संबलपुर में 75 वर्षीय महिला को पेंशन से वंचित, मृत घोषित की त्रुटि पर अपील

संबलपुर में 75‑वर्षीय महिला को मृत घोषित कर पेंशन से वंचित, अब फिर से जीवित होने की दावेदारी

परिचय
संबलपुर के मोतीझरान क्षेत्र की 75‑वर्षीय निवासी बेलामती भुयान को दो‑साल से लगातार पेंशन से वंचित रखा गया है, जबकि आधिकारिक रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है। इस अजीब प्रशासनिक त्रुटि के कारण वह और उनकी भतीजी को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्य घटनाक्रम
बेलामती भुयान ने अपने जीवन के सबसे कठिन समय में, 2024 में अस्पताल में भर्ती होने के बाद, पेंशन लेने के लिए नगर निगम के कार्यालय में गईं। वहाँ उन्हें बताया गया कि उनके नाम पर पेंशन जारी नहीं हो सकती क्योंकि उनके रिकॉर्ड में उन्हें मृत घोषित किया गया है। इसके बाद उन्होंने बार‑बार अधिकारियों से संपर्क किया, यह साबित करने के लिए कि वे जीवित हैं, परंतु उनके प्रयासों को अनदेखा कर दिया गया।

लगभग पाँच महीने बाद, उन्होंने पेंशन के नए आवेदन के लिए जिला प्रशासन में दायर किया, परंतु वही पंजीकरण उनके मृत घोषित स्थिति को दर्शाता रहा, जिससे आवेदन अस्वीकृत हो गया।

महत्वपूर्ण जानकारी
– नाम और आयु: बेलामती भुयान, 75 वर्ष
– स्थान: मोतीझरान, संबलपुर
– पेंशन: विधवा पेंशन, दो‑साल से रोकी गई
– परिवार: उनकी भतीजी, दोनों आर्थिक रूप से कमजोर, केवल राशन कार्ड से चावल प्राप्त करती हैं
– अभियोग: प्रशासनिक त्रुटि, सत्यापन प्रक्रिया में कमी

संबंधित बयान / जानकारी
बेलामती भुयान ने संबलपुर जिला प्रशासन और नगर निगम के आयुक्त को लिखित निवेदन भेजा, जिसमें उन्होंने कहा, “मैं जीवित हूँ, आप मेरे घर आकर पड़ोसियों से पुष्टि कर सकते हैं। परंतु आपने मुझे दो‑साल से मृत घोषित किया है और पेंशन नहीं दी है।”

उन्होंने यह भी बताया कि उनके पति कुछ वर्ष पहले ही घर छोड़ चुके थे और बाद में ही पता चला कि वे गुजर चुके हैं। दंपति के कोई बच्चे नहीं थे, इसलिए वे अपनी भतीजी पर निर्भर हैं।

प्रभाव या संदर्भ
इस घटना से सामाजिक सुरक्षा पेंशन के लाभार्थियों के सत्यापन और शिकायत निवारण प्रक्रियाओं पर सवाल उठे हैं। विशेष रूप से बुजुर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए पेंशन एक महत्वपूर्ण आय स्रोत है। यदि प्रशासनिक त्रुटि के कारण पेंशन रोकी जाती है, तो उनकी जीवन यापन पर सीधे असर पड़ता है।

संबलपुर के अन्य वरिष्ठ नागरिकों ने भी इस मामले को लेकर चिंता जताई है, और कहा है कि ऐसी त्रुटियों को रोकने के लिए पेंशन रिकॉर्ड की नियमित जाँच और अद्यतन आवश्यक है।

अंतिम निष्कर्ष
बेलामती भुयान का मामला यह दर्शाता है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में त्रुटियाँ कितनी गंभीर परिणाम ला सकती हैं। उनके द्वारा पेंशन के पुनः आरम्भ के लिए की गई अपील अभी तक संतोषजनक उत्तर नहीं पाई है। यह स्पष्ट है कि संबलपुर जिला प्रशासन और नगर निगम को तुरंत हस्तक्षेप कर पेंशन को पुनः शुरू करना चाहिए और पंजीकरण में हुई गलती को सुधारना चाहिए।

सभी संबंधित अधिकारियों से अपील है कि वे इस मामले को प्राथमिकता दें और सुनिश्चित करें कि कोई भी वरिष्ठ नागरिक बिना वैध कारण के पेंशन से वंचित न रहे। इस प्रकार के प्रशासनिक सुधार से न केवल व्यक्तिगत जीवन की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि समाज में विश्वास और विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।

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