रुपया खुला 94.87 पर, RBI की हस्तक्षेप ने कच्चे तेल के दबाव को कम किया
परिचय
रुपया आज सुबह 19 अक्टूबर को 94.87 पर खुला, जो 9 पाइस की बढ़ोतरी के साथ हुआ। यह दर 95 के करीब है, जिसे व्यापारियों ने RBI की “सॉफ्ट डिफेंस लाइन” माना है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इस मामूली सुधार के पीछे रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया की सक्रिय हस्तक्षेप और कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट का योगदान रहा।
मुख्य घटनाक्रम
रुपया के 95 के आसपास घूमने की स्थिति में, RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में बार-बार डॉलर बेचकर मुद्रा को स्थिर रखने का प्रयास किया। यह कदम उस समय आया जब कच्चे तेल की कीमतें ऊँची थीं, जिससे रुपया पर दबाव बढ़ रहा था। पिछले सप्ताह, रुपया ने लगभग चार वर्षों में सबसे अच्छा साप्ताहिक प्रदर्शन किया था, जो RBI के समर्थन और स्पॉट मार्केट में हस्तक्षेप के कारण संभव हुआ।
रुपया के समर्थन के लिए RBI ने अपनी हस्तक्षेप को बढ़ाया है। केंद्रीय बैंक ने विदेशी मुद्रा भंडार में 60 बिलियन डॉलर की गिरावट के बावजूद, 726 बिलियन डॉलर के स्तर पर अपनी रक्षा जारी रखी है। यह भंडार सितंबर की पहली सप्ताह में अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर से घटकर आया है, जैसा कि Reuters ने बताया।
कच्चा तेल अभी भी रुपया के लिए प्रमुख दबाव का स्रोत है। ब्रेंट क्रूड ने शुक्रवार को पहली बार मई के बाद $110 प्रति बैरल से ऊपर उठकर फिर सोमवार को लगभग $108 पर स्थिर हो गया। यह उछाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस पर नई प्रतिबंधों को माफ करने और रूसी माल पर टैरिफ हटाने के बाद हुआ, जिससे रूसी ईंधन निर्यात में वृद्धि की संभावना बनी।
विश्लेषकों और निवेशकों के बीच यह सर्वसम्मति है कि RBI की सहायता केवल तब तक ही प्रभावी रहेगी जब तक तेल की कीमतें घटती नहीं हैं।
महत्वपूर्ण जानकारी
– रुपया की दर: 94.87 (पहले 94.78)
– रुपया का लक्ष्य: 95 के आसपास, जिसे RBI की सॉफ्ट डिफेंस लाइन माना जाता है।
– रिज़र्व बैंक की हस्तक्षेप: डॉलर बिक्री के माध्यम से मुद्रा को समर्थन।
– विदेशी मुद्रा भंडार: 726 बिलियन डॉलर (पहले 786 बिलियन डॉलर)।
– कच्चे तेल की कीमतें: ब्रेंट क्रूड $108 पर स्थिर।
– अन्य एशियाई मुद्राएँ:
– कोरियाई वोन: 1,329.32 प्रति डॉलर (लाभ)
– जापानी येन: 157.93 प्रति डॉलर (स्थिर)
– चीनी युआन: 6.68 प्रति डॉलर (स्थिर)
– ताइवान डॉलर: 32.50 प्रति डॉलर (0.2% गिरावट)
– फिलीपींस पेसो: 63.07 प्रति डॉलर (0.1% गिरावट)
– थाई बात: 33.45 प्रति डॉलर (0.09% गिरावट)
संबंधित बयान / जानकारी
रुपया के समर्थन के बावजूद, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और अमेरिकी फेडरल रिज़र्व तथा बैंक ऑफ़ जापान की मौद्रिक नीति निर्णयों के प्रति निवेशक सतर्क रहे। एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट के कारण ट्रेडिंग में जोखिम लेने से परहेज़ किया गया।
चीन की अर्थव्यवस्था ने जुलाई‑सितंबर तिमाही में 4.5% वार्षिक वृद्धि दर्ज की, जो 4.4% के अनुमान से बेहतर रही। यह आंकड़ा राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो द्वारा जारी किया गया।
प्रभाव या संदर्भ
रुपया की हल्की प्रशंसा से भारतीय निवेशकों और आयातकों को कुछ राहत मिली है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट से आयात लागत कम हो सकती है। हालांकि, यदि तेल की कीमतें फिर से बढ़ती हैं, तो रुपया पर दबाव फिर से बढ़ सकता है। RBI की हस्तक्षेप की सीमाएँ स्पष्ट हैं, और केंद्रीय बैंक को आगे भी सक्रिय रहना पड़ेगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एशियाई मुद्राएँ कमजोर रही, जो वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता को दर्शाती है।
निष्कर्ष
रुपया ने 94.87 पर खुलकर 95 के करीब आने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाया, जो RBI की सक्रिय हस्तक्षेप और कच्चे तेल की कीमतों में हल्की गिरावट का परिणाम है। विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट के बावजूद, केंद्रीय बैंक ने अपनी रक्षा जारी रखी है। भविष्य में, रुपया की स्थिरता तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को सतर्क रहकर, जोखिम प्रबंधन पर ध्यान देना चाहिए।
