मुख्य शीर्षक
पंजाब कांग्रेस ने अमृतसर में चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की, भाजपा को “पुतला” कहा
परिचय
अमृतसर के कम्पनी बाग में आज पंजाब प्रान्त कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सुकुंदर सिंह डैनी बंडाला के नेतृत्व में पार्टी के कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयुक्त गीतेश्वर कुमार के इस्तीफे की मांग की। यह कदम ‘सिर विवाद’ के बाद कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष का प्रतीक माना जा रहा है।
मुख्य घटनाक्रम
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चुनाव आयुक्त पर आरोप
सुकुंदर सिंह बंडाला ने कहा कि चुनाव आयोग अब भाजपा के हाथों में “पुतला” बन चुका है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को “सही दिशा” के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। -
स्लोगन व जुटान
कम्पनी बाग में हजारों कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “चुनाव आयोग को स्वतंत्र बनाओ” के नारों के साथ जुटे। इस दौरान उन्होंने भाजपा को “सत्ता के खेल में केवल एक सहायक” बताया। -
गोल्डन टेम्पल की यात्रा
अमृतसर और जालंधर के कांग्रेस नेताओं ने गोल्डन टेम्पल का दौरा किया। सांसद गुरजीत सिंह औजला ने 15 विधानसभा क्षेत्रों के नेताओं के साथ मिलकर पार्टी के भीतर किसी भी फूट को नकारते हुए “टीमवर्क” पर बल दिया। -
राहुल गांधी के बस यात्रा की तैयारी
संसद सदस्य ने वीडियो में बताया कि “अमृतसर, जालंधर और तर्न तारण के वरिष्ठ कांग्रेस नेता सभी एकजुट हैं” और “राहुल गांधी की बस यात्रा के लिए तैयारियाँ चल रही हैं।” -
साथी नेता
गोल्डन टेम्पल की यात्रा में पूर्व उपमुख्यमंत्री ओम प्रकाश सोनी और पूर्व विधायक सुनील दत्त भी साथ थे।
महत्वपूर्ण जानकारी
- पंजाब कांग्रेस के भीतर राज्य अध्यक्ष अमरिंदर सिंह रजावारिंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच लगातार मतभेद चल रहे हैं।
- सितंबर की शुरुआत में कांग्रेस के उच्च कमांड ने साक्षिन पायलट को पंजाब के इंचार्ज के रूप में नियुक्त किया, जिससे भूपेश बघेल की जगह ली गई।
- पायलट के आगमन के बाद रजावारिंग, चन्नी और सुकुंदर सिंह रंधावा ने लगभग दो हफ्ते पहले आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में एक ही मंच साझा किया।
संबंधित बयान
सुकुंदर सिंह बंडाला ने कहा, “चुनाव आयोग को स्वतंत्र और निष्पक्ष बनाना हमारा कर्तव्य है। भाजपा को अब पुतले के रूप में देखना अस्वीकार्य है।”
संसद सदस्य गुरजीत सिंह औजला ने स्पष्ट किया, “हमारा दल एकजुट है। किसी भी फूट की बात पूरी तरह असत्य है।”
प्रभाव और संदर्भ
- चुनाव आयोग पर भाजपा के प्रभाव के आरोप से राजनीतिक माहौल में तनाव बढ़ा है।
- कांग्रेस के भीतर के विभाजन को उजागर करते हुए यह घटना पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठाती है।
- राहुल गांधी की बस यात्रा की योजनाएँ, यदि सफल हुईं, तो कांग्रेस के लिए एक नया प्रचार मोर्चा बन सकती हैं।
निष्कर्ष
अमृतसर में आज की यह बैठक पंजाब कांग्रेस के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। चुनाव आयोग पर भाजपा के नियंत्रण के आरोप और पार्टी के भीतर के विभाजन को उजागर करते हुए, कांग्रेस ने अपनी एकजुटता और स्वतंत्रता के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई। यदि चुनाव आयुक्त गीतेश्वर कुमार का इस्तीफा नहीं होता, तो यह घटना राजनीतिक परिदृश्य में एक नया अध्याय खोल सकती है। पंजाब कांग्रेस की इस नई दिशा को समय ही बताएगा कि क्या यह पार्टी को फिर से एकजुट कर सकती है और आगामी चुनावों में सफलता दिला सकती है।
