पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने ISAE सम्मेलन में चार प्रथम पुरस्कार जीते

लुधियाना कृषि विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने राष्ट्रीय सम्मेलन में चार प्रथम पुरस्कार जीते

परिचय
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) के शिक्षकों और शोधकर्ताओं ने 60वें वार्षिक सम्मेलन, भारतीय कृषि इंजीनियरिंग समाज (ISAE) में चार प्रथम पुरस्कार जीत कर अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। यह सम्मेलन शेर‑ए‑कश्मीर विश्वविद्यालय, कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी (SKUAST‑K), श्रीनगर में आयोजित हुआ था।

मुख्य घटनाक्रम
सम्मेलन में जल संसाधन प्रबंधन, मिट्टी संरक्षण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और सटीक सिंचाई के विषयों पर शोध प्रस्तुतियाँ दी गईं। तीन प्रथम पुरस्कार मौखिक प्रस्तुतियों के लिए और एक पोस्टर प्रस्तुति के लिए प्रदान किए गए।

अभिराम यूसुफ का जल विज्ञान पर शोध
सहायक प्रोफ़ेसर अभिराम यूसुफ, मिट्टी और जल इंजीनियरिंग विभाग, ने भूजल और जलधारा हाइड्रोलॉजी पर मौखिक प्रस्तुति के साथ प्रथम पुरस्कार जीता। इस शोध में उन्होंने ‘रिमोट सेंसिंग, GIS और AHP का उपयोग करके पंजाब के लोअर शिलाविक क्षेत्र में वर्षा जल संचयन उपयुक्तता सूचकांक का विकास’ विषय पर कार्य किया। इस शोध में भू-स्थानिक प्रौद्योगिकी और बहु‑मानदंड निर्णय‑निर्माण उपकरणों के माध्यम से वर्षा जल संचयन के उपयुक्त स्थानों की पहचान की गई, जिससे सतत जल प्रबंधन संभव हुआ।

प्रवीण दाहिपले का मिट्टी क्षरण पर शोध
मिट्टी और जल इंजीनियरिंग के वैज्ञानिक प्रवीण दाहिपले ने रिमोट सेंसिंग और भू‑स्थानिक बुद्धिमत्ता श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। उन्होंने ‘गूगल अर्थ इंजन और भू‑स्थानिक प्रौद्योगिकी का उपयोग करके मिट्टी क्षरण का मूल्यांकन’ विषय पर शोध प्रस्तुत किया। इस शोध ने क्लाउड‑आधारित भू‑स्थानिक प्लेटफ़ॉर्म की संभावनाओं को उजागर किया, जिससे मिट्टी क्षरण का सटीक आकलन और संरक्षण योजनाओं में सुधार संभव हुआ।

स्मार्ट सिंचाई और एआई में दो प्रथम पुरस्कार
डॉक्टरेट शोधार्थी आयुषी झा ने ‘कृषि‑कचरा आधारित अपशिष्ट जल उपचार के साथ व्याख्यायित एआई‑चालित सिंचाई जल गुणवत्ता मूल्यांकन’ विषय पर मौखिक प्रस्तुति के साथ प्रथम पुरस्कार जीता। इस शोध में व्याख्यायित एआई को सतत अपशिष्ट जल उपचार तकनीकों के साथ जोड़कर सिंचाई जल गुणवत्ता का बेहतर आकलन किया गया।

डॉक्टरेट शोधार्थी सुखमंदिप कौर ब्रार ने ‘स्मार्ट सिंचाई के लिए ड्रिप‑सिंचित वसंत मक्का में जल तनाव का थर्मल चरित्रांकन’ विषय पर पोस्टर प्रस्तुति के साथ प्रथम पुरस्कार प्राप्त किया। इस शोध में थर्मल सूचकांकों के माध्यम से फसल जल तनाव का पता लगाकर सटीक सिंचाई प्रबंधन में सुधार पर प्रकाश डाला गया।

संबंधित बयान / जानकारी
विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी इस शोधकर्ताओं की वैज्ञानिक उत्कृष्टता और नवाचार के प्रति समर्पण की प्रशंसा करते हुए कहा कि “यह उपलब्धि न केवल हमारी संस्था की प्रतिष्ठा बढ़ाती है, बल्कि भारत के कृषि संसाधन प्रबंधन में प्रौद्योगिकी‑आधारित समाधान के महत्व को भी रेखांकित करती है।”

प्रभाव या संदर्भ
इन शोधों का कृषि क्षेत्र पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। जल संसाधन प्रबंधन, मिट्टी संरक्षण और सटीक सिंचाई में प्रौद्योगिकी‑आधारित दृष्टिकोण से किसानों को अधिक उत्पादन, कम लागत और पर्यावरणीय स्थिरता प्राप्त होगी। एआई‑चालित जल गुणवत्ता मूल्यांकन और थर्मल सूचकांकों के उपयोग से सिंचाई निर्णय अधिक सटीक और समय पर होंगे।

निष्कर्ष
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने राष्ट्रीय मंच पर अपनी वैज्ञानिक क्षमताओं को सिद्ध करते हुए चार प्रथम पुरस्कार जीत कर अपनी संस्था की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। यह उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत मेहनत और नवाचार को दर्शाती है, बल्कि भारत के कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी‑आधारित सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

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