना करते हुए यह दावा किया कि एसआईआर के दौरान 13.3 करोड़ वयस्कों को पंजीकरण तालिकाओं से हटा दिया गया है। प्रदर्शन में स्थानीय लोगों का भारी समर्थन मिला और यह स्पष्ट हुआ कि जनता का चुनाव आयोग के प्रति असंतोष बढ़ रहा है।

इस प्रकार के विरोध अन्य राज्यों में भी देखे गए – उदुपी (कर्नाटक), भोपाल (मध्य प्रदेश), हैदराबाद (तेलंगाना), जम्मू और उत्तर प्रदेश। कांग्रेस ने एसआईआर और आयुक्त के इस्तीफे की मांग को अपनी चुनावी रणनीति का मुख्य हिस्सा बना लिया है।

महत्वपूर्ण जानकारी
चिदंबरम ने बताया कि एसआईआर के दौरान पंजीकरण तालिकाओं से हटाए गए मतदाताओं की संख्या 13.3 करोड़ है। यह आंकड़ा चुनाव आयोग के उपलब्ध आँकड़ों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया जा सका और यह केवल उनकी दावे पर आधारित है।

वहीं, चुनाव आयोग ने बताया कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद दायर अपीलों में से लगभग 91 प्रतिशत में हटाए गए नामों को फिर से पंजीकरण तालिकाओं में शामिल किया गया। चिदंबरम का तर्क है कि यह आँकड़ा राष्ट्रीय स्तर पर लागू नहीं किया जा सकता और कई मतदाता अभी भी अपने नाम पंजीकरण तालिकाओं से हटाए हुए हैं।

चुनाव आयोग ने एसआईआर की वैधता का बचाव करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया को तीनों चुनाव आयुक्तों ने मंजूरी दी है। उन्होंने यह भी बताया कि हटाए गए मतदाताओं के लिए अपील की सुविधा उपलब्ध है।

संबंधित बयान
चिदंबरम ने कहा, “चुनाव आयोग को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। यह एक अवैध बड़े पैमाने पर मतदाता वंचन का मामला है। एसआईआर को निलंबित कर के हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि योग्य मतदाताओं के नाम पुनः पंजीकरण तालिकाओं में शामिल हो जाएँ।”

चुनाव आयोग के प्रवक्ता ने जवाब देते हुए कहा, “एसआईआर का उद्देश्य पंजीकरण तालिकाओं की सटीकता बढ़ाना है। हटाए गए नामों को अपील के माध्यम से पुनः पंजीकरण कराया जा सकता है। हम इस प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाते रहेंगे।”

प्रभाव या संदर्भ
एसआईआर के कारण मतदाता वंचन का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन चुका है। यदि हटाए गए नामों को समय पर पुनः पंजीकरण नहीं कराया गया, तो यह चुनावी परिणामों पर असर डाल सकता है। विशेषकर उन राज्यों में जहाँ कांग्रेस का आधार मजबूत है, यह मुद्दा चुनावी रणनीति पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

इसके अलावा, एसआईआर के विरुद्ध उठ रहे विरोधों से चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि आयोग को मतदाता वंचन के आरोपों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो यह चुनावी प्रक्रिया पर विश्वास को कमजोर कर सकता है।

निष्कर्ष
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम द्वारा कैरैकुड़ी में आयोजित प्रदर्शन ने चुनाव आयोग के विशेष तीव्र संशोधन (एसआईआर) के विरुद्ध सार्वजनिक असंतोष को उजागर किया है। चिदंबरम का दावा है कि लाखों योग्य मतदाताओं को पंजीकरण तालिकाओं से हटाया गया है, जिससे उन्हें मतदान का अधिकार वंचित हो रहा है। चुनाव आयोग ने एसआईआर की वैधता का बचाव किया है, परंतु मतदाता वंचन के आरोपों के बीच यह स्पष्ट है कि इस मुद्दे पर गहन चर्चा और पारदर्शी समाधान की आवश्यकता है। चुनाव आयोग को अपील प्रक्रिया को तेज करने और हटाए गए मतदाताओं के नाम पुनः पंजीकरण तालिकाओं में शामिल करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि लोकतंत्र की मूलभूत धारा – मतदाता अधिकार – सुरक्षित रहे।

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