कांकर में स्व‑घोषित चिकित्सक पर 14‑वर्षीय आदिवासी लड़की के बलात्कार एवं गर्भधारण के आरोप में गिरफ्तार
परिचय
छत्तीसगढ़ के कांकर जिले में एक स्व‑घोषित चिकित्सक, रमेश कुमार पिस्डा, को 14‑वर्षीय आदिवासी लड़की के बलात्कार और गर्भधारण के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह घटना तब सामने आई जब लड़की, जो एक प्री‑मैट्रिक आदिवासी लड़की के हॉस्टल में रह रही थी, का चिकित्सकीय जांच में पता चला कि वह पाँच महीने गर्भवती है। पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की और जिला स्तर पर जांच समिति गठित की है।
घटनाक्रम
– 15 अप्रैल: लड़की के पिता ने अपनी बेटी को पिस्डा के पास उपचार के लिये भेजा। पिस्डा ने दावा किया कि लड़की के गर्भाशय में समस्या है और उसे उपचार की आवश्यकता है।
– 25 मई: लड़की को पिस्डा के घर भेजा गया, जहाँ उसे एक प्रार्थना कक्ष में ले जाया गया। पिस्डा ने लड़की को शराबी द्रव्यों से नशे में डाला और उसे कई बार यौन शोषण किया।
– 17 अक्टूबर: लड़की के माता-पिता ने उसे अंटागढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ले गए, जहाँ चिकित्सकीय जांच में पता चला कि वह पाँच महीने गर्भवती है। यह जानकारी मिलने पर मामला तुरंत पुलिस के ध्यान में आया।
महत्वपूर्ण जानकारी
– गिरफ्तारी: 44‑वर्षीय पिस्डा को सोमवार को गिरफ्तार किया गया।
– कानूनी कार्रवाई: इस मामले में भारतीय दण्ड संहिता के धारा 64(1), 64(2)(m) और 65(1) के तहत तथा बाल संरक्षण अधिनियम (POCSO) की धारा 4 और 6 के तहत केस दर्ज किया गया है।
– पुलिस कार्यवाही: अंटागढ़ पुलिस स्टेशन में ज़ीरो FIR दर्ज की गई, जिसे बाद में तडोकी पुलिस स्टेशन को सौंपा गया। जिला प्रशासन ने इस मामले की जाँच के लिए जिला‑स्तरीय समिति गठित की है।
संबंधित बयान
– अनीकेट अशोक फादतारे, भानुप्रतापपुर उप-आयुक्त ने कहा, “यह मामला हमें यह याद दिलाता है कि हमें अपने समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए। हम इस पर पूरी तरह से जांच करेंगे और दोषियों को कड़ी सजा देंगे।”
– पुलिस अधिकारी ने बताया कि पिस्डा ने लड़की के पिता को यह विश्वास दिलाया कि उसकी बेटी का गर्भाशय में समस्या है, जिससे वह उपचार के लिए पिस्डा के पास आई। पिस्डा ने उसे एक ताबीज भी दिया, जिसे उसने उपचार के रूप में पेश किया।
प्रभाव या संदर्भ
यह घटना आदिवासी समाज में विश्वास और शोषण के बीच के नाज़ुक संतुलन को उजागर करती है। स्व‑घोषित चिकित्सकों पर भरोसा रखने वाले लोग अक्सर उनके दुरुपयोग के शिकार बनते हैं। इस मामले के खुलासे से यह स्पष्ट होता है कि समाज को ऐसे व्यक्तियों के प्रति सतर्क रहना चाहिए और किसी भी प्रकार के शोषण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
निष्कर्ष
कांकर जिले में स्व‑घोषित चिकित्सक पर 14‑वर्षीय लड़की के बलात्कार और गर्भधारण के आरोप में गिरफ्तारी ने समाज में शोषण के प्रति जागरूकता बढ़ा दी है। पुलिस और प्रशासन द्वारा तत्काल कार्रवाई और जांच समिति के गठन से यह स्पष्ट होता है कि ऐसे मामलों में क़ानूनी व्यवस्था को सख़्ती से लागू किया जाएगा। यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि हमें अपने समाज के नाज़ुक वर्गों की रक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग के खिलाफ आवाज़ उठानी चाहिए।
