रूसोमा के खेतों में परंपराओं की नई रोशनी
परिचय
कुहिमा जिले के उत्तर भाग में स्थित रूसोमा गाँव, अंगामी नागा समुदाय की एक प्रमुख कृषि केंद्र के रूप में जाना जाता है। यहाँ की मुख्य फसल संतरा है, जिसे हर वर्ष ‘शूहुओ नयी’ नामक त्योहार में मनाया जाता है। 2020 में इस त्योहार की शुरुआत के बाद से गाँव ने संतरा उगाने की परंपरा को बढ़ावा दिया है और ग्रामीण उद्यमिता को भी प्रोत्साहित किया है। परंतु, समय के साथ युवा पीढ़ी इन प्राचीन रीति-रिवाज़ों से दूरी बना रही है, जिससे कई अनुष्ठान धीरे-धीरे भुला दिए जा रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
रूसोमा के कृषि जीवन में केवल फसल नहीं, बल्कि विश्वास, परंपरा और सामुदायिक बंधन भी शामिल हैं। जंगली खेतों में ‘झुम’ खेती दो प्रकार के भूखंडों पर की जाती है – ‘थेफिए लिआ’ (पीली-लाल मिट्टी, दो वर्ष तक खेती) और ‘लिएखृ लिआ’ (काली मिट्टी, एक वर्ष तक)। खेती के चक्र के बाद, भूमि को 15–20 वर्ष तक जंगली छोड़ दिया जाता है।
खेत तैयार करने से पहले, बुजुर्ग ‘पेपुओमा’ या ‘त्साक्राउ’ (दिवा के एक बुजुर्ग) एक छोटा गेहूँ का टुकड़ा लेकर गाँव के द्वार के बाहर पत्थर पर रख देते हैं, जिससे फसलों को कीटों और जानवरों से सुरक्षा मिलती है। इस दिन को ‘पेनना’ कहा जाता है, जिसके दौरान गाँव के सभी लोग कुछ गतिविधियों से परहेज़ करते हैं। यदि कोई व्यक्ति इस अनुष्ठान के बिना खेत में जाता है, तो उसे फिर से ‘पेनना’ का सामना करना पड़ता है।
महत्वपूर्ण जानकारी
मई के महीने में धान की खेती शुरू होती है, और अक्टूबर–नवंबर में फसल कटाई का मौसम आता है। कटाई के दौरान ‘लियेडेप्फ़ु’ नामक बुजुर्ग महिला पहला कटाई करती हैं। इसी दिन भी ‘पेनना’ का पालन किया जाता है।
‘टेर्हसे’ अनुष्ठान गेहूँ के हल्के पकने पर किया जाता है। इसमें एक पुख्ता मुर्गा चुना जाता है, जिसके पंख पूरी तरह काले, नाखून बिना टूटे और चोंच सीधी होनी चाहिए। मुर्गे को ‘प्रू’ नामक अस्थायी घर में रखकर प्रार्थना की जाती है। भोजन के बाद, इसे गाँव के द्वार के बाहर ‘खारू’ पर ले जाया जाता है। यदि भोजन पूरा नहीं होता, तो उसके बचे हुए हिस्से को दफनाया जाता है।
संबंधित बयान
रूसोमा के निवासियों के अनुसार, ‘सेक्रेनी’ (फसल के बाद का प्रमुख त्योहार) में ‘किझिए’, ‘गैइज़िए’ और ‘प्रुओ’ जैसे अनुष्ठान होते हैं। ‘किझिए’ में महिलाएँ ताज़ी हरी पत्तियाँ और चावल की बियर के साथ प्रार्थना करती हैं। ‘गैइज़िए’ में पुरुष एक परिपक्व मुर्गे का चयन करते हैं और उसके पैर, पंजे, टांगों और आंतों की स्थिति को देखकर आने वाले वर्ष की भविष्यवाणी करते हैं। ‘प्रुओ’ के बाद ही लोग सामान्य गतिविधियों पर लौटते हैं।
प्रभाव या संदर्भ
कृषि परंपराएँ केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन का एक रूप हैं। परंतु, क्रिश्चियन धर्म के आगमन और आधुनिकता के साथ, कई प्राचीन रीति-रिवाज़ों को त्याग दिया गया है। युवा पीढ़ी में इन परंपराओं के प्रति रुचि घटती जा रही है, जिससे गाँव की सांस्कृतिक विरासत धीरे-धीरे मिटती जा रही है।
निष्कर्ष
रूसोमा के गाँव में कृषि परंपराएँ एक जीवित इतिहास हैं। इन अनुष्ठानों को संरक्षित करना, केवल उन्हें पुनः स्थापित करना नहीं, बल्कि उनके स्मृतियों, आवाज़ों और ज्ञान को जीवित रखना है। युवा पीढ़ी को सुनने, सीखने और संरक्षित करने की ज़िम्मेदारी है, ताकि पूर्वजों का ज्ञान समय के साथ खोने के बजाय भविष्य की पीढ़ियों के लिए उपलब्ध रहे।
