अमेरिका व ईयू ने यूएन की महामारी रोकथाम योजना को अस्वीकार किया, वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा पर प्रश्नचिन्ह

अमेरिका, यूरोपीय संघ ने यूएन की महामारी रोकथाम योजना को अस्वीकार किया

परिचय
27 सितंबर को न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र महासभा की दूसरी उच्च‑स्तरीय बैठक में महामारी रोकथाम, तैयारी और प्रतिक्रिया पर एक घोषणा पर चर्चा हुई। इस दस्तावेज़ को वैश्विक स्तर पर भविष्य की महामारियों से निपटने के लिए एक ढाँचा बनाने हेतु तैयार किया गया था। परंतु संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ ने इस घोषणा को अस्वीकार कर दिया, जबकि भारत व जर्मनी ने आरक्षण जताते हुए विरोध नहीं किया।

मुख्य घटनाक्रम
यह घोषणा, जिसे कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं माना गया है, सरकारों के स्वास्थ्य आपात स्थितियों में कैसे कार्य करना चाहिए, इस पर कोई निर्देश नहीं देती। इसके बावजूद, इस दस्तावेज़ में राष्ट्रीय तैयारी योजनाएँ, रोग निगरानी, शीघ्र पहचान, टीकाकरण, स्वास्थ्य कर्मी और मानव‑पशु‑पर्यावरण स्वास्थ्य के एकीकृत दृष्टिकोण जैसी उपयोगी धाराएँ शामिल थीं।

अमेरिका ने घोषणा में मौजूद “विभाजनकारी विचारधाराएँ” और “परिभाषात्मक सहमति की कमी” को प्रमुख कारण बताया। यूएस सेंटर फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के निदेशक एरिका श्वार्ट्ज ने कहा कि यह दस्तावेज़ अभी भी “अनस्वीकार्य भाषा” रखता है। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रम्प प्रशासन ने वार्ताओं के दौरान समानता, एकजुटता, यौन व प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएँ, लैंगिक समानता, टीका पहुँच और अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण जैसे विषयों को हटाने की माँग की थी।

यूरोपीय संघ ने मुख्यतः बौद्धिक संपदा संरक्षण, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और महामारी तैयारी के लिए प्रस्तावित वित्तीय प्रतिबद्धताओं पर आपत्ति जताई। ईयू ने कहा कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण “स्वैच्छिक और परस्पर सहमत शर्तों पर” होना चाहिए। इसके अलावा, विश्व व्यापार संगठन के बौद्धिक संपदा समझौते और दोहा घोषणा के संदर्भों को मूल पाठ के अनुरूप होना चाहिए।

ईयू ने यह भी बताया कि दस्तावेज़ में वैश्विक वित्तीय अंतराल के पुराने अनुमान और महामारी तैयारी खर्च को ट्रैक करने के लिए किसी विश्वव्यापी तंत्र का अभाव है। इसके बावजूद, ईयू ने घोषणा के कुछ हिस्सों को “उपयोगी” माना, विशेषकर राष्ट्रीय तैयारी योजनाएँ, रोग निगरानी और एकीकृत स्वास्थ्य दृष्टिकोण।

भारत व जर्मनी ने घोषणा के कुछ भागों पर आरक्षण जताया, परंतु पूरी तरह से अस्वीकार नहीं किया। भारतीय पक्ष ने विशिष्ट आपत्तियों का विवरण नहीं दिया, जबकि जर्मन पक्ष ने भी दस्तावेज़ के कुछ पहलुओं पर चिंता व्यक्त की।

संबंधित बयान
विश्व स्वास्थ्य संगठन के निदेशक‑जनरल टेड्रोस अदानोम गेब्रेयेसुस ने कहा कि कोविड‑19 महामारी ने वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा की खामियों को उजागर किया और दुनिया को कई दर्दनाक सबक सिखाए। उन्होंने अधिक कार्रवाई और निवेश की माँग की।

प्रभाव या संदर्भ
अमेरिका व ईयू का अस्वीकार वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के ढाँचे को आगे बढ़ाने में एक बाधा के रूप में देखा जा रहा है। इस दस्तावेज़ के बिना, भविष्य की महामारियों के प्रति समन्वित प्रतिक्रिया के लिए एक स्पष्ट अंतरराष्ट्रीय मानक नहीं बनेगा। इसके अलावा, बौद्धिक संपदा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर विवाद, वैश्विक टीका एवं दवा उत्पादन के लिए आवश्यक सहयोग को जटिल बना सकते हैं।

अंतिम निष्कर्ष
यह घोषणा अब आगे की समीक्षा के लिए महासभा को भेजी जाएगी। वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबद्धता के बावजूद, अमेरिका व यूरोपीय संघ की आपत्तियों के कारण इस दस्तावेज़ का कार्यान्वयन विलंबित हो सकता है। भविष्य की महामारियों के लिए तैयार रहने हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए सभी पक्षों को रचनात्मक संवाद और समझौते की दिशा में कदम बढ़ाने की आवश्यकता है।

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