प्रधानमंत्री मोदी ने फ्लाईडुबाई कप्तान स्मिट माच्छर को सम्मानित किया, कहा ‘इंडियंस ज़िंदगियाँ बचाने को तैयार’

प्रधानमंत्री मोदी ने फ्लाईडुबाई के कप्तान स्मिट माच्छर को दिया सम्मान, कहा “इंडियंस ज़िंदगियाँ बचाने को तैयार”

परिचय
नई दिल्ली – २ अक्टूबर २०२३ को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्लाईडुबाई के कप्तान स्मिट माच्छर से संवाद किया और उनके साहस, विवेक और संयम की प्रशंसा की। इस बातचीत में प्रधानमंत्री ने यह स्पष्ट किया कि भारतीय लोग जीवन लेने के बजाय दूसरों की जान बचाने के लिए अपने जीवन को जोखिम में डालते हैं।

मुख्य घटनाक्रम
प्रधानमंत्री ने सबसे पहले कप्तान के स्वास्थ्य के बारे में पूछताछ की और बताया कि पूरे देश की प्रार्थनाएँ उनके शीघ्र स्वस्थ होने के लिए हैं। उन्होंने कहा, “आपका साहस, विवेक और संयम ने कई लोगों की जान बचाई। भारत गर्व से कह सकता है कि हम जीवन लेने वाले नहीं, बल्कि जीवन बचाने वाले हैं।”

कप्तान स्मिट माच्छर ने विनम्रता से “हाँ, सर” उत्तर दिया। प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “आप अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहे थे, परंतु उसी क्षण आपने अपने जीवन की परवाह नहीं की, बल्कि सभी लोगों की जान बचाने का प्रयास किया।”

महत्वपूर्ण जानकारी
कप्तान स्मिट माच्छर के पास विमानन में १७ वर्ष का अनुभव है, जिसमें से ११ वर्ष कैप्टन के रूप में बिताए। उन्होंने बताया कि दुर्घटना के समय उन्होंने महसूस किया कि विमान गिर रहा है और उन्होंने आख़िरी बार दरवाज़ा खोलकर यात्रियों को बाहर निकलने का मार्ग प्रशस्त किया। इस कार्य से कई लोगों की जान बची।

कप्तान ने बताया कि “मैं अपने जीवन के लिए संघर्ष कर रहा था, परंतु मैंने नहीं सोचा कि अगर मैं कुछ नहीं करूँ तो लोग मर सकते हैं। ११ वर्षों का अनुभव और १७ वर्षों का विमानन ज्ञान मुझे स्थिति को समझने में मददगार रहा।”

संबंधित बयान
प्रधानमंत्री ने कप्तान की माँ, गीता बेन के प्रति आभार व्यक्त किया, यह कहते हुए कि “गीता बेन ने अपने बेटे में गीता के मूल्यों को स्थापित किया है।”

कप्तान ने अपनी आस्था के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि “जब भी मुझे सकारात्मक ऊर्जा की आवश्यकता होती है या दर्द महसूस होता है, मैं हनुमान चालीसा का पाठ करता हूँ।” इस दौरान कप्तान भावुक हो गए और आँसू बहा दिए। प्रधानमंत्री ने उन्हें सांत्वना दी और कहा, “आप क्यों रो रहे हैं? पूरा देश आपसे बात करना चाहता है। जब आपने हनुमान चालीसा का उल्लेख किया, तो मैं गीता बेन का आभारी हूँ।”

कप्तान ने यह भी बताया कि वह अपने दो वर्ष के बेटे को अपनी गोद में रखकर हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, ताकि वह अपनी संस्कृति से जुड़ा रहे, भले ही वह विदेश में हों। प्रधानमंत्री ने इस बात से सहमति जताई।

प्रभाव या संदर्भ
पूरे देश में कप्तान स्मिट माच्छर के लिए प्रार्थनाएँ, पूजा और आरती का आयोजन हो रहा है। प्रधानमंत्री ने उन्हें “वीर पुरुष” कहा और कहा कि “सभी देशवासियों का मन इस बात पर है कि वे शीघ्र स्वस्थ हों।”

कप्तान ने यह स्पष्ट किया कि वह अपने कार्य को केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि एक यात्रा के रूप में देखते हैं और आशा व्यक्त की कि वह जल्द ही स्वस्थ हो जाएंगे।

निष्कर्ष
प्रधानमंत्री ने कप्तान स्मिट माच्छर को शीघ्र स्वस्थ होने की शुभकामनाएँ दीं और उनकी बहादुरी पर बधाई दी। उन्होंने यह भी कहा कि “आज गांधी जयंती है और आपने अहिंसा के सिद्धांत को प्रमाणित किया है।”

इस संवाद के दौरान प्रधानमंत्री ने कप्तान से गुजराती में भी बात की, जिससे संवाद और भी गर्मजोशी से भरा हुआ रहा।

इस घटना से स्पष्ट होता है कि भारतीय नागरिकों का साहस और परोपकारिता उन्हें विश्व के सबसे सम्मानित नागरिकों में से एक बनाती है।

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