पंजाब विधान सभा का पहला सत्र: 10 मिनट में समाप्त, विपक्ष ने सरकार पर तीखी आलोचना की

पंजाब विधान सभा का पहला दिन: 10 मिनट में समाप्त, विपक्ष को मिली नई आलोचना

परिचय
पंजाब की विधान सभा का उद्घाटन सत्र मात्र दस मिनट तक चला, परंतु इस संक्षिप्त समय में भारतीय जनता पार्टी व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी सरकार पर कड़ी आलोचना की। मुख्य मुद्दे थे – अवैध दवा व्यापार, कानून व्यवस्था का बिगड़ना और दवा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या।

मुख्य घटनाक्रम
सत्र की शुरुआत के तुरंत बाद ही विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाना शुरू कर दिया। भारतीय जनता पार्टी के नेता, पूर्व पंजाब BJP अध्यक्ष सुनील जखर और MLA अश्विनी शर्मा, शराब माफिया द्वारा मारे गए युवा अजय कुमार के परिवार के साथ विधानसभा परिसर पहुँचे। माँ मंजू और बहन सिमरनजित कौर ने दवा व्यापारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की मांग करते हुए दहन के लिए तैयार नहीं होने का दावा किया।

वहीं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेता, विपक्षी नेता भागत सिंह बाज़वा और पार्टी अध्यक्ष पर्गत सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के एक प्रतिमा को जलाया। उन्होंने सरकार पर दवा व्यापार को नियंत्रित न कर पाने और कानून व्यवस्था बनाए रखने में असफल रहने का आरोप लगाया।

विधानसभा की अध्यक्षता करने वाले स्पीकर कलतर सिंह सैंडवाने ने सत्र के दौरान “मृत्यु” के संदर्भ में शोक व्यक्त किया और तुरंत घोषणा की कि सत्र शुक्रवार तक स्थगित रहेगा। मुख्यमंत्री मान की अनुपस्थिति में विपक्ष के आरोपों का कोई जवाब नहीं मिला, जिससे सरकार पर जवाबदेही से बचने का आरोप लगा।

विपक्षी बयान
पर्गत सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा, “सरकार ने सत्र को काट दिया ताकि जवाबदेही से बचा जा सके। यह सरकार की जवाबदेही के प्रति भय को दर्शाता है।” उन्होंने यह भी बताया कि सरकार को झोटा की हत्या के मामले में जवाबदेही से बचने के लिए सत्र को काटना पड़ा।

सुनील जखर ने वादा किया कि वे शराब माफिया के खिलाफ मामला दर्ज होने तक विधानसभा परिसर के बाहर ही लोगों को दिखाएँगे। उन्होंने माँ और बहन के साथ मिलकर दवा व्यापारियों के खिलाफ आवाज उठाई और पुलिस की नाकामी पर नाराज़गी जताई।

सरकारी प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री मान की अनुपस्थिति में सरकार ने किसी भी तरह का जवाब नहीं दिया। हालांकि, स्पीकर कलतर सिंह सैंडवाने ने सत्र के दौरान शोक प्रकट करते हुए परविंदर सिंह झोटा को “बुलंद आवाज़” के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि युवा दवा विरोधी कार्यकर्ता का योगदान हमेशा याद रहेगा।

अन्य स्मरणोत्सव
विधानसभा ने परविंदर सिंह झोटा के साथ-साथ सैंगरूर सड़क दुर्घटना के आठ पीड़ितों, पूर्व मंत्री चुणी लाल भगत, पूर्व सांसद वरीन्द्र सिंह बाज़वा, पूर्व MLA रंजीत सिंह, प्रसिद्ध डॉक्टर रतन लाल मित्तल और MLA मंजित सिंह बिलासपुर की माँ को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।

प्रभाव और संदर्भ
इस सत्र के संक्षिप्त होने से सरकार पर दवा व्यापार और कानून व्यवस्था के बिगड़ने के मुद्दे पर और अधिक दबाव बढ़ा। विपक्ष ने इस अवसर का उपयोग करके सरकार की नीतियों पर सवाल उठाया। साथ ही, दवा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद सरकार की जवाबदेही पर भी चर्चा तेज़ हुई।

निष्कर्ष
पंजाब विधान सभा के पहले दिन की दस मिनट की सत्र ने विपक्ष को सरकार पर नई आलोचना करने का मंच दिया। दवा व्यापार, कानून व्यवस्था और दवा विरोधी कार्यकर्ता की हत्या जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए। सरकार की अनुपस्थिति और सत्र के अचानक स्थगन ने विपक्ष को और भी तेज़ी से आरोप लगाने का मौका दिया। यह घटना दर्शाती है कि राजनीतिक मंच पर छोटी अवधि में भी बड़ी बातों को उठाया जा सकता है, और सरकार को जवाबदेही के लिए तैयार रहना चाहिए।

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