रामप्पा मंदिर के पुनर्निर्माण हेतु मृदा परीक्षण पूर्ण, नींव की स्थिरता पर पुष्टि

रामप्पा मंदिर के पुनर्निर्माण हेतु मृदा परीक्षण पूरा हुआ

परिचय
मुलुगा जिले के पालम्पेट गाँव में स्थित रामप्पा मंदिर के कमेश्वरालय में, भारत पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के हैदराबाद सर्कल ने भू-तकनीकी जाँच पूरी की है। यह जाँच मंदिर के ढीले पड़े ढाँचों को फिर से जोड़ने से पहले नींव की स्थिरता का आकलन करने के लिये की गई थी।

मुख्य घटनाक्रम
ASI के तकनीकी दल ने MTLS इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड और निट वारंगल के सेवानिवृत्त वरिष्ठ भू-तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर कार्य किया। नई बनी नींव पर प्लेट लोड टेस्ट IS‑1888 व IS‑2720 मानकों के अनुसार किये गये। इसके साथ ही, निर्धारित स्थानों से बिना बाधित मृदा नमूने भी लिये गये, ताकि जमीन की अवस्था व नींव की उपयुक्तता का मूल्यांकन किया जा सके।

महत्वपूर्ण जानकारी
– नींव कार्य का कुल खर्च ₹2.89 करोड़ रहा।
– सुपर‑स्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण हेतु ₹6.89 करोड़ के टेंडर पर अनुमोदन प्रक्रिया चल रही है।
– जाँच के परिणामों से नींव के प्रदर्शन का तकनीकी विश्लेषण संभव होगा, जो अगले चरण के कार्यों के लिये मार्गदर्शक सिद्ध होगा।

संबंधित बयान
ASI के हैदराबाद सर्कल के प्रमुख ने कहा, “हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मंदिर की नई संरचना सुरक्षित और स्थायी हो। भू-तकनीकी परीक्षण से हमें यह पता चलेगा कि नींव कितनी मजबूती से सहारा दे सकती है।”

MTLS इंजीनियर्स के प्रबंधक ने जोड़ा, “हमने परीक्षणों को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप किया है, जिससे हमें विश्वास है कि पुनर्निर्माण के दौरान कोई संरचनात्मक जोखिम नहीं रहेगा।”

प्रभाव या संदर्भ
रामप्पा मंदिर, जो 1190 के दशक में बनाया गया था, अपनी अनूठी वास्तुकला व कलात्मक नक्काशी के लिये प्रसिद्ध है। इसकी पुनर्स्थापना से न केवल सांस्कृतिक धरोहर सुरक्षित रहेगी, बल्कि पर्यटकों के लिये भी आकर्षण बढ़ेगा।

भू-तकनीकी जाँच के बाद, यदि नींव को पर्याप्त माना गया तो पुनर्निर्माण कार्य शीघ्र ही आरम्भ हो सकता है। इसके लिये ₹6.89 करोड़ के टेंडर पर अनुमोदन की प्रतीक्षा है।

निष्कर्ष
मुलुगा के पालम्पेट में रामप्पा मंदिर के कमेश्वरालय पर ASI द्वारा की गई भू-तकनीकी जाँच ने नींव की स्थिरता का स्पष्ट आकलन किया है। नई नींव के निर्माण में ₹2.89 करोड़ का निवेश हो चुका है, और अब सुपर‑स्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण हेतु ₹6.89 करोड़ के टेंडर पर निर्णय लंबित है। यह कार्य, यदि अनुमोदित हुआ, तो प्राचीन मंदिर की पुनर्स्थापना के अगले चरण को गति देगा और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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