मंगळरुपीर तालुका में दुग्ध किसानों पर फीड संकट: आर्थिक संकट की दहलीज़ पर

शीर्षक
मंगळरुपीर तालुका में दुग्ध किसानों पर फीड संकट का गंभीर प्रभाव

परिचय
मध्य भारत के मंगळरुपीर तालुका में दुग्ध उत्पादन पर गहरा असर डालते हुए फीड और पानी की कमी ने किसानों को आर्थिक संकट की दहलीज़ पर पहुँचाया है। ट्यूबवेल के सूखने और कच्चे फीड के बढ़ते दामों के कारण दूध उत्पादन घट रहा है, जिससे किसान अपनी जीविका और निवेश दोनों खोने के कगार पर हैं।

मुख्य घटनाक्रम
पानी की कमी के साथ, एक परिपक्व भैंस को रोज़ाना 60 से 70 लीटर साफ पानी और 5–6 किलोग्राम उच्च प्रोटीन वाले कपास के बीज के केक की आवश्यकता होती है। परंतु तालुका के ट्यूबवेल और भंडारण टैंकों के सूखने से यह मूलभूत स्रोत पूरी तरह समाप्त हो गया है। निजी टैंकरों के माध्यम से पानी लाना अब भारी लॉजिस्टिक बोझ और लगातार नकद खर्च का कारण बन रहा है, जो दूध की रोज़ाना बिक्री से अधिक हो रहा है। पर्याप्त हाइड्रेशन और संतुलित आहार के अभाव में पशु स्वास्थ्य तेजी से बिगड़ रहा है, जिससे दूध उत्पादन निचले स्तर पर गिर रहा है।

महत्वपूर्ण जानकारी
कृषि के दोहरे विफलता के कारण मध्य भारत में फीड बाज़ार पर गहरा प्रभाव पड़ा है। खरिफ़ मौसम में वर्षा की कमी से चराई की उपज घट गई, जबकि रबी ज्वार की फसल की विफलता से मोटे अनाज के अवशेष का भंडार समाप्त हो गया। ज्वार के अवशेष स्थानीय दुग्ध फीड का मुख्य फाइबर स्रोत हैं, और उनकी कमी से खुला बाज़ार में फीड के दाम आसमान पर पहुँच गए। साथ ही, केंद्रित फीड और कपास के बीज के केक के दामों में भी तेज़ी से वृद्धि हुई है, जिससे लागत संरचना अस्थिर हो गई है और किसान सकारात्मक नकदी प्रवाह उत्पन्न नहीं कर पा रहे हैं।

संबंधित बयान / जानकारी
इस बढ़ते नुकसान के जवाब में, प्रभावित किसान पशु पालन विभाग से राज्य सरकार के त्वरित हस्तक्षेप की माँग कर रहे हैं। पशु कल्याण संगठनों ने चेतावनी दी है कि बिना सब्सिडी वाले फीड वितरण या आपातकालीन फीड बैंक के, व्यावसायिक दुग्ध उद्यम स्थायी रूप से बंद हो सकते हैं। किसानों के बीच यह भी चिंता है कि उच्च उत्पादन वाली भैंसों का बाजार मूल्य 1.25 लाख से 1.5 लाख रुपये के बीच है, परंतु संकट के समय में उन्हें छूट पर बेचना पड़ रहा है, जिससे उनकी पूंजी और उद्यम मूल्य पूरी तरह नष्ट हो रहा है।

प्रभाव या संदर्भ
इस फीड संकट के कारण ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों को तेज़ी से पूंजी विनाश और अनैच्छिक संपत्ति बिक्री का सामना करना पड़ रहा है। 50 भैंसों के एक स्थापित झुंड को संकट की स्थिति में बेचने से किसानों को कम मूल्य पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिससे उनकी जमा हुई पूंजी समाप्त हो जाती है। इसके अलावा, पानी की कमी और फीड के दामों में वृद्धि से दूध की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में गिरावट आई है, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ा है। यदि सरकार समय पर हस्तक्षेप नहीं करती, तो यह संकट क्षेत्रीय दुग्ध उद्योग के लिए दीर्घकालिक खतरा बन सकता है।

अंतिम निष्कर्ष
मंगळरुपीर तालुका में फीड और पानी की कमी ने दुग्ध किसानों को आर्थिक संकट के कगार पर ला दिया है। ट्यूबवेल के सूखने, फीड के दामों में तेज़ी से वृद्धि और किसानों के निवेश पर नकारात्मक प्रभाव के कारण, राज्य सरकार को तुरंत सब्सिडी, फीड बैंक और आपातकालीन पानी आपूर्ति के उपाय अपनाने की आवश्यकता है। केवल तभी यह क्षेत्रीय दुग्ध उद्योग अपनी स्थिरता और किसानों की जीविका को सुरक्षित रख सकता है।

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